पहली बार रणथंभौर जा रहे हैं? टाइगर सफारी, सही समय और ट्रिप प्लान की पूरी जानकारी

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  अगर आप पहली बार रणथंभौर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके मन में कई सवाल होंगे—रणथंभौर कब जाना चाहिए, कितने दिन रुकना सही रहेगा, टाइगर सफारी कैसे बुक करें, एक सफारी काफी है या दो करनी चाहिए और सबसे बड़ा सवाल, क्या रणथंभौर में बाघ जरूर दिखाई देता है? इन सवालों के जवाब जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि रणथंभौर की यात्रा किसी सामान्य sightseeing trip जैसी नहीं है। यहां आपका अनुभव मौसम, सफारी के समय, जंगल की परिस्थितियों और थोड़े से भाग्य पर भी निर्भर करता है। मेरी नजर में रणथंभौर को सिर्फ “बाघ देखने की जगह” समझना सबसे बड़ी गलती होगी। सवाई माधोपुर के पास स्थित यह इलाका जंगल, झीलों, पहाड़ियों, वन्यजीवों और ऐतिहासिक रणथंभौर किले का ऐसा मेल है, जहां एक ही यात्रा में आपको प्रकृति और इतिहास दोनों को करीब से देखने का मौका मिलता है। अगर आप अपनी पहली यात्रा को थोड़ा सोच-समझकर प्लान करते हैं, तो सिर्फ एक सफारी के बजाय पूरा रणथंभौर अनुभव करना ज्यादा यादगार हो सकता है। पहली बार रणथंभौर जाने के लिए कितने दिन काफी हैं? अगर आप पहली बार रणथंभौर जा रहे हैं, तो 2 रात और 3 दिन का trip एक अच्छा विकल्...

ऑस्ट्रेलिया में क्रिसमस जब त्योहार का अर्थ बदल जाता है

 


ऑस्ट्रेलिया में क्रिसमस आते ही सबसे पहली चीज़ जो चौंकाती है, वह है मौसम। दुनिया के बड़े हिस्से में जहां क्रिसमस ठंड, बर्फ़ और गरम कपड़ों की कल्पना से जुड़ा है, वहीं ऑस्ट्रेलिया में यह त्योहार तपती धूप, नीले आसमान और समुद्र की लहरों के बीच मनाया जाता है। दिसंबर यहां गर्मियों का महीना होता है, इसलिए सांता क्लॉज़ की लाल टोपी और ऊनी कपड़ों की तस्वीरें असल ज़िंदगी से कुछ अलग लगती हैं। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया में क्रिसमस का मतलब पारंपरिक सर्दियों वाले क्रिसमस से काफी अलग हो जाता है।

यहां क्रिसमस सिर्फ धार्मिक या पारिवारिक पर्व नहीं रह जाता, बल्कि यह छुट्टियों और एंजॉयमेंट का नाम बन जाता है। लोग घरों में बंद होकर केक काटने के बजाय समुद्र तटों की ओर निकल पड़ते हैं। बॉन्डी बीच, मैनली बीच और गोल्ड कोस्ट जैसे स्थानों पर क्रिसमस के दिन भीड़ दिखाई देती है, जहां लोग स्विमिंग करते हैं, बारबेक्यू का मज़ा लेते हैं और दोस्तों के साथ समय बिताते हैं। इस माहौल में क्रिसमस एक गंभीर या भावुक त्योहार कम और एक मस्ती भरा फेस्टिवल ज़्यादा लगता है।

ऑस्ट्रेलिया की मल्टीकल्चरल संस्कृति भी क्रिसमस के मायने बदल देती है। यहां दुनिया भर से आए लोग रहते हैं, जिनकी अपनी-अपनी परंपराएं और मान्यताएं हैं। कई लोगों के लिए क्रिसमस सिर्फ एक पब्लिक हॉलिडे है, जिसे वे घूमने, शॉपिंग करने या आराम करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। भारतीय, एशियन और मिडिल ईस्ट से आए लोग अक्सर इसे पारिवारिक मेल-जोल के बजाय एक सामान्य छुट्टी की तरह देखते हैं। इस वजह से क्रिसमस का धार्मिक पक्ष कई जगह पीछे छूट जाता है।

ऑस्ट्रेलिया में क्रिसमस का एक और खास पहलू है इसका कमर्शियल रूप। बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल, डिस्काउंट ऑफर्स और सेल्स से भरे रहते हैं। गिफ्ट खरीदना यहां परंपरा जरूर है, लेकिन इसका भावनात्मक जुड़ाव कई बार औपचारिक सा लगने लगता है। लोग जल्दी-जल्दी उपहार खरीदते हैं और छुट्टियों का प्लान बनाकर शहर से बाहर निकल जाते हैं। इस भागदौड़ में त्योहार का असली भाव कई बार खो सा जाता है।

इसके बावजूद, ऑस्ट्रेलिया में क्रिसमस पूरी तरह अर्थहीन नहीं है। यहां भी परिवार एक साथ बैठते हैं, क्रिसमस लंच करते हैं और बच्चों के चेहरों पर खुशी देखी जा सकती है। फर्क सिर्फ इतना है कि यह खुशी ठंडे मौसम, मोमबत्तियों और शांति से नहीं, बल्कि धूप, हंसी और खुलेपन से जुड़ी होती है। ऑस्ट्रेलियाई अंदाज़ में क्रिसमस ज्यादा रिलैक्स्ड, कम औपचारिक और जिंदगी का जश्न मनाने जैसा होता है।

अगर कहा जाए कि ऑस्ट्रेलिया में क्रिसमस के कोई मायने नहीं हैं, तो यह पूरी तरह सही नहीं होगा। दरअसल, यहां इसके मायने अलग हैं। यह परंपराओं से ज्यादा आज़ादी का, रिवाज़ों से ज्यादा आराम का और भावनाओं से ज्यादा अनुभवों का त्योहार बन चुका है। शायद यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया का क्रिसमस दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग दिखता है, लेकिन अपने तरीके से खास भी है।

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