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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ क्यों है महत्वपूर्ण?

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  नई दिल्ली, 1 जून 2026: भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ (Yoga for Healthy Ageing) घोषित की है। यह दिवस हर वर्ष 21 जून को दुनिया भर में मनाया जाता है और इस बार इसका 12वां संस्करण आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष की थीम का उद्देश्य बढ़ती जीवन प्रत्याशा के साथ लोगों को केवल लंबा जीवन नहीं, बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य पर ध्यान क्यों? आज के समय में चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के कारण लोग पहले की तुलना में अधिक वर्षों तक जीवित रह रहे हैं। हालांकि, बढ़ती उम्र के साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ती हैं। सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ वृद्धावस्था केवल उपचार पर निर्भर नहीं है, बल्कि जीवनशैली और नियमित अभ्यास पर भी आधारित है। इसी संदर्भ में योग को एक सरल और प्रभावी उपाय माना जा रहा है। योग को क्यों माना जा रहा है उपयोगी? योग को एक समग्र स्वास्थ्य अभ्यास माना जाता है, जिसमें शरीर के व्यायाम, श्वास नियंत्रण और ध्यान शामिल हैं। नियमित योग अभ्यास से शरीर ...

अलविदा 'सुरों की मल्लिका' दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की आयु में निधन

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  भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने मखमली और सुरीले कंठ से कई दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली मशहूर पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर (Suman Kalyanpur) का रविवार, 31 मई 2026 की शाम निधन हो गया. उन्होंने 89 वर्ष की आयु में मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली. उनके निधन की वजह बढ़ती उम्र और उससे जुड़ी बीमारियां बताई जा रही हैं. [ 1 , 2 , 3 , 4 , 5 ] सुमन जी के जाने से संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और संगीत जगत की तमाम बड़ी हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. [ 1 , 2 , 3 ] गायिका की करीबी सहयोगी और उनकी जीवनी लिखने वाली मंगला खाडिलकर ने बताया कि सुमन जी ने बेहद शांति से अंतिम सांस ली. भावुक करने वाली बात यह है कि वे अपने आखिरी दिनों में बिस्तर पर  28 जनवरी 1937 को अविभाजित भारत के ढाका (अब बांग्लादेश) में जन्मीं सुमन कल्याणपुर की आवाज में गजब की मिठास थी. उनकी आवाज स्वर कोकिला लता मंगेशकर से इतनी मिलती-जुलती थी कि शुरुआत में लोग अक्सर भ्रमित हो जाते थे. रे...

क्या सोशल मीडिया हमारी सोच को बदल रहा है?

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  आज के समय में सोशल मीडिया हमारे जीवन का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। सुबह उठते ही लोग मोबाइल देखते हैं और रात को सोने से पहले भी सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि इसका हमारी सोच और व्यवहार पर क्या असर पड़ रहा है? जानकारी का सबसे तेज माध्यम सोशल मीडिया ने जानकारी प्राप्त करना बहुत आसान बना दिया है। अब किसी भी घटना की खबर कुछ ही सेकंड में पूरी दुनिया तक पहुंच जाती है। लोग राजनीति, खेल, मनोरंजन और शिक्षा जैसी हर जानकारी तुरंत पा सकते हैं। Read Also : राजा रवि वर्मा की पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ बनी सबसे महंगी भारतीय कला कृति लेकिन तेज जानकारी के साथ एक समस्या भी जुड़ी है — गलत जानकारी। फेक न्यूज का बढ़ता खतरा आज सोशल मीडिया पर कई बार ऐसी खबरें वायरल हो जाती हैं जो पूरी तरह सच नहीं होतीं। लोग बिना जांचे-परखे जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे भ्रम फैलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत की जांच करनी चाहिए। युवाओं पर क्या असर पड़ रहा है? सोशल मीडिया का सबसे अधिक प्रभाव युवाओं पर दिखाई देता है। कई लोग घंटों तक मोब...

ब्लॉग पोस्ट शीर्षक: देवभूमि की गोद में बसा प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्वर्ग: कुमाऊँ

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  उत्तर भारत के उत्तराखंड राज्य में बसा कुमाऊँ क्षेत्र प्रकृति की एक ऐसी अनमोल कृति है जो अपने भीतर असीम शांति, विहंगम दृश्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए है। बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियाँ, घने देवदार के जंगल और कल-कल बहती नदियाँ इस पूरे क्षेत्र को एक जादुई रूप देती हैं। प्राचीन काल से ही कुमाऊँ को मानसखंड के नाम से जाना जाता रहा है, जिसका उल्लेख हमारे पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है।  यहाँ की वादियों में कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है मानो समय ठहर गया हो और प्रकृति खुद आपके स्वागत में बाहें फैलाए खड़ी हो। नैनीताल की शांत झीलें, कौसानी से दिखने वाला हिमालय का भव्य नजारा और अल्मोड़ा की सांस्कृतिक गलियाँ इस क्षेत्र की विविधता को बखूबी बयां करती हैं। यहाँ की आबो-हवा में एक अनोखा सम्मोहन है जो हर साल दुनिया भर से लाखों पर्यटकों और अध्यात्म की तलाश में आए लोगों को अपनी ओर खींच लाता है। कुमाऊँ केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं बल्कि अपनी अनूठी संस्कृति, लोक कला और परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ का कुमाऊँनी संगीत, झोड़ा और छोलिया नृत्य यहाँ के जनजीवन की जीवंत...

आगरा की ठंडाई : गर्मी म ठंडक का अहसास

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  ताज़गी का शाही स्वाद: आगरा की मशहूर ठंडाई, पेठे के शहर का एक और ज़ायका जब भी ज़ुबान पर ताज़महल के शहर 'आगरा' का नाम आता है, तो दिमाग में सबसे पहले अंगूरी पेठे या चटपटी बेड़ई की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आगरा की गलियों में एक और ऐसा ज़ायका छिपा है, जिसके बिना यहाँ की गर्मियां और होली का त्योहार अधूरा है? जी हां, हम बात कर रहे हैं आगरा की पारंपरिक और शाही ठंडाई की। अगर आप आगरा आ रहे हैं और आपने यहाँ के पुराने बाज़ारों में घूमकर एक कुल्हड़ ठंडी-ठंडी ठंडाई नहीं पी, तो समझिए आपकी आगरा यात्रा अधूरी रह गई। आइए आज अपने ब्लॉग 'बोलती कलम' के माध्यम से आपको सैर कराते हैं आगरा के इस मीठे और ताज़गी से भरे सफर की। स्वाद ऐसा जो मुग़ल काल की याद दिला दे आगरा की ठंडाई की सबसे बड़ी खासियत इसका गाढ़ापन और इसमें इस्तेमाल होने वाले मसालों का सटीक संतुलन है। यह कोई साधारण मिल्क शेक नहीं है, बल्कि इसे बेहद पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है। शुद्ध गाढ़े दूध में बादाम, पिस्ता, काजू, खसखस (पोपी सीड्स), खरबूजे के बीज (मगज), सौंफ, इलायची, काली मिर्च और कश्मीरी केसर का एक स...

मथुरा की सबसे मशहूर लस्सी, जिसे पीने दूर-दूर से आते हैं लोग

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  Mathura के मशहूर चौक बाजार में स्थित नत्थू यादव लस्सी वाले अपनी पारंपरिक देसी लस्सी के लिए खास पहचान रखते हैं। गर्मियों का मौसम शुरू होते ही यहां सुबह से ही लोगों की भीड़ लगनी शुरू हो जाती है। मथुरा घूमने आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक उनकी प्रसिद्ध लस्सी का स्वाद लेना अपनी यात्रा का हिस्सा मानते हैं। इनका चर्चित संवाद — “जो पियेगा हमारी लस्सी, वह जिएगा 80” — आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। यह लाइन सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि वर्षों से कायम स्वाद और भरोसे की पहचान बन चुकी है। पुरानी परंपरा और देसी अंदाज के साथ यह दुकान आज भी लोगों को वही खास स्वाद परोस रही है। यहां की गाढ़ी, ठंडी और मलाई से भरपूर लस्सी मिट्टी के कुल्हड़ में दी जाती है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। कुल्हड़ की सोंधी खुशबू और ऊपर जमी ताजी मलाई हर घूंट को खास बना देती है। यही वजह है कि लोग दूर-दूर से यहां की लस्सी पीने पहुंचते हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक दुकान पर ग्राहकों की लंबी कतार देखने को मिलती है। स्थानीय लोगों के अलावा बाहर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी यहां जरूर पहुंचते हैं। Shri Krishna Janmab...

सोमनाथ: भारत की सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक

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  सोमनाथ भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में इसका स्थान प्रथम है। वर्ष 1026 से बार-बार आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ विश्वास, दृढ़ता और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक बना हुआ है। इसका 1951 में राष्ट्रीय नेतृत्व के अधीन पुनर्निर्माण किया गया। मंदिर को फिर से खोले जाने के साथ ही भारतीय सभ्यता के पुनरोदय का आरंभ हुआ। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व इस मंदिर पर 1026 में हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष का समारोह है। इसके साथ ही इसे मई 1951 में खोले जाने के 75 वर्ष भी पूरे हो गए हैं।  सोमनाथ का पावन तट गुजरात के सौराष्ट्र में समुद्र तट के निकट प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। शिव पुराण में वर्णित सबसे पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक इस मंदिर में स्थापित है। इसे भगवान शिव, भगवान कृष्ण और शक्ति की आराधना के लिए श्रद्धेय माना जाता है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में सोमनाथ को 12 ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी माना गया है। यह भारत की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत में इसके अग्रणी स्थान को प्रतिबिंबित करता है। Red Also : पु...