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अल्मोड़ा कुमाऊँ के वैभव और अध्यात्म की अनकही दास्तान

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  देवभूमि उत्तराखंड की गोद में बसा अल्मोड़ा केवल एक शहर नहीं, बल्कि कुदरत और संस्कृति का एक अनूठा संगम है। 'बोलती कलम' के लिए अगर हम अल्मोड़ा की बात करें, तो यहाँ की हवाओं में एक अलग ही सुकून और इतिहास की खुशबू रची-बसी महसूस होती है। कोसी और सुयाल नदियों के बीच एक घोड़े की काठी के आकार की पहाड़ी पर स्थित यह शहर सदियों से कुमाऊँ की सांस्कृतिक राजधानी रहा है। यहाँ की टेढ़ी-मेढ़ी गलियाँ और पारंपरिक लकड़ी की नक्काशी वाले घर आज भी चंद राजाओं के वैभव और गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं। अल्मोड़ा की सबसे बड़ी विशेषता इसका बौद्धिक और आध्यात्मिक परिवेश है। यहाँ की धरती ने स्वामी विवेकानंद जैसी महान विभूतियों को अपनी ओर आकर्षित किया, जिन्होंने यहाँ के कसार देवी क्षेत्र में ध्यान लगाकर असीम शांति प्राप्त की थी। कसार देवी के बारे में कहा जाता है कि यहाँ चुंबकीय शक्तियाँ कुछ इस तरह विद्यमान हैं कि यहाँ पहुँचते ही मन स्वतः ही ध्यानमग्न हो जाता है।  इसके अलावा, जागेश्वर धाम के प्राचीन मंदिर समूह और चितई गोलू देवता का मंदिर यहाँ की आस्था के मुख्य स्तंभ हैं, जहाँ घंटियों की गूँज और भक्तों का वि...

दुधवा नेशनल पार्क: तराई के जंगलों का अनछुआ स्वर्ग

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  दुधवा नेशनल पार्क उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित प्रकृति और वन्यजीवों का एक अद्भुत संगम है। यह भारत-नेपाल सीमा के पास तराई क्षेत्र में फैला हुआ है, जहाँ घने साल के जंगल, विशाल घास के मैदान और दलदली क्षेत्र इसे एक विशेष पहचान देते हैं। इस पार्क की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का शांत और अनछुआ वातावरण है, जो सैलानियों को शहरी कोलाहल से दूर प्रकृति की गोद में ले जाता है।   यह राष्ट्रीय उद्यान जैव विविधता के मामले में बेहद समृद्ध है। यहाँ लुप्तप्राय प्रजाति के बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते हैं, जो इस पार्क का मुख्य आकर्षण हैं। इसके अलावा, यहाँ बाघ, भारतीय गैंडे और हाथियों का भी बसेरा है। गैंडा पुनर्वास परियोजना की सफलता ने दुधवा को दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों के बीच प्रसिद्ध बना दिया है।  पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह किसी स्वर्ग से कम नहीं है, क्योंकि यहाँ देश-विदेश से आने वाले सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं।   सुहेली और मोहना जैसी नदियों के किनारे बसा यह पार्क न केवल वन्यजीवों को जीवन प्रदान करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र...

भीषण गर्मी में अमृत समान है पारंपरिक ठंडाई: स्वाद और सेहत का अनूठा संगम

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  तपती गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच जब शरीर थकान और प्यास से व्याकुल होने लगता है, तब एक गिलास ठंडी और मलाईदार ठंडाई किसी वरदान से कम नहीं लगती। भारतीय संस्कृति में ठंडाई केवल एक पेय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और स्वाद का एक अद्भुत संगम है जो सदियों से हमारी परंपराओं का हिस्सा रहा है।  इसमें मौजूद बादाम, सौंफ, खसखस, इलायची और गुलाब की पंखुड़ियाँ न केवल शरीर को अंदरूनी शीतलता प्रदान करती हैं, बल्कि मानसिक शांति और ताजगी भी देती हैं।  बाजार में मिलने वाले कृत्रिम शीतल पेय के मुकाबले ठंडाई एक प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है। गर्मी के दिनों में जब दोपहर का सूरज अपनी चरम सीमा पर होता है, तब दूध और मेवों के मिश्रण से बनी यह पारंपरिक औषधि लू और डिहाइड्रेशन से बचाने में ढाल का काम करती है।  इसमें डाली जाने वाली काली मिर्च और केसर इसके स्वाद को एक शाही एहसास देते हैं, जिससे हर घूँट में एक नई स्फूर्ति का अनुभव होता है। अपने ब्लॉग 'बोलती कलम' के माध्यम से हम यही संदेश देना चाहते हैं कि इस गर्मी अपनी जड़ों की ओर ...

हल्दी वाला दूध सिर्फ एक परंपरा नहीं संपूर्ण स्वास्थ्य का वरदान

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  हल्दी और दूध का मेल भारतीय आयुर्वेद की एक ऐसी अनमोल देन है, जिसे आज पूरी दुनिया 'गोल्डन मिल्क' के नाम से अपना रही है। यह केवल एक पारंपरिक पेय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का एक ऐसा खजाना है जो शरीर को भीतर से मज़बूत बनाता है। जब हम दूध में हल्दी मिलाकर पीते हैं, तो इसमें मौजूद करक्यूमिन नामक तत्व एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी एजेंट के रूप में काम करता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर हमें संक्रमणों से सुरक्षित रखता है।  यह जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में भी उतना ही असरदार है जितना कि पुरानी सर्दी-खांसी और गले की खराश को दूर करने में। इतना ही नहीं, हल्दी वाला दूध हमारे पाचन तंत्र को सुधारने और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिसका सीधा असर हमारी चमकती त्वचा और बेहतर मेटाबॉलिज्म पर दिखता है। मानसिक शांति और अच्छी नींद के लिए भी इसे रामबाण माना गया है, क्योंकि रात को सोने से पहले इसका सेवन मस्तिष्क को शांत कर गहरी नींद लाने में सहायक होता है।  रक्त को शुद्ध करने से लेकर हड्डियों को मजबूती देने तक, हल्दी वाला दूध हर उम्र ...

भारत का सबसे बड़ा मल्टीप्लेक्स मायाजाल चेन्नई

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  चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) पर स्थित  मायाजाल (Mayajaal)  सिर्फ एक सिनेमाघर नहीं, बल्कि मनोरंजन का एक पूरा शहर है । लगभग 30 एकड़ में फैला यह परिसर अपने समय में भारत का सबसे बड़ा मल्टीप्लेक्स होने का गौरव प्राप्त कर चुका है। आपके ब्लॉग 'बोलती कलम' के लिए मायाजाल पर यह विशेष लेख: चेन्नई की खूबसूरती और समुद्र किनारे की ठंडी हवाओं के बीच 'मायाजाल' मनोरंजन का एक ऐसा केंद्र है जहाँ फिल्मों के प्रति दीवानगी एक अलग स्तर पर नज़र आती है।  मायाजाल मल्टीप्लेक्स  में कुल  16 स्क्रीन्स  हैं, जो इसे देश के सबसे बड़े सिनेमा परिसरों में से एक बनाती हैं।  यहाँ एक साथ कई भाषाओं की फिल्में दिखाई जाती हैं, जिससे यह हर तरह के दर्शकों की पहली पसंद बना रहता है। मायाजाल की खासियत सिर्फ इसका विशाल आकार नहीं, बल्कि यहाँ मिलने वाला संपूर्ण मनोरंजन पैकेज है।  सिनेमा के अलावा यहाँ  गेमिंग ज़ोन, बॉलिंग एली, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और एक शानदार रिसॉर्ट  भी मौजूद है। सप्ताहांत (weekends) पर यहाँ लगभग 80 से अधिक शो चलते हैं, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है। शहर क...

आज रहेगी फ्री एंट्री विश्व धरोहर दिवस 2026,18 april ताज और आगरा किला देखने का सुनहरा मौका,

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  आगरा की ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से निहारने का सपना देखने वालों के लिए आज का दिन बेहद खास है। 18 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'विश्व धरोहर दिवस' मनाया जा रहा है, और इस विशेष अवसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने पर्यटकों को एक शानदार तोहफा दिया है। आज आगरा के विश्व प्रसिद्ध ताजमहल, ऐतिहासिक आगरा किला और  फतेहपुर सीकरी सहित देश के सभी संरक्षित स्मारकों में प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा । इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता को अपनी गौरवशाली विरासत और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। हालांकि, पर्यटकों को यह ध्यान रखना होगा कि ताजमहल के मुख्य गुंबद (Main Mausoleum) में जाने के लिए 200 रुपये का अतिरिक्त टिकट पहले की तरह ही अनिवार्य रहेगा, जो भीड़ प्रबंधन के नियमों के तहत लागू है। मुख्य परिसर में प्रवेश के लिए आज किसी भी टिकट की आवश्यकता नहीं होगी और टिकट विंडो बंद रहेंगी। हर साल 18 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय स्मारक और स्थल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। 2026 के लिए इस दिन की थीम 'आपदाओं और संघर्षों के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया' रखी गई है।...

अंडमान-निकोबार तो इन खूबसूरत जगहों को na भूलें

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  अंडमान और निकोबार आइलैंड दक्षिण-पूर्व में स्थित एक बहुत ही खूबसूरत जगह है, जहां नीला समुद्र, सुनहरी रेत और रिच बायो डायवर्सिटी टूरिस्टों को अट्रैक्ट करती है। यह द्वीप समूह अपने खूबसूरत समुद्री जीवन, ऐतिहासिक स्थलों और रोमांचक वॉटर स्पोर्ट्स के लिए फेमस है। यहां की संस्कृति और नेचर का अनोखा संगम इसे हर घुमक्कड़ की बकेट लिस्ट में शामिल करता है। अगर आप इस स्वर्ग का आनंद लेना चाहते हैं,तो यहां की ये खास जगहें जरूर देखें। आइए जानते हैं इनके बारे में- हैवलॉक आइलैंड हैवलॉक आइलैंड अंडमान का सबसे फेमस टूरिज्म स्थल है, जहां सफेद रेतीले तट और नीला समुद्र मन मोह लेते हैं। राधानगर बीच को एशिया का सबसे खूबसूरत समुद्र तट माना जाता है। यहां  स्कूबा डाइविंग  और स्नॉर्कलिंग का अनुभव अविस्मरणीय होता है। नील आइलैंड नील द्वीप, जिसे अब ‘शहीद द्वीप’ के नाम से भी जाना जाता है, अपने आप में सम्पूर्ण प्राकृतिक सुंदरता का खजाना समेटे हुए है। यहां लक्ष्मणपुर, भरतपुर और सीतापुर जैसे समुद्र तटों की शांति और नीला पानी सुकून देने वाला अनुभव प्रदान करता है। बाराटांग आइलैंड बाराटांग आइलैंड अपने अद्भुत ला...

राजा रवि वर्मा की पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ बनी सबसे महंगी भारतीय कला कृति

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  मुंबई में हाल ही में हुई एक ऐतिहासिक नीलामी ने भारतीय कला जगत में नया अध्याय जोड़ दिया। प्रसिद्ध भारतीय कलाकार राजा रवि वर्मा की कालजयी पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ ने वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड तोड़ कीमत हासिल की।इस ऑयल पेंटिंग को साइरस पूनावाला, चेयरमैन, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ₹150.36 करोड़ ($17.9 मिलियन) में खरीदा, जो किसी भी आधुनिक भारतीय कलाकृति के लिए अब तक की सबसे अधिक कीमत है।1890 के दशक में बनाई गई यह कलाकृति माँ और पुत्र के पवित्र रिश्ते को बेहद भावनात्मक और जीवंत तरीके से दर्शाती है। नीलामी के दौरान यह पेंटिंग अपने अनुमानित मूल्य ₹72 करोड़ से ₹108 करोड़ को काफी पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बना गई। साइरस पूनावाला ने पेंटिंग खरीदने के बाद इसे एक “राष्ट्रीय खजाना” बताया और यह इच्छा जताई कि इसे सिर्फ निजी संग्रह तक सीमित न रखकर समय-समय पर जनता के लिए प्रदर्शित किया जाना चाहिए।कला विशेषज्ञों ने इस निर्णय की सराहना की, क्योंकि यह भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और साझा करने में मदद करेगा। राजा रवि वर्मा: जीवन और कला राजा रवि वर्मा (29 अप्रैल 1848 – 2 अक्टूबर 1906) भारतीय ...

हर साल 1 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'अप्रैल फूल' (April Fool) या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है

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  हर साल  1 अप्रैल  को पूरी दुनिया में  'अप्रैल फूल' (April Fool)  या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है । इस दिन लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मज़ाक (pranks) करते हैं और एक-दूसरे को 'बेवकूफ' बनाकर आनंद लेते हैं। इसे मनाने के पीछे सबसे लोकप्रिय ऐतिहासिक कारण नीचे दिए गए हैं: कैलेंडर में बदलाव (फ्रांस):  16वीं सदी (1564/1582) में फ्रांस ने  जूलियन कैलेंडर  की जगह  ग्रेगोरियन कैलेंडर  अपनाया। इसके बाद नया साल 1 अप्रैल के बजाय  1 जनवरी  से शुरू होने लगा। उस समय सूचना के अभाव में कई लोग 1 अप्रैल को ही नया साल मनाते रहे। ऐसे लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए उन्हें "अप्रैल फूल" कहा जाने लगा। हिलारिया उत्सव (रोम):  प्राचीन रोम में मार्च के अंत में  'हिलारिया'  नाम का त्यौहार मनाया जाता था। इसमें लोग वेश बदलकर एक-दूसरे की नकल उतारते थे और हंसी-मज़ाक करते थे, जिसे अप्रैल फूल की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। अप्रैल फिश (April Fish):  फ्रांस में जिस व्यक्ति को मूर्ख बनाया जाता है, उसे 'पोइज़न द एप्रिल' (अप्रैल फि...

ऋषिकेश का अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव: आत्मा की यात्रा का अनुभव

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  मार्च की शुरुआत में ऋषिकेश में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव दुनिया  में  भर में प्रचलित है। योग अब एक वैश्विक घटना बन चुका है। महोत्सव हर साल मार्च में आयोजित होता है और यह दुनिया भर से योग प्रेमियों को आकर्षित करता है। भारत के हर कोने से लोग इसमें शामिल होते हैं, और लगभग हर हिस्से से विदेशी प्रतिभागी भी यहाँ दिखते हैं। मुख्य उत्सव परमार्थ निकेतन आश्रम में पवित्र गंगा के तट पर आयोजित होता है, लेकिन शहर के हर होटल और आश्रम में भी विशेषज्ञों और मेहमानों के नेतृत्व में योग और ध्यान सत्र होते हैं। पूरे शहर का वातावरण ध्यान और योग की ऊर्जा से भरा होता है। मैं जिस होटल में रहा, वहाँ दैनिक कार्यक्रम में योग सत्र, ध्यान कक्षाएं, चिकित्सा सत्र और सत्संग शामिल थे। हमने सुबह गंगा के निजी घाट पर दिन की शुरुआत की। सूरज के उगते ही गंगा की लालिमा और बहता जल अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। सुबह की प्रार्थना और ध्यान से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है। भोजन भी योग का हिस्सा है। नाश्ते में ताज़े फल, रस और ज्यादातर शाकाहारी व्यंजन होते हैं। पहली बार मुझे ऐसा लगा...

स्विट्जरलैंड में दुनिया के दो सबसे रहने योग्य शहर क्यों हैं

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  जब दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों की रैंकिंग की बात आती है, तो स्कैंडिनेविया आमतौर पर शीर्ष पर रहता है। हम डेनमार्क, फिनलैंड और नॉर्वे को  दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची  में सबसे आगे देखते आए हैं - लेकिन एक और यूरोपीय देश चुपचाप दुनिया में रहने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक होने का दावा पेश कर रहा है। इस वर्ष के ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स  और  स्मार्ट सिटी इंडेक्स  में कई शहरों के शीर्ष 10 में शामिल होने से  स्विट्जरलैंड यह दर्शाता है कि उसकी नीतियां राष्ट्रव्यापी प्रभाव डालती हैं।  ज्यूरिख और जिनेवा ने स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करते हुए शीर्ष 10 सबसे रहने योग्य शहरों में जगह बनाई; वहीं ज्यूरिख को बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी में शीर्ष स्थान के लिए नंबर एक स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला, जिनेवा चौथे स्थान पर और लॉज़ेन सातवें स्थान पर रहा। पांच अन्य देशों से घिरे एक छोटे देश के रूप में, स्विट्जरलैंड अपने अस्तित्व के दौरान विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं से प्रभावित रहा है, जिसके परिणामस्वरूप शासन की सकारात्मक शैली विकसित...

मनाली बादलों के बीच बसा एडवेंचर का स्वर्ग

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  कुल्लू घाटी के अंत में स्थित, मनाली न केवल हिमाचल प्रदेश के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि भी है। मनाली समानार्थी धाराएं और पक्षियों, जंगलों और बागानों और बर्फ से ढके पहाड़ों की भतीजी हैं।  मनाली एक प्राचीन व्यापार मार्ग का असली प्रारंभिक बिंदु है जो रोहतंग और बारालाचा पास पार करता है, और लाहुल और लद्दाख के माध्यम से कश्मीर में चलता है जबकि अलग सड़क इसे स्पीति से जोड़ती है।  अब जम्मू-कश्मीर में लेह, चंबा में पंगी घाटी और लाहुल और स्पीति के काजा तक मोटर लिंक प्रदान किए गए हैं। गर्मी के मौसम के दौरान मनाली से इन स्थानों पर नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। यह कुल्लू से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मनाली के बारे में एक दिलचस्प किंवदंती है जो कहती है कि ‘मनु संहिता’ के लेखक मनु, इस देश में एक जगह पर खगोलीय नाव से पहली बार पृथ्वी पर चले गए। वह विशेष स्थान जहां उन्होंने अपना निवास स्थापित किया था, वर्तमान मनाली थी जिसे मनु के निवास स्थान ‘मनु-अलाया’ के बदले नाम के रूप में जाना जाता है। मनु के लिए समर्पित मंदिर अभी भी मनाली गांव में मौजूद...