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लोग कहते हैं दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन किस दिशा में ?

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  अक्सर लोगों को कहते सुना जाता है कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। पहले जैसा समय अब नहीं रहा। तकनीक बदल गई है, लोगों की सोच बदल रही है और जिंदगी जीने का तरीका भी पहले से अलग हो गया है। लेकिन कभी आपने रुककर सोचा है कि आखिर यह दुनिया बदल किस दिशा में रही है? क्या हम सच में बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, या सिर्फ हमारी जिंदगी की रफ्तार तेज हो गई है? तकनीक आगे बढ़ रही है, इंसान कितना आगे बढ़ा है? आज मोबाइल फोन के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से कुछ ही सेकंड में बात की जा सकती है। इंटरनेट ने जानकारी को हमारी उंगलियों तक पहुँचा दिया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए साधन कई कामों को आसान बना रहे हैं। जो काम पहले घंटों या दिनों में होते थे, उनमें से कई अब कुछ मिनटों में पूरे हो जाते हैं। यह बदलाव निश्चित रूप से हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बना रहा है। लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है। क्या तकनीक के आगे बढ़ने के साथ इंसान के भीतर भी उतना ही बदलाव आया है? हमारे पास दूसरों से जुड़े रहने के अधिक साधन हैं, फिर भी कई बार अपने ही लोगों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। जिंदगी...

जोहरन ममदानी: टैक्सी ड्राइवर के बेटे से न्यूयॉर्क सिटी के मेयर तक

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नवंबर 2025 की सुबह न्यूयॉर्क ने नया इतिहास लिखा। 34 वर्षीय ज़ोहरन ममदानी को शहर का पहला मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मूल का मेयर चुना गया। यह सफलता कोई अचानक नहीं आई — यह मेहनत, प्रतिबद्धता और जमीनी स्तर पर काम करने की लंबी यात्रा का परिणाम थी। जन्म और शुरुआती जीवन ज़ोहरन का जन्म 1991 में उगांडा के कम्पाला में हुआ। उनके पिता मह्मूद ममदानी एक विद्वान थे और माँ मीरा नायर एक प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक। परिवार जल्द ही न्यूयॉर्क आ गया, जहाँ ज़ोहरन ने अपनी शिक्षा और सामाजिक जागरूकता की नींव रखी। शिक्षा और सामाजिक सोच उन्होंने Bowdoin College से 2014 में Africana Studies में डिग्री प्राप्त की। कॉलेज में उन्होंने सामाजिक न्याय, असमानता और समुदाय की समस्याओं को समझना शुरू किया, जिसने उनकी राजनीतिक दिशा को आकार दिया। राजनीति में पहला कदम कॉलेज के बाद ज़ोहरन ने हाउसिंग एक्टिविस्ट के तौर पर काम किया। 2020 में उन्होंने Astoria, Queens से न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली का चुनाव लड़ा और विजयी हुए। उनकी राजनीति का मूल मंत्र था: “सरकार अमीरों के लिए नहीं, आम लोगों के लिए होनी चाहिए।” लोकतांत्रिक समाज...