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अंडमान-निकोबार तो इन खूबसूरत जगहों को na भूलें

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  अंडमान और निकोबार आइलैंड दक्षिण-पूर्व में स्थित एक बहुत ही खूबसूरत जगह है, जहां नीला समुद्र, सुनहरी रेत और रिच बायो डायवर्सिटी टूरिस्टों को अट्रैक्ट करती है। यह द्वीप समूह अपने खूबसूरत समुद्री जीवन, ऐतिहासिक स्थलों और रोमांचक वॉटर स्पोर्ट्स के लिए फेमस है। यहां की संस्कृति और नेचर का अनोखा संगम इसे हर घुमक्कड़ की बकेट लिस्ट में शामिल करता है। अगर आप इस स्वर्ग का आनंद लेना चाहते हैं,तो यहां की ये खास जगहें जरूर देखें। आइए जानते हैं इनके बारे में- हैवलॉक आइलैंड हैवलॉक आइलैंड अंडमान का सबसे फेमस टूरिज्म स्थल है, जहां सफेद रेतीले तट और नीला समुद्र मन मोह लेते हैं। राधानगर बीच को एशिया का सबसे खूबसूरत समुद्र तट माना जाता है। यहां  स्कूबा डाइविंग  और स्नॉर्कलिंग का अनुभव अविस्मरणीय होता है। नील आइलैंड नील द्वीप, जिसे अब ‘शहीद द्वीप’ के नाम से भी जाना जाता है, अपने आप में सम्पूर्ण प्राकृतिक सुंदरता का खजाना समेटे हुए है। यहां लक्ष्मणपुर, भरतपुर और सीतापुर जैसे समुद्र तटों की शांति और नीला पानी सुकून देने वाला अनुभव प्रदान करता है। बाराटांग आइलैंड बाराटांग आइलैंड अपने अद्भुत ला...

राजा रवि वर्मा की पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ बनी सबसे महंगी भारतीय कला कृति

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  मुंबई में हाल ही में हुई एक ऐतिहासिक नीलामी ने भारतीय कला जगत में नया अध्याय जोड़ दिया। प्रसिद्ध भारतीय कलाकार राजा रवि वर्मा की कालजयी पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ ने वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड तोड़ कीमत हासिल की।इस ऑयल पेंटिंग को साइरस पूनावाला, चेयरमैन, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ₹150.36 करोड़ ($17.9 मिलियन) में खरीदा, जो किसी भी आधुनिक भारतीय कलाकृति के लिए अब तक की सबसे अधिक कीमत है।1890 के दशक में बनाई गई यह कलाकृति माँ और पुत्र के पवित्र रिश्ते को बेहद भावनात्मक और जीवंत तरीके से दर्शाती है। नीलामी के दौरान यह पेंटिंग अपने अनुमानित मूल्य ₹72 करोड़ से ₹108 करोड़ को काफी पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बना गई। साइरस पूनावाला ने पेंटिंग खरीदने के बाद इसे एक “राष्ट्रीय खजाना” बताया और यह इच्छा जताई कि इसे सिर्फ निजी संग्रह तक सीमित न रखकर समय-समय पर जनता के लिए प्रदर्शित किया जाना चाहिए।कला विशेषज्ञों ने इस निर्णय की सराहना की, क्योंकि यह भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और साझा करने में मदद करेगा। राजा रवि वर्मा: जीवन और कला राजा रवि वर्मा (29 अप्रैल 1848 – 2 अक्टूबर 1906) भारतीय ...

हर साल 1 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'अप्रैल फूल' (April Fool) या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है

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  हर साल  1 अप्रैल  को पूरी दुनिया में  'अप्रैल फूल' (April Fool)  या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है । इस दिन लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मज़ाक (pranks) करते हैं और एक-दूसरे को 'बेवकूफ' बनाकर आनंद लेते हैं। इसे मनाने के पीछे सबसे लोकप्रिय ऐतिहासिक कारण नीचे दिए गए हैं: कैलेंडर में बदलाव (फ्रांस):  16वीं सदी (1564/1582) में फ्रांस ने  जूलियन कैलेंडर  की जगह  ग्रेगोरियन कैलेंडर  अपनाया। इसके बाद नया साल 1 अप्रैल के बजाय  1 जनवरी  से शुरू होने लगा। उस समय सूचना के अभाव में कई लोग 1 अप्रैल को ही नया साल मनाते रहे। ऐसे लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए उन्हें "अप्रैल फूल" कहा जाने लगा। हिलारिया उत्सव (रोम):  प्राचीन रोम में मार्च के अंत में  'हिलारिया'  नाम का त्यौहार मनाया जाता था। इसमें लोग वेश बदलकर एक-दूसरे की नकल उतारते थे और हंसी-मज़ाक करते थे, जिसे अप्रैल फूल की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। अप्रैल फिश (April Fish):  फ्रांस में जिस व्यक्ति को मूर्ख बनाया जाता है, उसे 'पोइज़न द एप्रिल' (अप्रैल फि...