संदेश

मोबाइल और मानव संपर्क में कमी लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लोग कहते हैं दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन किस दिशा में ?

चित्र
  अक्सर लोगों को कहते सुना जाता है कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। पहले जैसा समय अब नहीं रहा। तकनीक बदल गई है, लोगों की सोच बदल रही है और जिंदगी जीने का तरीका भी पहले से अलग हो गया है। लेकिन कभी आपने रुककर सोचा है कि आखिर यह दुनिया बदल किस दिशा में रही है? क्या हम सच में बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, या सिर्फ हमारी जिंदगी की रफ्तार तेज हो गई है? तकनीक आगे बढ़ रही है, इंसान कितना आगे बढ़ा है? आज मोबाइल फोन के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से कुछ ही सेकंड में बात की जा सकती है। इंटरनेट ने जानकारी को हमारी उंगलियों तक पहुँचा दिया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए साधन कई कामों को आसान बना रहे हैं। जो काम पहले घंटों या दिनों में होते थे, उनमें से कई अब कुछ मिनटों में पूरे हो जाते हैं। यह बदलाव निश्चित रूप से हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बना रहा है। लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है। क्या तकनीक के आगे बढ़ने के साथ इंसान के भीतर भी उतना ही बदलाव आया है? हमारे पास दूसरों से जुड़े रहने के अधिक साधन हैं, फिर भी कई बार अपने ही लोगों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। जिंदगी...

अब ट्रेन और बस की यात्रा सिर्फ स्क्रीन तक सीमित क्यों हो गई

चित्र
  कभी आप ट्रेन या बस में बैठें हैं, तो ध्यान दिया होगा कि आसपास बैठे लोग अक्सर अपने मोबाइल या हेडफोन में व्यस्त रहते हैं , और सामने वाले व्यक्ति को बस एक अपरिचित सिल्हूट की तरह देखते हैं। पहले की यात्राओं में लोग एक-दूसरे से बात करते थे, मुस्कुराते थे, कहानियाँ साझा करते थे। अब वही जगह चुप्पी और दूरियों की तरह बदल गई है। मोबाइल का जाल और दूरी मुझे याद है जब मैं कॉलेज के दिनों में ट्रेन यात्रा करता था, तो अनजान यात्रियों से बातचीत करना आम बात थी। कोई चाय लेकर बैठा होता, कोई अपने अनुभव साझा करता। लेकिन आज, मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया में हम अपने आसपास के वास्तविक इंसानों को देखना ही भूल गए हैं। बस या ट्रेन में कई बार ऐसा होता है कि कोई मुस्कुराता है, या सीट शेयर करने में मदद करता है, लेकिन हम उस पहल को नोटिस नहीं करते। हमारी नजरें स्क्रीन पर होती हैं, और हमारे दिल कुशन की तरह आराम में , वास्तविक दुनिया से दूर। Also Read : गोण्ड पेंटिंग्स की कहानी, कैसे यह भारतीय लोककला बन गई ग्लोबल सेंसेशन छोटे पल की यादें एक बार मुझे ट्रेन में एक दादी और उसका पोता मिले। पोता लगातार मोबाइ...