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लोग कहते हैं दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन किस दिशा में ?

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  अक्सर लोगों को कहते सुना जाता है कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। पहले जैसा समय अब नहीं रहा। तकनीक बदल गई है, लोगों की सोच बदल रही है और जिंदगी जीने का तरीका भी पहले से अलग हो गया है। लेकिन कभी आपने रुककर सोचा है कि आखिर यह दुनिया बदल किस दिशा में रही है? क्या हम सच में बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, या सिर्फ हमारी जिंदगी की रफ्तार तेज हो गई है? तकनीक आगे बढ़ रही है, इंसान कितना आगे बढ़ा है? आज मोबाइल फोन के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से कुछ ही सेकंड में बात की जा सकती है। इंटरनेट ने जानकारी को हमारी उंगलियों तक पहुँचा दिया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए साधन कई कामों को आसान बना रहे हैं। जो काम पहले घंटों या दिनों में होते थे, उनमें से कई अब कुछ मिनटों में पूरे हो जाते हैं। यह बदलाव निश्चित रूप से हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बना रहा है। लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है। क्या तकनीक के आगे बढ़ने के साथ इंसान के भीतर भी उतना ही बदलाव आया है? हमारे पास दूसरों से जुड़े रहने के अधिक साधन हैं, फिर भी कई बार अपने ही लोगों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। जिंदगी...

रोचक कहानी : फ्रांस में पहली भारतीय किराने की दुकान पोन्नौसामी ने शुरू की

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  एंटोनी पोन्नौसामी और उनकी पत्नी रानी भारत से प्यार करने वाले पांडिचेरी के एंटोनी पोन्नौसामी फ्रांस में इंडियन कल्चर को लाने वाले पहले व्यक्ति थे जो पैसेज ब्रॉडी  में भारतीय  रौनक लाए। 28 अक्टूबर, 2017 को 80 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, यह फ्रांस की प्रवासी भारतियों के लिए बहुत दुखद समाचार था । 7 दिसंबर, 2018 को पैसेज ब्रैडी में उनके सम्मान में एक यादगार प्लाक का अनावरण किया गया। कहानी बड़ी रोचक है, यह 1962 की बात है, एंटोनी पोन्नौसामी पांडिचेरी में फ्रेंच एम्बेसी में कुक थे । फ्रेंच एम्बेसेडर ने  पेरिस लौट लौटते समय एंटोनी को अपने साथ चलने के लिए आमंत्रण दिया । पोन्नौसामी ने इस आमंत्रण को स्वीकार किया तथा पेरिस के लिए प्रस्थान किया। कुछ वर्ष बाद उनकी  पत्नी रानी तथा उनकी  आठ साल की बेटी डेलिया भी पेरिस आ गईं । कुछ वर्ष बाद  फ्रांस में बसने के बाद, एंटोनी को एहसास हुआ कि वहाँ इंडियन प्रोडक्ट्स मिलना नामुमकिन था। अपने जन्मदिन पर पड़ोस में एक दोस्त के साथ लंच के लिए जाते  समय, एंटोनी एक रास्ते से गुजरते हैं,जहाँ बहुत सारी  खाली दुकानें थीं...