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ओणम — केरल का प्रमुख त्योहार

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  ओणम केरल का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार खुशहाली, प्रेम, भाईचारे और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।   ओणम मुख्य रूप से राजा महाबली की याद में मनाया जाता है। मान्यता है कि राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने हर वर्ष केरल आते हैं।ओणम के अवसर पर घरों के आंगन में रंग-बिरंगे फूलों से पुक्कलम बनाया जाता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं और पारंपरिक ओणम सद्या का आनंद लेते हैं। केरल की प्रसिद्ध नौका दौड़ , लोकनृत्य और पारंपरिक कार्यक्रम इस त्योहार को और भी आकर्षक बना देते हैं। ओणम हमें प्रेम, समानता और मिल-जुलकर रहने का संदेश देता है। यही कारण है कि यह त्योहार केरल की संस्कृति और परंपरा की सुंदर पहचान माना जाता है। 

सोमनाथ: भारत की सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक

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  सोमनाथ भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में इसका स्थान प्रथम है। वर्ष 1026 से बार-बार आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ विश्वास, दृढ़ता और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक बना हुआ है। इसका 1951 में राष्ट्रीय नेतृत्व के अधीन पुनर्निर्माण किया गया। मंदिर को फिर से खोले जाने के साथ ही भारतीय सभ्यता के पुनरोदय का आरंभ हुआ। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व इस मंदिर पर 1026 में हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष का समारोह है। इसके साथ ही इसे मई 1951 में खोले जाने के 75 वर्ष भी पूरे हो गए हैं।  सोमनाथ का पावन तट गुजरात के सौराष्ट्र में समुद्र तट के निकट प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। शिव पुराण में वर्णित सबसे पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक इस मंदिर में स्थापित है। इसे भगवान शिव, भगवान कृष्ण और शक्ति की आराधना के लिए श्रद्धेय माना जाता है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में सोमनाथ को 12 ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी माना गया है। यह भारत की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत में इसके अग्रणी स्थान को प्रतिबिंबित करता है। Red Also : पु...