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लोग कहते हैं दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन किस दिशा में ?

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  अक्सर लोगों को कहते सुना जाता है कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। पहले जैसा समय अब नहीं रहा। तकनीक बदल गई है, लोगों की सोच बदल रही है और जिंदगी जीने का तरीका भी पहले से अलग हो गया है। लेकिन कभी आपने रुककर सोचा है कि आखिर यह दुनिया बदल किस दिशा में रही है? क्या हम सच में बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, या सिर्फ हमारी जिंदगी की रफ्तार तेज हो गई है? तकनीक आगे बढ़ रही है, इंसान कितना आगे बढ़ा है? आज मोबाइल फोन के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से कुछ ही सेकंड में बात की जा सकती है। इंटरनेट ने जानकारी को हमारी उंगलियों तक पहुँचा दिया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए साधन कई कामों को आसान बना रहे हैं। जो काम पहले घंटों या दिनों में होते थे, उनमें से कई अब कुछ मिनटों में पूरे हो जाते हैं। यह बदलाव निश्चित रूप से हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बना रहा है। लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है। क्या तकनीक के आगे बढ़ने के साथ इंसान के भीतर भी उतना ही बदलाव आया है? हमारे पास दूसरों से जुड़े रहने के अधिक साधन हैं, फिर भी कई बार अपने ही लोगों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। जिंदगी...

आस्था, परंपरा और संस्कृति का महासंगम : माघ मेला, प्रयागराज

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  3 Jan. to 15 feb,2026 at allhabad, भारत की आध्यात्मिक परंपरा में माघ मेला एक ऐसा पर्व है, जो आस्था, तप और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम तट पर लगने वाला यह मेला हर वर्ष माघ महीने में श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। जैसे ही माघ का शुभ आरंभ होता है, पूरा संगम क्षेत्र भक्ति, साधना और उत्सव के रंग में रंग जाता है। माघ मेला केवल स्नान का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का अवसर भी माना जाता है। दूर-दराज़ से आए संत, महात्मा, कल्पवासी और श्रद्धालु संगम में पवित्र डुबकी लगाकर अपने जीवन को पुण्य से भरने की कामना करते हैं। मान्यता है कि माघ महीने में संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। मेले के दौरान संगम तट पर अस्थायी नगर बस जाता है, जहाँ टेंट, आश्रम और अखाड़े अपनी अलग ही दुनिया रचते हैं। सुबह-सुबह गंगा तट पर जलती दीपों की कतार, मंत्रोच्चार की ध्वनि और उगते सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्धालु मन को गहरी शांत...