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भारतीय लोग हमेशा बाहर पेशाब क्यों करते हैं? क्या यह संस्कृति है या बुरी आदत ?

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  भारत तेजी से आधुनिक बन रहा है। स्मार्ट सिटी, एक्सप्रेसवे, डिजिटल इंडिया और स्वच्छता अभियानों के बीच एक सवाल आज भी बार-बार उठता है— आखिर भारत में कई पुरुष सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पेशाब क्यों करते हैं? क्या यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है, या सिर्फ एक बुरी आदत जो समय के साथ सामान्य बन गई? इस प्रश्न का उत्तर "हाँ" या "नहीं" में नहीं दिया जा सकता। इसके पीछे इतिहास, सामाजिक सोच, बुनियादी सुविधाओं की कमी, कानून का कमजोर पालन और व्यक्तिगत व्यवहार—सभी की भूमिका है। क्या भारतीय संस्कृति खुले में पेशाब करने को बढ़ावा देती है? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारतीय संस्कृति में कहीं भी खुले में पेशाब करने को आदर्श या धार्मिक परंपरा नहीं माना गया है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में स्वच्छता, शौच और जल स्रोतों की पवित्रता पर विशेष जोर दिया गया है। कई धार्मिक नियमों में साफ लिखा गया है कि सार्वजनिक स्थानों, रास्तों और जलाशयों को गंदा नहीं करना चाहिए। Read Also पुराने सिनेमाघर : बदलता समय और खोती यादें इसलिए यह कहना कि "यह भारतीय संस्कृति है" तथ्यात्मक रूप से सही न...

लोक गायिका तीजनबाई का निधन

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                                मशहूर पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का निधन भारतीय लोक कला की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है। अपनी अनूठी शैली और दमदार प्रस्तुतियों के ज़रिए उन्होंने छत्तीसगढ़ की पंडवानी कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। दशकों तक उन्होंने अपनी कला के माध्यम से महाभारत की कथाओं को जीवंत किया। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।                                       

पुराने सिनेमाघर : बदलता समय और खोती यादें

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  भारतीय सिनेमा का इतिहास केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सिनेमाघरों की कहानी भी है जहाँ लोग पहली बार बड़े पर्दे पर सपनों को जीते हुए देखते थे। पुराने सिनेमाघर सिर्फ इमारतें नहीं थे, बल्कि ये संस्कृति, भावनाओं और सामूहिक अनुभवों के जीवंत केंद्र हुआ करते थे। आज के मल्टीप्लेक्स और डिजिटल स्क्रीन की चमक-दमक के बीच भी पुराने सिनेमाघरों की एक अलग ही दुनिया थी, जहाँ टिकट खिड़की पर लंबी कतारें, हाथ में पेपर टिकट और अंदर गूंजती भीड़ की आवाज़ें एक अलग ही माहौल बना देती थीं। Read Also :  गुलाबी नगरी जयपुर: राजा-महाराजाओं के इतिहास और भव्य महलों का सफर भारत के पुराने सिनेमाघरों की सुनहरी यादें मुंबई हमेशा से भारतीय फिल्म उद्योग का दिल रहा है और यहाँ के पुराने सिनेमाघरों ने सिनेमा संस्कृति को एक नई पहचान दी। Maratha Mandir आज भी अपनी लंबी चलने वाली फिल्मों के लिए जाना जाता है। यहाँ फिल्म देखना केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक परंपरा जैसा अनुभव था।  Regal Cinema अपनी आर्ट डेको शैली और भव्यता के कारण आज भी पुरानी फिल्मों की याद दिलाता है और एक ऐतिहासिक पहचान बनाए हुए है। राजस्थ...

लोनावला एक स्वर्ग है पर्यटक के लिए

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जय जगन्नाथ जय जगन्नाथ जय जगन्नाथ जय जगन्नाथ

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राधे-राधे वृंदावन

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अमरनाथ यात्रा 2026

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