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भीषण गर्मी में अमृत समान है पारंपरिक ठंडाई: स्वाद और सेहत का अनूठा संगम

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  तपती गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच जब शरीर थकान और प्यास से व्याकुल होने लगता है, तब एक गिलास ठंडी और मलाईदार ठंडाई किसी वरदान से कम नहीं लगती। भारतीय संस्कृति में ठंडाई केवल एक पेय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और स्वाद का एक अद्भुत संगम है जो सदियों से हमारी परंपराओं का हिस्सा रहा है।  इसमें मौजूद बादाम, सौंफ, खसखस, इलायची और गुलाब की पंखुड़ियाँ न केवल शरीर को अंदरूनी शीतलता प्रदान करती हैं, बल्कि मानसिक शांति और ताजगी भी देती हैं।  बाजार में मिलने वाले कृत्रिम शीतल पेय के मुकाबले ठंडाई एक प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है। गर्मी के दिनों में जब दोपहर का सूरज अपनी चरम सीमा पर होता है, तब दूध और मेवों के मिश्रण से बनी यह पारंपरिक औषधि लू और डिहाइड्रेशन से बचाने में ढाल का काम करती है।  इसमें डाली जाने वाली काली मिर्च और केसर इसके स्वाद को एक शाही एहसास देते हैं, जिससे हर घूँट में एक नई स्फूर्ति का अनुभव होता है। अपने ब्लॉग 'बोलती कलम' के माध्यम से हम यही संदेश देना चाहते हैं कि इस गर्मी अपनी जड़ों की ओर ...

हल्दी वाला दूध सिर्फ एक परंपरा नहीं संपूर्ण स्वास्थ्य का वरदान

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  हल्दी और दूध का मेल भारतीय आयुर्वेद की एक ऐसी अनमोल देन है, जिसे आज पूरी दुनिया 'गोल्डन मिल्क' के नाम से अपना रही है। यह केवल एक पारंपरिक पेय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का एक ऐसा खजाना है जो शरीर को भीतर से मज़बूत बनाता है। जब हम दूध में हल्दी मिलाकर पीते हैं, तो इसमें मौजूद करक्यूमिन नामक तत्व एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी एजेंट के रूप में काम करता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर हमें संक्रमणों से सुरक्षित रखता है।  यह जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में भी उतना ही असरदार है जितना कि पुरानी सर्दी-खांसी और गले की खराश को दूर करने में। इतना ही नहीं, हल्दी वाला दूध हमारे पाचन तंत्र को सुधारने और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिसका सीधा असर हमारी चमकती त्वचा और बेहतर मेटाबॉलिज्म पर दिखता है। मानसिक शांति और अच्छी नींद के लिए भी इसे रामबाण माना गया है, क्योंकि रात को सोने से पहले इसका सेवन मस्तिष्क को शांत कर गहरी नींद लाने में सहायक होता है।  रक्त को शुद्ध करने से लेकर हड्डियों को मजबूती देने तक, हल्दी वाला दूध हर उम्र ...

भारत का सबसे बड़ा मल्टीप्लेक्स मायाजाल चेन्नई

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  चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) पर स्थित  मायाजाल (Mayajaal)  सिर्फ एक सिनेमाघर नहीं, बल्कि मनोरंजन का एक पूरा शहर है । लगभग 30 एकड़ में फैला यह परिसर अपने समय में भारत का सबसे बड़ा मल्टीप्लेक्स होने का गौरव प्राप्त कर चुका है। आपके ब्लॉग 'बोलती कलम' के लिए मायाजाल पर यह विशेष लेख: चेन्नई की खूबसूरती और समुद्र किनारे की ठंडी हवाओं के बीच 'मायाजाल' मनोरंजन का एक ऐसा केंद्र है जहाँ फिल्मों के प्रति दीवानगी एक अलग स्तर पर नज़र आती है।  मायाजाल मल्टीप्लेक्स  में कुल  16 स्क्रीन्स  हैं, जो इसे देश के सबसे बड़े सिनेमा परिसरों में से एक बनाती हैं।  यहाँ एक साथ कई भाषाओं की फिल्में दिखाई जाती हैं, जिससे यह हर तरह के दर्शकों की पहली पसंद बना रहता है। मायाजाल की खासियत सिर्फ इसका विशाल आकार नहीं, बल्कि यहाँ मिलने वाला संपूर्ण मनोरंजन पैकेज है।  सिनेमा के अलावा यहाँ  गेमिंग ज़ोन, बॉलिंग एली, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और एक शानदार रिसॉर्ट  भी मौजूद है। सप्ताहांत (weekends) पर यहाँ लगभग 80 से अधिक शो चलते हैं, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है। शहर क...

आज रहेगी फ्री एंट्री विश्व धरोहर दिवस 2026,18 april ताज और आगरा किला देखने का सुनहरा मौका,

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  आगरा की ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से निहारने का सपना देखने वालों के लिए आज का दिन बेहद खास है। 18 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'विश्व धरोहर दिवस' मनाया जा रहा है, और इस विशेष अवसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने पर्यटकों को एक शानदार तोहफा दिया है। आज आगरा के विश्व प्रसिद्ध ताजमहल, ऐतिहासिक आगरा किला और  फतेहपुर सीकरी सहित देश के सभी संरक्षित स्मारकों में प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा । इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता को अपनी गौरवशाली विरासत और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। हालांकि, पर्यटकों को यह ध्यान रखना होगा कि ताजमहल के मुख्य गुंबद (Main Mausoleum) में जाने के लिए 200 रुपये का अतिरिक्त टिकट पहले की तरह ही अनिवार्य रहेगा, जो भीड़ प्रबंधन के नियमों के तहत लागू है। मुख्य परिसर में प्रवेश के लिए आज किसी भी टिकट की आवश्यकता नहीं होगी और टिकट विंडो बंद रहेंगी। हर साल 18 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय स्मारक और स्थल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। 2026 के लिए इस दिन की थीम 'आपदाओं और संघर्षों के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया' रखी गई है।...

अंडमान-निकोबार तो इन खूबसूरत जगहों को na भूलें

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  अंडमान और निकोबार आइलैंड दक्षिण-पूर्व में स्थित एक बहुत ही खूबसूरत जगह है, जहां नीला समुद्र, सुनहरी रेत और रिच बायो डायवर्सिटी टूरिस्टों को अट्रैक्ट करती है। यह द्वीप समूह अपने खूबसूरत समुद्री जीवन, ऐतिहासिक स्थलों और रोमांचक वॉटर स्पोर्ट्स के लिए फेमस है। यहां की संस्कृति और नेचर का अनोखा संगम इसे हर घुमक्कड़ की बकेट लिस्ट में शामिल करता है। अगर आप इस स्वर्ग का आनंद लेना चाहते हैं,तो यहां की ये खास जगहें जरूर देखें। आइए जानते हैं इनके बारे में- हैवलॉक आइलैंड हैवलॉक आइलैंड अंडमान का सबसे फेमस टूरिज्म स्थल है, जहां सफेद रेतीले तट और नीला समुद्र मन मोह लेते हैं। राधानगर बीच को एशिया का सबसे खूबसूरत समुद्र तट माना जाता है। यहां  स्कूबा डाइविंग  और स्नॉर्कलिंग का अनुभव अविस्मरणीय होता है। नील आइलैंड नील द्वीप, जिसे अब ‘शहीद द्वीप’ के नाम से भी जाना जाता है, अपने आप में सम्पूर्ण प्राकृतिक सुंदरता का खजाना समेटे हुए है। यहां लक्ष्मणपुर, भरतपुर और सीतापुर जैसे समुद्र तटों की शांति और नीला पानी सुकून देने वाला अनुभव प्रदान करता है। बाराटांग आइलैंड बाराटांग आइलैंड अपने अद्भुत ला...

राजा रवि वर्मा की पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ बनी सबसे महंगी भारतीय कला कृति

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  मुंबई में हाल ही में हुई एक ऐतिहासिक नीलामी ने भारतीय कला जगत में नया अध्याय जोड़ दिया। प्रसिद्ध भारतीय कलाकार राजा रवि वर्मा की कालजयी पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ ने वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड तोड़ कीमत हासिल की।इस ऑयल पेंटिंग को साइरस पूनावाला, चेयरमैन, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ₹150.36 करोड़ ($17.9 मिलियन) में खरीदा, जो किसी भी आधुनिक भारतीय कलाकृति के लिए अब तक की सबसे अधिक कीमत है।1890 के दशक में बनाई गई यह कलाकृति माँ और पुत्र के पवित्र रिश्ते को बेहद भावनात्मक और जीवंत तरीके से दर्शाती है। नीलामी के दौरान यह पेंटिंग अपने अनुमानित मूल्य ₹72 करोड़ से ₹108 करोड़ को काफी पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बना गई। साइरस पूनावाला ने पेंटिंग खरीदने के बाद इसे एक “राष्ट्रीय खजाना” बताया और यह इच्छा जताई कि इसे सिर्फ निजी संग्रह तक सीमित न रखकर समय-समय पर जनता के लिए प्रदर्शित किया जाना चाहिए।कला विशेषज्ञों ने इस निर्णय की सराहना की, क्योंकि यह भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और साझा करने में मदद करेगा। राजा रवि वर्मा: जीवन और कला राजा रवि वर्मा (29 अप्रैल 1848 – 2 अक्टूबर 1906) भारतीय ...

हर साल 1 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'अप्रैल फूल' (April Fool) या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है

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  हर साल  1 अप्रैल  को पूरी दुनिया में  'अप्रैल फूल' (April Fool)  या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है । इस दिन लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मज़ाक (pranks) करते हैं और एक-दूसरे को 'बेवकूफ' बनाकर आनंद लेते हैं। इसे मनाने के पीछे सबसे लोकप्रिय ऐतिहासिक कारण नीचे दिए गए हैं: कैलेंडर में बदलाव (फ्रांस):  16वीं सदी (1564/1582) में फ्रांस ने  जूलियन कैलेंडर  की जगह  ग्रेगोरियन कैलेंडर  अपनाया। इसके बाद नया साल 1 अप्रैल के बजाय  1 जनवरी  से शुरू होने लगा। उस समय सूचना के अभाव में कई लोग 1 अप्रैल को ही नया साल मनाते रहे। ऐसे लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए उन्हें "अप्रैल फूल" कहा जाने लगा। हिलारिया उत्सव (रोम):  प्राचीन रोम में मार्च के अंत में  'हिलारिया'  नाम का त्यौहार मनाया जाता था। इसमें लोग वेश बदलकर एक-दूसरे की नकल उतारते थे और हंसी-मज़ाक करते थे, जिसे अप्रैल फूल की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। अप्रैल फिश (April Fish):  फ्रांस में जिस व्यक्ति को मूर्ख बनाया जाता है, उसे 'पोइज़न द एप्रिल' (अप्रैल फि...

ऋषिकेश का अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव: आत्मा की यात्रा का अनुभव

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  मार्च की शुरुआत में ऋषिकेश में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव दुनिया  में  भर में प्रचलित है। योग अब एक वैश्विक घटना बन चुका है। महोत्सव हर साल मार्च में आयोजित होता है और यह दुनिया भर से योग प्रेमियों को आकर्षित करता है। भारत के हर कोने से लोग इसमें शामिल होते हैं, और लगभग हर हिस्से से विदेशी प्रतिभागी भी यहाँ दिखते हैं। मुख्य उत्सव परमार्थ निकेतन आश्रम में पवित्र गंगा के तट पर आयोजित होता है, लेकिन शहर के हर होटल और आश्रम में भी विशेषज्ञों और मेहमानों के नेतृत्व में योग और ध्यान सत्र होते हैं। पूरे शहर का वातावरण ध्यान और योग की ऊर्जा से भरा होता है। मैं जिस होटल में रहा, वहाँ दैनिक कार्यक्रम में योग सत्र, ध्यान कक्षाएं, चिकित्सा सत्र और सत्संग शामिल थे। हमने सुबह गंगा के निजी घाट पर दिन की शुरुआत की। सूरज के उगते ही गंगा की लालिमा और बहता जल अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। सुबह की प्रार्थना और ध्यान से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है। भोजन भी योग का हिस्सा है। नाश्ते में ताज़े फल, रस और ज्यादातर शाकाहारी व्यंजन होते हैं। पहली बार मुझे ऐसा लगा...

स्विट्जरलैंड में दुनिया के दो सबसे रहने योग्य शहर क्यों हैं

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  जब दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों की रैंकिंग की बात आती है, तो स्कैंडिनेविया आमतौर पर शीर्ष पर रहता है। हम डेनमार्क, फिनलैंड और नॉर्वे को  दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची  में सबसे आगे देखते आए हैं - लेकिन एक और यूरोपीय देश चुपचाप दुनिया में रहने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक होने का दावा पेश कर रहा है। इस वर्ष के ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स  और  स्मार्ट सिटी इंडेक्स  में कई शहरों के शीर्ष 10 में शामिल होने से  स्विट्जरलैंड यह दर्शाता है कि उसकी नीतियां राष्ट्रव्यापी प्रभाव डालती हैं।  ज्यूरिख और जिनेवा ने स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करते हुए शीर्ष 10 सबसे रहने योग्य शहरों में जगह बनाई; वहीं ज्यूरिख को बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी में शीर्ष स्थान के लिए नंबर एक स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला, जिनेवा चौथे स्थान पर और लॉज़ेन सातवें स्थान पर रहा। पांच अन्य देशों से घिरे एक छोटे देश के रूप में, स्विट्जरलैंड अपने अस्तित्व के दौरान विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं से प्रभावित रहा है, जिसके परिणामस्वरूप शासन की सकारात्मक शैली विकसित...

मनाली बादलों के बीच बसा एडवेंचर का स्वर्ग

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  कुल्लू घाटी के अंत में स्थित, मनाली न केवल हिमाचल प्रदेश के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि भी है। मनाली समानार्थी धाराएं और पक्षियों, जंगलों और बागानों और बर्फ से ढके पहाड़ों की भतीजी हैं।  मनाली एक प्राचीन व्यापार मार्ग का असली प्रारंभिक बिंदु है जो रोहतंग और बारालाचा पास पार करता है, और लाहुल और लद्दाख के माध्यम से कश्मीर में चलता है जबकि अलग सड़क इसे स्पीति से जोड़ती है।  अब जम्मू-कश्मीर में लेह, चंबा में पंगी घाटी और लाहुल और स्पीति के काजा तक मोटर लिंक प्रदान किए गए हैं। गर्मी के मौसम के दौरान मनाली से इन स्थानों पर नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। यह कुल्लू से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मनाली के बारे में एक दिलचस्प किंवदंती है जो कहती है कि ‘मनु संहिता’ के लेखक मनु, इस देश में एक जगह पर खगोलीय नाव से पहली बार पृथ्वी पर चले गए। वह विशेष स्थान जहां उन्होंने अपना निवास स्थापित किया था, वर्तमान मनाली थी जिसे मनु के निवास स्थान ‘मनु-अलाया’ के बदले नाम के रूप में जाना जाता है। मनु के लिए समर्पित मंदिर अभी भी मनाली गांव में मौजूद...

मथुरा: श्री कृष्ण की जन्मभूमि और भक्ति का हृदय स्थल

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 यमुना के किनारे बसी प्राचीन और पवित्र नगरी मथुरा, भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली के रूप में भारत की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक तीर्थस्थली है, जो अपनी आध्यात्मिक शांति, भक्तिपूर्ण वातावरण और अनगिनत मंदिरों के लिए दुनियाभर में जानी जाती है । उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में स्थित यह शहर न केवल कृष्ण-भक्ति का केंद्र है, बल्कि यहाँ की गलियों में, यमुना के घाटों पर और कण-कण में कृष्ण की बाल-लीलाओं का आभास होता है।  मथुरा का सबसे मुख्य आकर्षण कृष्ण जन्मभूमि मंदिर है, जहाँ का दर्शन पाकर भक्त खुद को धन्य महसूस करते हैं। इसके अलावा, शाम के समय विश्राम घाट पर होने वाली यमुना आरती का दृश्य बहुत ही मनमोहक और अलौकिक होता है, जहाँ हजारों दीये पानी में तैरते हुए एक अद्भुत नजारा पेश करते हैं।  ऐतिहासिक रूप से, यह शहर प्राचीन काल से ही शिक्षा और संस्कृति का केंद्र रहा है, जिसे श्री कृष्ण की 'ब्रज भूमि' के नाम से भी जाना जाता है। मथुरा के समीप ही वृन्दावन, गोवर्धन और गोकुल जैसे पवित्र स्थान हैं, जो मथुरा यात्रा को और भी विशेष बनाते हैं।  यहाँ का स्वादिष्ट पेड़ा, ब्रज की संस्क...

बाड़मेर भारत का पांचवां सबसे बड़ा जिला

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  28,387 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला बाड़मेर राजस्थान के बड़े जिलों में शामिल है। राज्य के पश्चिमी हिस्से में स्थित होने के कारण यह थार रेगिस्तान का हिस्सा भी समेटे हुए है। उत्तर में जैसलमेर, दक्षिण में जालोर, पूर्व में पाली और जोधपुर इसके पड़ोसी जिले हैं, जबकि पश्चिम में पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है। रेगिस्तानी क्षेत्र होने के कारण यहाँ का तापमान काफी चरम परिस्थितियों में बदलता है। Read Also : राजस्थान का सदाबहार हिल स्टेशन माउंट आबू  गर्मियों में तापमान 51°C तक पहुँच सकता है और सर्दियों में 0°C तक गिर जाता है। बाड़मेर जिले की सबसे लंबी नदी लूणी है, जो लगभग 500 किमी की दूरी तय करने के बाद जालोर से होकर गुजरती है और कच्छ के रण में विलीन हो जाती है। 12वीं शताब्दी में इस क्षेत्र को “मल्लानी” के नाम से जाना जाता था। वर्तमान नाम बाड़मेर इसके संस्थापक बहादुर राव (जुना बाड़मेर) के नाम पर रखा गया। उन्होंने एक छोटा नगर बसाया जिसे आज “जुना” कहा जाता है, जो वर्तमान बाड़मेर शहर से लगभग 25 किमी दूर है। परमार वंश के बाद, रावत लुका (रावल मल्लीनाथ के पौत्र) ने अपने भाई रावल मंडलाक ...

switzerland 57 किलोमीटर लंबी इस दोहरी सुरंग का नाम गोटहार्ड है

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  57 किलोमीटर लंबी इस दोहरी सुरंग का नाम गोटहार्ड है जो आल्प्स पर्वतों के नीचे से उत्तरी और दक्षिणी यूरोप को तेज़ गति वाली रेल सेवा से जोड़ेगी. स्विट्ज़रलैंड का कहना है कि ये सुरंग यूरोप में मालवाहक परिवहन में क्रांतिकारी क़दम होगा. ये रेल लिंक नीदरलैंड्स के रोटरडैम और इटली के गेनोआ को जोड़ेगा. अभी तक इस मार्ग पर सामान की ढुलाई लाखों ट्रकों से होती रही है, लेकिन अब वो सामान इस सुरंग के ज़रिए रेल से जा सकेगा. अभी तक दुनिया में सबसे लंबी सुरंग जापान की 53.9 किमी 'सेइकन रेल' सुरंग थी. लेकिन अब ये उपलब्धि गोटहार्ड के नाम हो गई है. फ्रांस और ब्रिटेन को जोड़ने वाली 50.5 किलोमीटर लंबी चैनल सुरंग अब तीसरे स्थान पर आ गई है. गोटहार्ड रेल सुरंग के भव्य उद्घाटन समारोह में स्विस अधिकारियों के साथ साथ जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल, फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद और इटली के प्रधानमंत्री मैतो रेंज़ी भी मौजूद रहेंगे. स्विट्ज़रलैंड के फेडरल ट्रांसपोर्ट ऑफिस के निदेशक पीटर फ्यूगलिस्टर ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया, "यह स्विस पहचान का हिस्सा है गोटहार्ड दुनिया की सबसे गहरी सुरंग है. य...

कुर्ता, पायजामा, सलवार, कुर्ती भारत का पारंपरिक पोशाक

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  भारतीय सनातन संस्कृति का विशेष वस्त्र है कुर्ता एवं पजामा (पायजामा)। यह प्रत्येक प्रांत में अलग-अलग शैली में पहना जाता है। कुर्ते को अफगानिस्तान में पैरहन, कश्मीर में फिरान और नेपाल में दौरा के नाम से जाना जाता है। राजस्थानी, भोपाली, लखनवी, मुल्तानी, पठानी, पंजाबी, बंगाली, हर कुर्ते की डिजाइन अलग होती है। जिस तरह पुरुष कुर्ता और पायजामा पहनते हैं उसी तरह महिलाएं कुर्ती और पायजामे (सलवार) के साथ चुनरी, ओढ़नी या दुपट्टा भी पहनती हैं। यह महिलाओं के लिए अलग शैली में निर्मित होता है। पंजाबी शैली, उत्तर भारतीय शैली (स्टाइल) आदि में निर्मित सलवार-कुर्ती महिलाओं के लिए सबसे उत्तम वस्त्र माना गया है।   जम्मू और कश्मीर में ठंड अधिक होने के कारण वहां की महिलाएं व पुरुष 'पैरहन' पहनते हैं। यह पोशाक पहाड़ी इलाकों में काफी प्रसिद्ध है। कश्मीर की महिलाएं सिर को दुपट्टे से ढंककर पीछे से बांध लेती हैं। हालांकि वर्तमान में कट्टरपंथ के चलते वहां कश्मीरियत को छोड़कर अरबी संस्कृति के पहनावे पर जोर दिया जा रहा है। 'सलवार' नामक चौड़े पायजामे से पैर ढंका रहता था जबकि ऊपरी हिस्से में पूरे बांह...

90 के दशक का फैशन फिर ट्रेंड में, 2026 की गर्मियों में दिखा जबरदस्त असर

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  क्या आपको भी लगता है कि इन दिनों हर जगह 90 के दशक की झलक दिखाई दे रही है? चाहे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म हों या सोशल मीडिया, हर तरफ वही पुराना लेकिन दमदार स्टाइल छाया हुआ है। दोस्तों के ग्रुप चैट से लेकर वीकेंड पार्टियों तक, हर जगह 90s थीम का ही जलवा देखने को मिल रहा है। इस गर्मी 2026 में फैशन का ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है। लोग मॉडर्न, सादे और फिट कपड़ों को छोड़कर अब ढीले-ढाले, रंग-बिरंगे और ग्रंज स्टाइल को अपना रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे सड़कों पर पुराना म्यूजिक चैनल वाला दौर वापस आ गया हो। Read Also : मूगा रेशम परंपरा दो हज़ार वर्षों से भी अधिक पुरानी हालांकि अक्सर 2026 की तुलना 2016 से की जाती है, लेकिन फैशन इंडस्ट्री ने इस बार अलग रास्ता चुना है। इस बार ट्रेंड सीधे 1990 के दशक से प्रेरित है। मिनिमल और सिंपल कपड़ों की जगह अब बोल्ड कलर्स और आरामदायक आउटफिट्स ने ले ली है। मार्केट डेटा भी इस बदलाव की पुष्टि कर रहा है। फैशन प्लेटफॉर्म्स पर “बायस-कट” और “पैराशूट फैब्रिक” जैसे शब्दों की खोज तेजी से बढ़ी है। इसका मतलब साफ है—लोग अब टाइट और असहज कपड़ों से दूर जा रहे हैं और हल्के, सांस ले...

happy navrati to all bolti kalam key followers key liey

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सिंधुदुर्ग,महाराष्ट्र का अनदेखा लेकिन बेहद खूबसूरत समुद्री ठिकाना

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  महाराष्ट्र का सिंधुदुर्ग जिला उन खास जगहों में से है, जहां प्रकृति अब भी अपने असली रूप में दिखती है। यहां के साफ समुद्र तट, नीला और शांत पानी, और लाजवाब मालवणी सीफूड इसे एक परफेक्ट रिलैक्सिंग डेस्टिनेशन बनाते हैं। अगर आप गोवा जैसी जगह से थोड़ा अलग, सुकून भरी छुट्टी चाहते हैं, तो सिंधुदुर्ग एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। आमतौर पर मुंबई से बीच ट्रिप की बात आते ही लोगों के दिमाग में गोवा का नाम आता है। वहां की नाइटलाइफ, Read Also : चिड़िया टापू,अंडमान का अद्भुत प्राकृतिक स्वर्ग  बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाएं उसे खास बनाती हैं। लेकिन सच यह है कि हर कोई अब भीड़ और शोर से दूर कुछ शांत पल बिताना चाहता है। मुंबई से लगभग 500 किलोमीटर दक्षिण में, गोवा की सीमा के पास बसा सिंधुदुर्ग ऐसा ही एक इलाका है, जहां आज भी प्रकृति की सादगी और खूबसूरती बरकरार है। सिंधुदुर्ग कोंकण क्षेत्र का हिस्सा है और लगभग 120 किलोमीटर लंबी अरब सागर की तटरेखा पर फैला हुआ है। इसके नाम में ही इसका इतिहास छुपा है—‘सिंधु’ यानी समुद्र और ‘दुर्ग’ यानी किला। यहां मालवन के पास समुद्र के बीच एक छोटे द्वीप पर बना ऐ...

क्या आप जानते हैं कि बेबी ताज कहाँ है

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  क्या आप जानते हैं कि बेबी ताज कहाँ है? अगर नहीं, तो आप एक शानदार ऐतिहासिक यात्रा के लिए तैयार हो जाइए। यह आगरा, उत्तर प्रदेश में स्थित खूबसूरत मकबरा अक्सर अपने विशाल और प्रसिद्ध पड़ोसी, ताज महल, के साये में छुपा रहता है, लेकिन इसका आकर्षण कम नहीं है और यह उन यात्रियों के लिए एक अलग अनुभव देता है जो कुछ अलग देखना चाहते हैं। बेबी ताज, जिसे इतिमाद-उद-दौला का मकबरा भी कहते हैं, एक शक्तिशाली मंत्री के लिए बनवाया गया था, जिन्होंने मुगल शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 17वीं सदी में निर्मित यह मकबरा अपने नक्काशीदार संगमरमर, जटिल डिजाइन और पारसी शैली के वास्तुशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। Read Also : चिड़िया टापू,अंडमान का अद्भुत प्राकृतिक स्वर्ग बेबी ताज का इतिहास प्रेम और श्रद्धा से भरा हुआ है। इसे नूरजहाँ ने बनवाया था, जो सम्राट जहाँगीर की पत्नी थीं, अपने पिता मिर्ज़ा ग़ियास बेग की याद में। मकबरे का निर्माण 1628 में पूरा हुआ और यह मुगल काल की भव्यता और कला का शानदार उदाहरण है। बेबी ताज आगरा के यमुना नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित है और ताज महल से केवल कुछ ही दूरी पर है, लेकिन आमतौर पर ...

खर मास 15 मार्च से 15 अप्रैल, क्या करें, क्या न करें

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  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब भी सूर्य देव देवगुरु बृहस्पति की राशि में गोचर करते हैं, तो उस अवधि को खरमास या मलमास कहा जाता है। यह अवधि  (Kharmas 2026)  पूरे एक महीने तक, यानी 14 अप्रैल 2026 तक चलेगी, जब तक सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश नहीं कर जाते। धार्मिक दृष्टि से इस एक महीने को मांगलिक कामों के लिए अशुभ माना जाता है।  Read Also : उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आज से शुरू आइए जानते हैं कि इस दौरान सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं? खरमास के दौरान विवाह, सगाई या रोका जैसे शुभ कार्य पूरी तरह से वर्जित होते हैं। इस एक महीने में नए घर में प्रवेश, नई प्रॉपर्टी की खरीदारी या बच्चों का मुंडन संस्कार भूलकर भी न करें। कोई भी नया बिजनेस, नई नौकरी की शुरुआत या बड़ा निवेश खरमास के दौरान टाल देना चाहिए, क्योंकि इससे मनचाही सफलता नहीं मिल पाती। इस पूरे महीने सात्विकता का पालन करें। इस दौरा मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज के सेवन से बचना चाहिए। खरमास में  भगवान सूर्य   की पूजा का सबसे अधिक महत्व है। ऐसे में ...

संतरा, अंगूर या नींबू,किस चीज से मिलता है ज्यादा विटामिन सी

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  विटामिन सी का नियमित सेवन हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाने और शरीर को कई प्रकार की बीमारियों से बचाने में मदद करता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि संतरा, नींबू और अंगूर में किस चीज में सबसे ज्यादा विटामिन सी होता है? Orange vs Grapefruit vs Lemon: विटामिन सी, जिसे एस्कॉर्बिक एसिड भी कहा Read Also : गुजिया और ठंडाई के साथ मनाएं होली  जाता है, हमारे शरीर के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है. यह केवल हमारी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में ही नहीं, बल्कि त्वचा, हड्डियों और ब्लड वेसल्स को हेल्दी रखने में भी मदद करता है. संतरा, अंगूर और नींबू तीनों ही फलों को विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत माना जाता है, लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा विटामिन सी किससे मिलता है? आइए इस सवाल का जवाब जानें और विटामिन सी की कमी से होने वाली समस्याओं को समझें. विटामिन सी की कमी से होने वाली समस्याएं अगर शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी नहीं मिलता, तो इससे कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं: इम्यूनिटी में कमी:  शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. स्कर्वी (Scurvy):  मसूड़ों से खून आना, दांत कमजो...

भूटान के लोग हर दिन लाल मिर्च सब्जी की तरह खाते हैं

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  भूटान में मिर्च का उपयोग भूटान, जो भारत और चीन के बीच स्थित एक छोटा-सा हिमालयी देश है, अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध संस्कृति के साथ-साथ अपनी खास खानपान परंपरा के लिए भी जाना जाता है। भूटानी व्यंजनों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है मिर्च, जिसे स्थानीय भाषा में “एमा” कहा जाता है। यहां मिर्च सिर्फ एक मसाला नहीं, बल्कि खाने की पहचान मानी जाती है। Reas Also : चोखी ढाणी जयपुर की एक पहचान भूटान में मिर्च का उपयोग बेहद अधिक मात्रा में किया जाता है। एक औसत परिवार हर हफ्ते एक किलो से भी ज्यादा मिर्च का सेवन करता है, जो इसे दुनिया में प्रति व्यक्ति मिर्च खाने के मामले में सबसे आगे रखता है। यही कारण है कि वहां के लगभग हर व्यंजन—चाहे वह सूप हो, साइड डिश हो या चटनी—में मिर्च का इस्तेमाल जरूर होता है। इस लेख में हम भूटानी मिर्च के इतिहास, उसके महत्व और वहां की खाद्य संस्कृति पर उसके प्रभाव के बारे में जानेंगे। भूटान में मिर्च का इतिहास आज भूटान के खाने का अभिन्न हिस्सा बन चुकी मिर्च वास्तव में इस क्षेत्र की मूल फसल नहीं थी। माना जाता है कि 16वीं शताब्दी के आसपास मिर्च भारत के जरिए भू...

दुनिया में बढ़ रहा शाकाहार, भारत में बढ़ती मांसाहारी प्रवृत्ति

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  आज की तेजी से बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच दुनिया भर में शाकाहार अपनाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लोग अब अपनी सेहत, पर्यावरण और जानवरों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए भोजन में मांसाहार की बजाय शाकाहारी विकल्पों को प्राथमिकता देने लगे हैं। वैश्विक परिदृश्य: शाकाहार की ओर रुझान पश्चिमी देशों में शाकाहार की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। एक तो स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता – कई लोग हृदय रोग, मोटापे और डायबिटीज जैसी बीमारियों से बचाव के लिए मांस कम कर रहे हैं। दूसरा बड़ा कारण पर्यावरणीय चिंताएँ हैं। पशुपालन से निकलने वाला मीथेन गैस और कार्बन उत्सर्जन बढ़ते पर्यावरणीय संकट का हिस्सा हैं, जिससे लोग पौधों पर आधारित भोजन को चुन रहे हैं। Also Read : उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण भारत में स्थिति: मांसाहार फिर भी लोकप्रिय वहीं भारत में स्थिति थोड़ी अलग दिखाई देती है। भारत का भोजन परंपरागत रूप से विविध रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में मांसाहारी व्यंजन तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में युवा वर्ग रेस्...

तालो में नैनीताल : उत्तराखंड का स्वर्ग

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  नैनीताल झीलों का शहर है। नैनी यहाँ की प्रमुख झील है, जिसके नाम पर इसका नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी. बेरून नमक चीनी व्यापारी को जाता है। अपने दोस्त के साथ वह यहां जब शिकार कर रहे थे, तो अचानक ही नैनी झील के किनारे पहुंच गये। यहां की खूबसूरती देखने के बाद उन्होंने अपना कारोबार छोड़ दिया और इस झील के किनारे यूरोपीय कालोनी बसाई।  Also Read : वाराणसी,संगीत की आत्मा से जुड़ा शहर वर्ष 1841 में इंग्लिशमैन कलकत्ता नामक पत्रिका ने जब इस कालोनी और झील के बारे में बताया, तो नैनीताल सुर्ख़ियों में आ गया। पत्रिका ने अल्मोड़ा के आसपास नैनीताल नामक, एक खूबसूरत झील की खोज की बात कही थी। नतीजतन 1847 तक आते-आते नैनीताल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गया। यह कुमाऊं मंडल का मुख्यालय भी है।  यहां का सबसे बड़ा शहर हल्द्वानी है। मुख्य आकर्षणों में नैनादेवी मंदिर, हनुमान गढ़ी, मालरोड, एरियल रोपवे और नैना पीक जैसे स्थल गिने जाते हैं। नैनीताल को हिमालय का खूबसूरत गहना भी कहा जाता है।