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फेसबुक और व्हाट्सएप लोगों के लिए लत क्यों बन गए हैं ?

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  आज की डिजिटल दुनिया में, फेसबुक और व्हाट्सएप हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन गए हैं। असल में, कई लोग अपने दिन की शुरुआत मोबाइल फोन पर नए मैसेज या फेसबुक पर अपडेट और वीडियो देखकर करते हैं। शुरुआत में फेसबुक और व्हाट्सएप को लोगों को जोड़ने के लिए बनाया गया था, लेकिन आजकल कई लोगों के लिए ये सोशल नेटवर्किंग साइट्स एक आदत या लत बन गई हैं। अब, लोग बिना किसी वजह के लगातार अपना मोबाइल फोन चेक करते रहते हैं। ऐसा क्यों होता है? फेसबुक और व्हाट्सएप का लोगों पर इतना असर क्यों है? आइए इसका जवाब जानते हैं। Read Also :  AI का असर: क्या हम अब चीजें याद करना भूलते जा रहे हैं ?

युवाओं में बढ़ता हुआ ट्रैवल ब्लॉगर का जुनून

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लोगो मैं बढ़ता हुआ स्टैंडअप कॉमेडी का जुनून

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भारतीय टूरिस्ट विदेशों में भी बिना इंडियन खाने के नहीं रह सकते , आखिर क्यों ?

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  ऐसा सिर्फ़ भारतीय यात्रियों के साथ ही नहीं होता, भारत आने वाले हर विदेशी का अनुभव भी कुछ ऐसा ही होता है। भारत आने वाले विदेशी यात्रियों में शायद ही कोई ऐसा हो जिसे भारतीय खाने का अनुभव पसंद न आए। हर कोई भारतीय मसालों की खुशबू, रंगों और स्वादों की विविधता और सबसे ज़रूरी बात, अलग-अलग राज्यों के असली स्वाद को चखने के लिए उत्सुक रहता है। यहाँ एक बहुत दिलचस्प विरोधाभास देखने को मिलता है! जहाँ विदेश से लौटने वाले भारतीय अपने घर के खाने के स्वाद के लिए तरसते हैं, वहीं भारत आने वाले विदेशी भारतीय खाने के असली स्वाद का अनुभव करना चाहते हैं। लेकिन एक बात दोनों में समान है; दोनों ही मामलों में, खाना सिर्फ़ भूख मिटाने का ज़रिया नहीं है, बल्कि यह संस्कृति का अनुभव है। भारत आने वाले विदेशी यात्री के लिए सड़क किनारे की टपरी पर चाय पीना, तंदूरी व्यंजन खाना या स्थानीय स्वाद चखना एक ऐसा अनुभव होता है जिसे वे लंबे समय तक याद रखते हैं। 

एस. जानकी ने लगभग 20 भाषाओं में करीब 40,000 गाने रिकॉर्ड करके इतिहास रचा

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  एस. जानकी ,भारतीय फ़िल्मी संगीत के इतिहास में कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो आने वाली पीढ़ियों से भी ज़्यादा अमर होती हैं। मशहूर प्लेबैक सिंगर एस. जानकी ऐसी ही एक गायिका हैं, जिनकी सुरीली आवाज़, भावुकता, अलग-अलग तरह के गाने गाने की काबिलियत और विविधता ने करोड़ों संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 88 वर्ष की उम्र में यह आवाज़ दुनिया छोड़ गई।  Read Also  अलविदा 'सुरों की मल्लिका' दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की आयु में निधन वह न सिर्फ़ दक्षिण भारतीय फ़िल्मों की सबसे सम्मानित गायिकाओं में से एक हैं, बल्कि उनकी पहचान इससे कहीं ज़्यादा है। अपने लंबे करियर के दौरान, एस. जानकी ने लगभग 40,000 गाने गाए और करीब 20 भारतीय भाषाओं में अपनी आवाज़ दी। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ के अलावा उन्होंने हिंदी, ओड़िया, बंगाली, मराठी, गुजराती, तुलु, कोंकणी, संस्कृत और कई अन्य भाषाओं में भी गाने गाए। एस. जानकी सबसे बहुमुखी गायिकाओं में से एक रही हैं, जो हर तरह के गाने में बहुत भावना के साथ गा सकती हैं। उन्होंने जोश भरे, दर्द भरे, भक्तिपूर्ण, ज़मीन से जुड़े और कई तरह के लोक, शास्त्र...

भारतीय लोग हमेशा बाहर पेशाब क्यों करते हैं? क्या यह संस्कृति है या बुरी आदत ?

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  भारत तेजी से आधुनिक बन रहा है। स्मार्ट सिटी, एक्सप्रेसवे, डिजिटल इंडिया और स्वच्छता अभियानों के बीच एक सवाल आज भी बार-बार उठता है— आखिर भारत में कई पुरुष सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पेशाब क्यों करते हैं? क्या यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है, या सिर्फ एक बुरी आदत जो समय के साथ सामान्य बन गई? इस प्रश्न का उत्तर "हाँ" या "नहीं" में नहीं दिया जा सकता। इसके पीछे इतिहास, सामाजिक सोच, बुनियादी सुविधाओं की कमी, कानून का कमजोर पालन और व्यक्तिगत व्यवहार—सभी की भूमिका है। क्या भारतीय संस्कृति खुले में पेशाब करने को बढ़ावा देती है? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारतीय संस्कृति में कहीं भी खुले में पेशाब करने को आदर्श या धार्मिक परंपरा नहीं माना गया है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में स्वच्छता, शौच और जल स्रोतों की पवित्रता पर विशेष जोर दिया गया है। कई धार्मिक नियमों में साफ लिखा गया है कि सार्वजनिक स्थानों, रास्तों और जलाशयों को गंदा नहीं करना चाहिए। Read Also पुराने सिनेमाघर : बदलता समय और खोती यादें इसलिए यह कहना कि "यह भारतीय संस्कृति है" तथ्यात्मक रूप से सही न...

लोक गायिका तीजनबाई का निधन

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                                मशहूर पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का निधन भारतीय लोक कला की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है। अपनी अनूठी शैली और दमदार प्रस्तुतियों के ज़रिए उन्होंने छत्तीसगढ़ की पंडवानी कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। दशकों तक उन्होंने अपनी कला के माध्यम से महाभारत की कथाओं को जीवंत किया। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।                                       

पुराने सिनेमाघर : बदलता समय और खोती यादें

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  भारतीय सिनेमा का इतिहास केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सिनेमाघरों की कहानी भी है जहाँ लोग पहली बार बड़े पर्दे पर सपनों को जीते हुए देखते थे। पुराने सिनेमाघर सिर्फ इमारतें नहीं थे, बल्कि ये संस्कृति, भावनाओं और सामूहिक अनुभवों के जीवंत केंद्र हुआ करते थे। आज के मल्टीप्लेक्स और डिजिटल स्क्रीन की चमक-दमक के बीच भी पुराने सिनेमाघरों की एक अलग ही दुनिया थी, जहाँ टिकट खिड़की पर लंबी कतारें, हाथ में पेपर टिकट और अंदर गूंजती भीड़ की आवाज़ें एक अलग ही माहौल बना देती थीं। Read Also :  गुलाबी नगरी जयपुर: राजा-महाराजाओं के इतिहास और भव्य महलों का सफर भारत के पुराने सिनेमाघरों की सुनहरी यादें मुंबई हमेशा से भारतीय फिल्म उद्योग का दिल रहा है और यहाँ के पुराने सिनेमाघरों ने सिनेमा संस्कृति को एक नई पहचान दी। Maratha Mandir आज भी अपनी लंबी चलने वाली फिल्मों के लिए जाना जाता है। यहाँ फिल्म देखना केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक परंपरा जैसा अनुभव था।  Regal Cinema अपनी आर्ट डेको शैली और भव्यता के कारण आज भी पुरानी फिल्मों की याद दिलाता है और एक ऐतिहासिक पहचान बनाए हुए है। राजस्थ...

लोनावला एक स्वर्ग है पर्यटक के लिए

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जय जगन्नाथ जय जगन्नाथ जय जगन्नाथ जय जगन्नाथ

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राधे-राधे वृंदावन

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अमरनाथ यात्रा 2026

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हास्य की कहानी

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भारत का स्वर्ग Kashmir

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जामुन खाने के फायदे

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नैनीताल की सैर पर vedio

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AI का असर: क्या हम अब चीजें याद करना भूलते जा रहे हैं ?

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आज के समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI और डिजिटल तकनीक ने मानव जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। इंटरनेट, स्मार्टफोन और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना दिया है। लेकिन इस बदलाव का एक गहरा प्रभाव हमारी स्मृति और सोचने की क्षमता पर भी पड़ रहा है। पहले जहां लोग छोटी से छोटी जानकारी जैसे फोन नंबर, पते और महत्वपूर्ण तिथियां याद रखते थे, वहीं अब अधिकतर चीजों के लिए हम डिजिटल उपकरणों पर निर्भर हो गए हैं। मानव स्मृति एक जटिल मानसिक प्रक्रिया है जिसमें जानकारी को समझना, संग्रहित करना और आवश्यकता पड़ने पर उसे पुनः प्राप्त करना शामिल होता है। लेकिन डिजिटल जीवन ने इस प्रक्रिया को काफी हद तक बदल दिया है। अब हम अपने दिमाग में जानकारी रखने की Read Also :  फेसबुक और व्हाट्सएप लोगों के लिए लत क्यों बन गए हैं ?  बजाय उसे मोबाइल, लैपटॉप और क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित रखते हैं। इस बदलाव ने एक नई आदत को जन्म दिया है जिसमें हम याद रखने के बजाय जानकारी को तुरंत खोजने पर निर्भर हो गए हैं। Read Also this Article :  एआई के दुष्प्रभावों से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय...

गुलाबी नगरी जयपुर: राजा-महाराजाओं के इतिहास और भव्य महलों का सफर

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                  भारत के राजस्थान राज्य की शान और उसकी राजधानी जयपुर को पूरी दुनिया में "पिंक सिटी" यानी गुलाबी नगरी के नाम से जाना जाता है। अपनी अनोखी वास्तुकला, गगनचुंबी किलों, भव्य महलों और जीवंत सांस्कृतिक रंगों से सराबोर यह शहर हर साल देश-विदेश के लाखों सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। दिल्ली और आगरा के साथ मिलकर यह शहर भारत का प्रसिद्ध 'गोल्डन ट्रायंगल' (सैलानी त्रिकोण) बनाता है, जो विदेशी पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। जयपुर सिर्फ एक आधुनिक शहर नहीं है, बल्कि यह अपने अंदर सदियों पुराना गौरवशाली इतिहास और राजा-महाराजाओं की शाही जीवनशैली को समेटे हुए है। इस ऐतिहासिक शहर की स्थापना १८ नवंबर १७२७ को आमेर के दूरदर्शी महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने की थी। जयपुर की सबसे खास बात यह है कि यह भारत का पहला योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया शहर था, जिसे प्रसिद्ध वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य ने वैदिक सिद्धांतों और वास्तुशास्त्र के आधार पर डिज़ाइन किया था। साल १८७६ में जब वेल्स के राजकुमार प्रिंस अल्बर्ट भारत आए, तो उनके स्वागत और सम्मान में मह...

नीलगिरि की रानी: ऊटी की एक हसीन यात्रा

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  दक्षिण भारत के तमिलनाडु में बसा ऊटी (उदगमंडलम) एक ऐसा खूबसूरत हिल स्टेशन है जो अपनी मखमली हरी वादियों, चाय के बागानों और सदाबहार मौसम के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से 2,240 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान हर उस मुसाफिर को अपनी ओर खींचता है जो प्रकृति की गोद में कुछ पल सुकून के बिताना चाहता है। नीलगिरि पहाड़ियों के बीच बसे इस शहर में कदम रखते ही ठंडी हवा के झोंके और चाय की पत्तियों की भीनी-भीनी खुशबू आपका स्वागत करती है।  यहां की टॉय ट्रेन यात्रा आपको बीते ज़माने के रोमांस और पहाड़ों के जादुई दृश्यों से रूबरू कराती है, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है। ऊटी का दिल कही जाने वाली कृत्रिम झील में बोटिंग का आनंद लेना हो या डोड्डाबेट्टी चोटी से घाटी का विहंगम नज़ारा देखना, यहां का हर एक कोना एक खूबसूरत पेंटिंग जैसा महसूस होता है। सरकारी बॉटनिकल गार्डन में मौजूद हज़ारों प्रजातियों के पेड़-पौधे और सुप्रसिद्ध रोज़ गार्डन में खिले अनगिनत गुलाब इस जगह की रंगीनियत में चार चांद लगा देते हैं। इसके साथ ही, दूर-दूर तक फैले चाय के बागानों के बीच से गुज़रते रास्ते और पायकरा झरन...

केरल की चौखट पर मानसून का पैगाम: बोलती कलम से बूंदों का सलाम

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  तपती, सुलगती और बेहाल करती गर्मी के बीच आखिरकार वो ठंडी फुहार आ ही गई जिसका पूरे हिंदुस्तान को बेसब्री से इंतजार था। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पुष्टि की है कि 4 जून 2026 को मानसून ने केरल के तट पर अपनी धमाकेदार दस्तक दे दी है । भले ही इस बार आगमन में 3 दिनों की मामूली देरी हुई, लेकिन बादलों की गड़गड़ाहट और बूंदों की झंकार ने आते ही प्रकृति को सराबोर कर दिया है। [ 1 , 2 , 3 , 4 , 5 ] इस सुहाने मौसम पर हमारी 'बोलती कलम' कुछ यूँ गुनगुना उठी है: "सुलगते जिस्म पर बूंदों की ये कैसी इनायत है, धरा की प्यास बुझने की, गगन से फिर सिफारिश है। केरल के साहिलों को चूम कर बादल ये बोले हैं, तपिश अब ख़त्म होगी, अब तो बस सावन की बारिश है।" आईएमडी (IMD) के मुताबिक, केरल के अलाप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जैसे कई जिलों में भारी बारिश का दौर शुरू हो चुका है। लक्षद्वीप और अरब सागर के रास्ते आगे बढ़ते हुए यह मानसूनी हवाएँ अब बहुत जल्द कर्नाटक, तमिलनाडु और फिर उत्तर भारत की ओर रुख करेंगी। किसान भाइयों के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि उनके खेतों की उम्मीदें इन्हीं बूंदों स...

बेंगलुरु: बागों के शहर से भारत की 'सिलिकॉन वैली' बनने तक का सफर

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  बेंगलुरु, जिसे भारत की 'सिलिकॉन वैली' के रूप में जाना जाता है, कर्नाटक राज्य की राजधानी और देश का एक प्रमुख महानगर है। यह शहर अपने सुखद मौसम, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और तेजी से बढ़ते तकनीकी उद्योग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। पहले इसे बैंगलोर कहा जाता था, लेकिन आधुनिक समय में इसका नाम बदलकर बेंगलुरु कर दिया गया, जो इसके ऐतिहासिक मूल को दर्शाता है। समुद्र तल से लगभग 900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहाँ का तापमान साल भर बेहद सुहावना और अनुकूल बना रहता है, जो देश के अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में इसे रहने के लिए एक बेहतरीन स्थान बनाता है। इस शहर का इतिहास बेहद दिलचस्प है, जिसकी स्थापना 1537 में विजयनगर साम्राज्य के सामंत केंटेगौड़ा ने की थी। उन्होंने यहाँ एक मिट्टी के किले का निर्माण किया था, जो समय के साथ एक विशाल और आधुनिक शहर में तब्दील हो गया। बेंगलुरु में आज भी इतिहास और आधुनिकता का एक अनूठा संगम देखने को मिलता है। एक तरफ जहाँ टीपू सुल्तान का समर पैलेस और बेंगलुरु पैलेस जैसी ऐतिहासिक इमारतें इसके पुराने वैभव की कहानी बयां करती हैं, वहीं दूसरी तरफ इलेक्ट्रॉनिक ...

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ क्यों है महत्वपूर्ण?

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  नई दिल्ली, 1 जून 2026: भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ (Yoga for Healthy Ageing) घोषित की है। यह दिवस हर वर्ष 21 जून को दुनिया भर में मनाया जाता है और इस बार इसका 12वां संस्करण आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष की थीम का उद्देश्य बढ़ती जीवन प्रत्याशा के साथ लोगों को केवल लंबा जीवन नहीं, बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य पर ध्यान क्यों? आज के समय में चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के कारण लोग पहले की तुलना में अधिक वर्षों तक जीवित रह रहे हैं। हालांकि, बढ़ती उम्र के साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ती हैं। सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ वृद्धावस्था केवल उपचार पर निर्भर नहीं है, बल्कि जीवनशैली और नियमित अभ्यास पर भी आधारित है। इसी संदर्भ में योग को एक सरल और प्रभावी उपाय माना जा रहा है। योग को क्यों माना जा रहा है उपयोगी? योग को एक समग्र स्वास्थ्य अभ्यास माना जाता है, जिसमें शरीर के व्यायाम, श्वास नियंत्रण और ध्यान शामिल हैं। नियमित योग अभ्यास से शरीर ...

अलविदा 'सुरों की मल्लिका' दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की आयु में निधन

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  भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने मखमली और सुरीले कंठ से कई दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली मशहूर पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर (Suman Kalyanpur) का रविवार, 31 मई 2026 की शाम निधन हो गया. उन्होंने 89 वर्ष की आयु में मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली. उनके निधन की वजह बढ़ती उम्र और उससे जुड़ी बीमारियां बताई जा रही हैं. [ 1 , 2 , 3 , 4 , 5 ] सुमन जी के जाने से संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और संगीत जगत की तमाम बड़ी हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. [ 1 , 2 , 3 ] गायिका की करीबी सहयोगी और उनकी जीवनी लिखने वाली मंगला खाडिलकर ने बताया कि सुमन जी ने बेहद शांति से अंतिम सांस ली. भावुक करने वाली बात यह है कि वे अपने आखिरी दिनों में बिस्तर पर  28 जनवरी 1937 को अविभाजित भारत के ढाका (अब बांग्लादेश) में जन्मीं सुमन कल्याणपुर की आवाज में गजब की मिठास थी. उनकी आवाज स्वर कोकिला लता मंगेशकर से इतनी मिलती-जुलती थी कि शुरुआत में लोग अक्सर भ्रमित हो जाते थे. रे...

क्या सोशल मीडिया हमारी सोच को बदल रहा है?

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  आज के समय में सोशल मीडिया हमारे जीवन का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। सुबह उठते ही लोग मोबाइल देखते हैं और रात को सोने से पहले भी सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि इसका हमारी सोच और व्यवहार पर क्या असर पड़ रहा है? जानकारी का सबसे तेज माध्यम सोशल मीडिया ने जानकारी प्राप्त करना बहुत आसान बना दिया है। अब किसी भी घटना की खबर कुछ ही सेकंड में पूरी दुनिया तक पहुंच जाती है। लोग राजनीति, खेल, मनोरंजन और शिक्षा जैसी हर जानकारी तुरंत पा सकते हैं। Read Also : राजा रवि वर्मा की पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ बनी सबसे महंगी भारतीय कला कृति लेकिन तेज जानकारी के साथ एक समस्या भी जुड़ी है — गलत जानकारी। फेक न्यूज का बढ़ता खतरा आज सोशल मीडिया पर कई बार ऐसी खबरें वायरल हो जाती हैं जो पूरी तरह सच नहीं होतीं। लोग बिना जांचे-परखे जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे भ्रम फैलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत की जांच करनी चाहिए। युवाओं पर क्या असर पड़ रहा है? सोशल मीडिया का सबसे अधिक प्रभाव युवाओं पर दिखाई देता है। कई लोग घंटों तक मोब...

ब्लॉग पोस्ट शीर्षक: देवभूमि की गोद में बसा प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्वर्ग: कुमाऊँ

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  उत्तर भारत के उत्तराखंड राज्य में बसा कुमाऊँ क्षेत्र प्रकृति की एक ऐसी अनमोल कृति है जो अपने भीतर असीम शांति, विहंगम दृश्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए है। बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियाँ, घने देवदार के जंगल और कल-कल बहती नदियाँ इस पूरे क्षेत्र को एक जादुई रूप देती हैं। प्राचीन काल से ही कुमाऊँ को मानसखंड के नाम से जाना जाता रहा है, जिसका उल्लेख हमारे पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है।  यहाँ की वादियों में कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है मानो समय ठहर गया हो और प्रकृति खुद आपके स्वागत में बाहें फैलाए खड़ी हो। नैनीताल की शांत झीलें, कौसानी से दिखने वाला हिमालय का भव्य नजारा और अल्मोड़ा की सांस्कृतिक गलियाँ इस क्षेत्र की विविधता को बखूबी बयां करती हैं। यहाँ की आबो-हवा में एक अनोखा सम्मोहन है जो हर साल दुनिया भर से लाखों पर्यटकों और अध्यात्म की तलाश में आए लोगों को अपनी ओर खींच लाता है। कुमाऊँ केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं बल्कि अपनी अनूठी संस्कृति, लोक कला और परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ का कुमाऊँनी संगीत, झोड़ा और छोलिया नृत्य यहाँ के जनजीवन की जीवंत...

आगरा की ठंडाई : गर्मी म ठंडक का अहसास

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  ताज़गी का शाही स्वाद: आगरा की मशहूर ठंडाई, पेठे के शहर का एक और ज़ायका जब भी ज़ुबान पर ताज़महल के शहर 'आगरा' का नाम आता है, तो दिमाग में सबसे पहले अंगूरी पेठे या चटपटी बेड़ई की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आगरा की गलियों में एक और ऐसा ज़ायका छिपा है, जिसके बिना यहाँ की गर्मियां और होली का त्योहार अधूरा है? जी हां, हम बात कर रहे हैं आगरा की पारंपरिक और शाही ठंडाई की। अगर आप आगरा आ रहे हैं और आपने यहाँ के पुराने बाज़ारों में घूमकर एक कुल्हड़ ठंडी-ठंडी ठंडाई नहीं पी, तो समझिए आपकी आगरा यात्रा अधूरी रह गई। आइए आज अपने ब्लॉग 'बोलती कलम' के माध्यम से आपको सैर कराते हैं आगरा के इस मीठे और ताज़गी से भरे सफर की। स्वाद ऐसा जो मुग़ल काल की याद दिला दे आगरा की ठंडाई की सबसे बड़ी खासियत इसका गाढ़ापन और इसमें इस्तेमाल होने वाले मसालों का सटीक संतुलन है। यह कोई साधारण मिल्क शेक नहीं है, बल्कि इसे बेहद पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है। शुद्ध गाढ़े दूध में बादाम, पिस्ता, काजू, खसखस (पोपी सीड्स), खरबूजे के बीज (मगज), सौंफ, इलायची, काली मिर्च और कश्मीरी केसर का एक स...