ऋषिकेश का अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव: आत्मा की यात्रा का अनुभव

 

मार्च की शुरुआत में ऋषिकेश में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव दुनिया  में  भर में प्रचलित है। योग अब एक वैश्विक घटना बन चुका है। महोत्सव हर साल मार्च में आयोजित होता है और यह दुनिया भर से योग प्रेमियों को आकर्षित करता है। भारत के हर कोने से लोग इसमें शामिल होते हैं, और लगभग हर हिस्से से विदेशी प्रतिभागी भी यहाँ दिखते हैं।

मुख्य उत्सव परमार्थ निकेतन आश्रम में पवित्र गंगा के तट पर आयोजित होता है, लेकिन शहर के हर होटल और आश्रम में भी विशेषज्ञों और मेहमानों के नेतृत्व में योग और ध्यान सत्र होते हैं। पूरे शहर का वातावरण ध्यान और योग की ऊर्जा से भरा होता है।

मैं जिस होटल में रहा, वहाँ दैनिक कार्यक्रम में योग सत्र, ध्यान कक्षाएं, चिकित्सा सत्र और सत्संग शामिल थे। हमने सुबह गंगा के निजी घाट पर दिन की शुरुआत की। सूरज के उगते ही गंगा की लालिमा और बहता जल अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। सुबह की प्रार्थना और ध्यान से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है।

भोजन भी योग का हिस्सा है। नाश्ते में ताज़े फल, रस और ज्यादातर शाकाहारी व्यंजन होते हैं। पहली बार मुझे ऐसा लगा जैसे यह एक वैश्विक समुदाय है, जो पवित्र गंगा के तट पर एक साथ बैठा है। यहाँ हर कोई बहुत विनम्र और मुस्कुराता हुआ अभिवादन करता है।

दिन भर सत्र से सत्र में भाग लेता रहा। शाम को गंगा आरती का दृश्य अविस्मरणीय था। होटल के निजी घाट पर आरती होती, लेकिन हम में से अधिकांश लोग पास के त्रिवेणी घाट गए। सैकड़ों दीपकों का प्रकाश, मंत्रों की गूँज, और नारंगी वस्त्रधारी लोग दीपक घुमाते हुए यह सब एक दिव्य अनुभव था।


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