पहली बार रणथंभौर जा रहे हैं? टाइगर सफारी, सही समय और ट्रिप प्लान की पूरी जानकारी

चित्र
  अगर आप पहली बार रणथंभौर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके मन में कई सवाल होंगे—रणथंभौर कब जाना चाहिए, कितने दिन रुकना सही रहेगा, टाइगर सफारी कैसे बुक करें, एक सफारी काफी है या दो करनी चाहिए और सबसे बड़ा सवाल, क्या रणथंभौर में बाघ जरूर दिखाई देता है? इन सवालों के जवाब जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि रणथंभौर की यात्रा किसी सामान्य sightseeing trip जैसी नहीं है। यहां आपका अनुभव मौसम, सफारी के समय, जंगल की परिस्थितियों और थोड़े से भाग्य पर भी निर्भर करता है। मेरी नजर में रणथंभौर को सिर्फ “बाघ देखने की जगह” समझना सबसे बड़ी गलती होगी। सवाई माधोपुर के पास स्थित यह इलाका जंगल, झीलों, पहाड़ियों, वन्यजीवों और ऐतिहासिक रणथंभौर किले का ऐसा मेल है, जहां एक ही यात्रा में आपको प्रकृति और इतिहास दोनों को करीब से देखने का मौका मिलता है। अगर आप अपनी पहली यात्रा को थोड़ा सोच-समझकर प्लान करते हैं, तो सिर्फ एक सफारी के बजाय पूरा रणथंभौर अनुभव करना ज्यादा यादगार हो सकता है। पहली बार रणथंभौर जाने के लिए कितने दिन काफी हैं? अगर आप पहली बार रणथंभौर जा रहे हैं, तो 2 रात और 3 दिन का trip एक अच्छा विकल्...

ऋषिकेश का अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव: आत्मा की यात्रा का अनुभव

 

मार्च की शुरुआत में ऋषिकेश में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव दुनिया  में  भर में प्रचलित है। योग अब एक वैश्विक घटना बन चुका है। महोत्सव हर साल मार्च में आयोजित होता है और यह दुनिया भर से योग प्रेमियों को आकर्षित करता है। भारत के हर कोने से लोग इसमें शामिल होते हैं, और लगभग हर हिस्से से विदेशी प्रतिभागी भी यहाँ दिखते हैं।

मुख्य उत्सव परमार्थ निकेतन आश्रम में पवित्र गंगा के तट पर आयोजित होता है, लेकिन शहर के हर होटल और आश्रम में भी विशेषज्ञों और मेहमानों के नेतृत्व में योग और ध्यान सत्र होते हैं। पूरे शहर का वातावरण ध्यान और योग की ऊर्जा से भरा होता है।

मैं जिस होटल में रहा, वहाँ दैनिक कार्यक्रम में योग सत्र, ध्यान कक्षाएं, चिकित्सा सत्र और सत्संग शामिल थे। हमने सुबह गंगा के निजी घाट पर दिन की शुरुआत की। सूरज के उगते ही गंगा की लालिमा और बहता जल अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। सुबह की प्रार्थना और ध्यान से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है।

भोजन भी योग का हिस्सा है। नाश्ते में ताज़े फल, रस और ज्यादातर शाकाहारी व्यंजन होते हैं। पहली बार मुझे ऐसा लगा जैसे यह एक वैश्विक समुदाय है, जो पवित्र गंगा के तट पर एक साथ बैठा है। यहाँ हर कोई बहुत विनम्र और मुस्कुराता हुआ अभिवादन करता है।

दिन भर सत्र से सत्र में भाग लेता रहा। शाम को गंगा आरती का दृश्य अविस्मरणीय था। होटल के निजी घाट पर आरती होती, लेकिन हम में से अधिकांश लोग पास के त्रिवेणी घाट गए। सैकड़ों दीपकों का प्रकाश, मंत्रों की गूँज, और नारंगी वस्त्रधारी लोग दीपक घुमाते हुए यह सब एक दिव्य अनुभव था।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आज से शुरू

दुनिया की पहली फोटो की कहानी

प्रतापगढ़ विलेज थीम रिज़ॉर्ट Haryana — शहर के शोर से दूर देहात की सुकून भरी झलक

कौसानी की चोटी से एक सुबह सूर्योदय ज़रूर देखें ,यह पल सचमुच जादुई है

चौखी धानी: जयपुर में संस्कृति, कला और देहात की आत्मा को भी अपने साथ समेटे हुए है