फोन पर वीडियो देखने का नशा: कितना खतरनाक है?

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  सुबह आंख खुलते ही फोन पर वीडियो देखना, खाना खाते समय रील्स चलाना, खाली समय में लगातार शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करना और रात को सोने से पहले “बस एक वीडियो और” कहना—आज यह आदत बहुत सामान्य हो गई है। वीडियो देखना अपने आप में नुकसानदायक नहीं है। फोन से मनोरंजन के साथ-साथ पढ़ाई, समाचार और जानकारी भी मिलती है। समस्या तब शुरू होती है जब वीडियो देखने का समय हमारे नियंत्रण से बाहर होने लगे और जरूरी काम, नींद, पढ़ाई, नौकरी या परिवार के साथ बिताया समय पीछे छूटने लगे। यही वजह है कि फोन पर वीडियो देखने की आदत कब सामान्य मनोरंजन से आगे बढ़ जाती है और कब चिंता का कारण बन सकती है, इसे समझना जरूरी है। क्या फोन पर वीडियो देखना सच में “नशा” है? बोलचाल की भाषा में लोग किसी ऐसी आदत को “नशा” कह देते हैं जिसे छोड़ना मुश्किल महसूस हो। लेकिन हर व्यक्ति जो लंबे समय तक वीडियो देखता है, उसे चिकित्सकीय रूप से “आदी” कहना सही नहीं होगा। असल चिंता तब होती है जब व्यक्ति वीडियो देखने पर नियंत्रण नहीं रख पाता, दूसरी जरूरी गतिविधियों पर उसका असर पड़ने लगता है और नुकसान दिखाई देने के बावजूद वह अपनी आदत को कम नहीं कर पाता।...

तालो में नैनीताल : उत्तराखंड का स्वर्ग

 


नैनीताल झीलों का शहर है। नैनी यहाँ की प्रमुख झील है, जिसके नाम पर इसका नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी. बेरून नमक चीनी व्यापारी को जाता है। अपने दोस्त के साथ वह यहां जब शिकार कर रहे थे, तो अचानक ही नैनी झील के किनारे पहुंच गये। यहां की खूबसूरती देखने के बाद उन्होंने अपना कारोबार छोड़ दिया और इस झील के किनारे यूरोपीय कालोनी बसाई। 

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वर्ष 1841 में इंग्लिशमैन कलकत्ता नामक पत्रिका ने जब इस कालोनी और झील के बारे में बताया, तो नैनीताल सुर्ख़ियों में आ गया। पत्रिका ने अल्मोड़ा के आसपास नैनीताल नामक, एक खूबसूरत झील की खोज की बात कही थी। नतीजतन 1847 तक आते-आते नैनीताल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गया। यह कुमाऊं मंडल का मुख्यालय भी है। यहां का सबसे बड़ा शहर हल्द्वानी है।

मुख्य आकर्षणों में नैनादेवी मंदिर, हनुमान गढ़ी, मालरोड, एरियल रोपवे और नैना पीक जैसे स्थल गिने जाते हैं। नैनीताल को हिमालय का खूबसूरत गहना भी कहा जाता है।

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