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लोग कहते हैं दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन किस दिशा में ?

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  अक्सर लोगों को कहते सुना जाता है कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। पहले जैसा समय अब नहीं रहा। तकनीक बदल गई है, लोगों की सोच बदल रही है और जिंदगी जीने का तरीका भी पहले से अलग हो गया है। लेकिन कभी आपने रुककर सोचा है कि आखिर यह दुनिया बदल किस दिशा में रही है? क्या हम सच में बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, या सिर्फ हमारी जिंदगी की रफ्तार तेज हो गई है? तकनीक आगे बढ़ रही है, इंसान कितना आगे बढ़ा है? आज मोबाइल फोन के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से कुछ ही सेकंड में बात की जा सकती है। इंटरनेट ने जानकारी को हमारी उंगलियों तक पहुँचा दिया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए साधन कई कामों को आसान बना रहे हैं। जो काम पहले घंटों या दिनों में होते थे, उनमें से कई अब कुछ मिनटों में पूरे हो जाते हैं। यह बदलाव निश्चित रूप से हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बना रहा है। लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है। क्या तकनीक के आगे बढ़ने के साथ इंसान के भीतर भी उतना ही बदलाव आया है? हमारे पास दूसरों से जुड़े रहने के अधिक साधन हैं, फिर भी कई बार अपने ही लोगों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। जिंदगी...

एक आवाज़ जो ब्रांड बन गई — पीयूष पांडे का आख़िरी सलाम

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  भारतीय विज्ञापन जगत का एक सितारा हमेशा के लिए खामोश हो गया।कुछ खास है जिंदगी में”, “Fevicol का जोड़”, “हर खुशी में रंग लाए” जैसे जुमले गढ़ने वाले पीयूष पांडे अब हमारे बीच नहीं रहे। 24 अक्टूबर 2025 की सुबह, जब यह खबर आई कि 70 वर्ष की उम्र में यह दिग्गज हमें छोड़ गए, तो पूरे मीडिया और विज्ञापन जगत में सन्नाटा छा गया। राजस्थान के जयपुर में जन्मे पीयूष जी ने जीवन की शुरुआत क्रिकेट और चाय के कारोबार से की थी, लेकिन किस्मत ने उन्हें कहानी सुनाने की