भेड़ाघाट: जहाँ पत्थर बोलते हैं और पानी धुआं बन उड़ता है


 प्रकृति जब अपनी पूरी उदारता के साथ किसी कैनवास पर रंग बिखेरती है, तो जबलपुर का भेड़ाघाट जैसा दृश्य उभरकर आता है। मध्य प्रदेश के हृदय में स्थित यह स्थान केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि नर्मदा मैया के कल-कल करते संगीत और सफेद संगमरमर की ऊँची चट्टानों के बीच एक आध्यात्मिक और प्राकृतिक मिलन है। 

जैसे ही आप भेड़ाघाट की ओर बढ़ते हैं, हवा में एक अनजानी सी नमी और शोर का अहसास होने लगता है, जो आपको धुआंधार जलप्रपात की विशालता का संकेत देता है। यहाँ नर्मदा नदी जब ऊँचाई से संगमरमर के पत्थरों पर गिरती है, तो पानी की बूंदें धुएँ का भ्रम पैदा करती हैं, और इसीलिए इसे 'धुआंधार' कहा जाता है। यह दृश्य इतना मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है कि घंटों इसकी लहरों को निहारने के बाद भी मन नहीं भरता।

यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता नर्मदा की शांत लहरों के बीच नौका विहार करना है। ऊँची-ऊँची सफेद, भूरी और नीली संगमरमर की चट्टानों के बीच से जब नाव धीरे-धीरे गुजरती है, तो ऐसा लगता है मानो हम किसी काल्पनिक संसार में आ गए हों। चाँदनी रात में भेड़ाघाट की सुंदरता अपने चरमोत्कर्ष पर होती है, जब सफेद पत्थर चाँद की रोशनी में चाँदी की तरह चमकने लगते हैं। 
यहाँ के स्थानीय नाविकों की तुकबंदी और हाजिरजवाबी यात्रा के रोमांच को दोगुना कर देती है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है; पास ही स्थित चौसठ योगिनी मंदिर अपने प्राचीन स्थापत्य और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ पर्यटकों को इतिहास की गहराइयों में ले जाता है। भेड़ाघाट की ये वादियाँ, नर्मदा का शीतल जल और संगमरमर की वो शीतल चट्टानें हर मुसाफिर के दिल पर एक ऐसी अमिट छाप छोड़ती हैं, जो "बोलती कलम" के माध्यम से ही शब्दों में बयां की जा सकती हैं।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आज से शुरू

दुनिया की पहली फोटो की कहानी

कौसानी की चोटी से एक सुबह सूर्योदय ज़रूर देखें ,यह पल सचमुच जादुई है

प्रतापगढ़ विलेज थीम रिज़ॉर्ट Haryana — शहर के शोर से दूर देहात की सुकून भरी झलक

भीमबेटका: मानव सभ्यता के आरंभ का अद्भुत प्रमाण