गोंधल क्या है? मराठी परंपरा से ऑस्कर तक

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  Gondhal Oscar 2027: मराठी फिल्म ‘गोंधल’ के भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री बनने के बाद महाराष्ट्र की एक पारंपरिक लोक-विधि भी चर्चा में आ गई है। आखिर गोंधल क्या है और इस परंपरा का फिल्म से क्या संबंध है? आइए समझते हैं। गोंधल आखिर होता क्या है? महाराष्ट्र में गोंधल एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान और लोक-प्रस्तुति है, जिसमें भक्ति, संगीत, गायन और नृत्य का मेल देखने को मिलता है। यह परंपरा कुछ परिवारों में कुलदेवता की पूजा और शुभ अवसरों से जुड़ी रही है। महाराष्ट्र के मराठी विश्वकोश के अनुसार, गोंधल देवी की स्तुति और पूजा से जुड़ा एक कुलाचार है। गोंधल की प्रस्तुति करने वाले कलाकारों को गोंधली कहा जाता है। पारंपरिक प्रस्तुति में देवी-देवताओं की स्तुति, लोकगीत, वाद्य संगीत और नृत्य शामिल होते हैं। शादी जैसे शुभ अवसरों पर भी होती है यह परंपरा गोंधल का संबंध महाराष्ट्र के कुछ परिवारों में विवाह और दूसरे मंगल अवसरों से रहा है। महाराष्ट्र सरकार के गजेटियर में भी इसका उल्लेख मिलता है कि शुभ अवसर के बाद देवी की पूजा और स्तुति के लिए गोंधल की प्रस्तुति की जाती थी। इस दौरान रात में संगीत और नृत्य ...

पहाड़ों पर कुदरत का सफ़ेद श्रृंगार: एक जादुई अहसास


 जनवरी का आखिरी सप्ताह हिमालय की गोद में बसे शहरों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। लंबे इंतज़ार के बाद जब आसमान से रुई के फाहों की तरह बर्फ़ की चादर गिरनी शुरू हुई, तो पहाड़ों का मंज़र ही बदल गया। जम्मू-कश्मीर के 

 तक, हर तरफ़ सिर्फ़ सफ़ेदी का राज है।  की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के चलते उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फ़बारी हो रही है, जिससे पूरा क्षेत्र 'विंटर वंडरलैंड' में तब्दील हो गया है।

बर्फ़ की इस मखमली परत ने जहाँ पर्यटकों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है, वहीं स्थानीय जनजीवन के लिए यह एक चुनौती भी बनकर आई है।  और  जैसे प्रमुख हिल स्टेशनों पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है, जिससे सड़कों पर लंबा जाम देखने को मिल रहा है। The Hindu की खबरों के मुताबिक, भारी बर्फ़बारी के कारण हिमाचल प्रदेश में 500 से अधिक सड़कें बंद हो गई हैं और बिजली की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। अटल टनल के पास गाड़ियों की आवाजाही रोक दी गई है, फिर भी बर्फ़ का दीदार करने का जुनून लोगों को इन ऊँचाइयों तक खींच ला रहा है।
पहाड़ों की इस बर्फ़बारी का सीधा असर अब मैदानी इलाकों में भी दिखने लगा है। दिल्ली-NCR सहित पंजाब और हरियाणा में ठिठुरन बढ़ गई है और शीतलहर का प्रकोप जारी है। Aaj Tak के अनुसार, इस साल दिसंबर और जनवरी की शुरुआत सूखी रहने के बाद अब महीने के अंत में हुई यह बर्फ़बारी खेती और पर्यटन दोनों के लिए संजीवनी का काम कर रही है। प्रकृति का यह अद्भुत रूप हमें याद दिलाता है कि भले ही रास्ते कठिन हों, लेकिन पहाड़ों की यह खामोश सफ़ेदी अपने आप में एक सुकून और नयापन समेटे हुए है।

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