Royal Indian Hotel: कोलकाता का ऐतिहासिक रेस्टोरेंट

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   रॉयल इंडियन होटल कोलकाता की पुरानी गलियों में, नख़ोदा मस्जिद के पास बाराबाजार इलाके में एक ऐसा रेस्टोरेंट है, जो केवल खाने की जगह नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और स्वाद की विरासत का हिस्सा है रॉयल इंडियन होटल। लगभग 1905 में स्थापित यह रेस्टोरेंट शहर के सबसे पुराने और लगातार चल रहे खाने के स्थलों में से एक माना जाता है।नाम में “होटल” होने के बावजूद, यह जगह  कोलकाता की सबसे पुरानी और पारंपरिक मुग़लई बिरयानी रेस्टोरेंट के रूप में जाना जाता  है। पुराने समय में भारत में कई खाने-पीने के स्थलों को “होटल” कहा जाता था, लेकिन इसका मतलब था कि वे खाना और रुकने की सुविधा दोनों दे सकते थे। आज रॉयल इंडियन होटल मुख्य रूप से खाने के लिए प्रसिद्ध है और इसकी होटल जैसी लॉजिंग सुविधा मौजूद नहीं है। पुराने कोलकाता की खुशबू  रॉयल इंडियन होटल में कदम रखते ही पुराने कोलकाता का माहौल महसूस होता है। दरवाजा खोलते ही मिट्टी और मसालों की हल्की खुशबू, पुराने लकड़ी के फर्नीचर और दीवारों पर लगे पोस्टर्स आपको समय में पीछे ले जाते हैं। यहाँ बैठते ही लगता है जैसे आप ट्राम और घोड़े वाली ग...

कनॉट प्लेस: जहाँ दिल्ली की धड़कन हर कदम पर सुनाई देती है


दिल्ली अगर एक कहानी है, तो कनॉट प्लेस उसका सबसे जीवंत अध्याय है। यह सिर्फ इमारतों और दुकानों का गोल दायरा नहीं, बल्कि इतिहास, आधुनिकता और लोगों की भावनाओं का संगम है। जैसे ही कोई यहाँ कदम रखता है, शहर की रफ्तार, उसकी रौनक और उसकी यादें एक साथ महसूस होने लगती हैं। सफ़ेद खंभों वाली गोलाकार इमारतें आज भी अंग्रेज़ी दौर की गवाही देती हैं, लेकिन उनके बीच बहती ज़िंदगी पूरी तरह आज की दिल्ली की है।

सुबह के समय कनॉट प्लेस शांत और सलीकेदार लगता है। दफ्तरों की ओर बढ़ते लोग, हाथ में कॉफी लिए युवा और अख़बार पढ़ते बुज़ुर्ग—सब मिलकर इसे एक सभ्य, सधी हुई पहचान देते हैं। जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, यहाँ की गलियाँ रंगों और आवाज़ों से भर जाती हैं। कहीं ब्रांडेड शोरूम्स की चमक है तो कहीं फुटपाथ पर बैठा कलाकार अपनी कला से लोगों को रोक लेता है। यह जगह अमीरी और आम आदमी के बीच की दूरी को पाटती हुई नज़र आती है।

कनॉट प्लेस की असली जान इसकी विविधता में है। यहाँ पुराने किताबों की खुशबू भी है और नए कैफे की कॉफी की भाप भी। किसी को अगर दिल्ली को समझना हो, तो उसे कनॉट प्लेस में कुछ घंटे बिताने चाहिए। यहाँ की सेंट्रल पार्क में बैठकर लोगों को देखना अपने आप में एक अनुभव है—कोई दोस्ती निभा रहा है, कोई सपना बुन रहा है और कोई बस शहर को महसूस कर रहा है।

शाम ढलते ही कनॉट प्लेस एक अलग ही रूप ले लेता है। रोशनियाँ, हँसी, संगीत और बातचीत—सब मिलकर इसे दिल्ली की सबसे ज़िंदा जगह बना देते हैं। यह वो जगह है जहाँ यादें बनती हैं, मुलाक़ातें होती हैं और शहर अपने सबसे असली रूप में सामने आता है। कनॉट प्लेस सिर्फ एक स्थान नहीं, बल्कि दिल्ली की धड़कन है, जो हर दिल से जुड़ जाती है।

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