मंडू : सन्नाटे में बसा मध्य प्रदेश का City of Joy
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मध्य प्रदेश के धार ज़िले में बसा मंडू उन जगहों में से है जहाँ पहुँचते ही महसूस होता है कि यहाँ समय की रफ्तार धीमी है। न कोई भागदौड़, न शोर, न ही टूरिस्टों की भीड़। चारों तरफ फैले पुराने किले, महल और मस्जिदें आज भी चुपचाप खड़ी हैं, जैसे किसी बीते दौर की कहानी सुनाने का इंतज़ार कर रही हों। शायद इसी वजह से मंडू को कहा जाता है सिटी ऑफ़ जॉय, यहाँ की खुशी शोर में नहीं, सन्नाटे में छुपी है।
कभी मालवा सल्तनत की राजधानी रहा मंडू सत्ता, कला और प्रेम का केंद्र था। इसकी दीवारों ने राजाओं की चालें देखी हैं और इसकी हवाओं में आज भी प्रेम कहानियों की खुशबू घुली हुई है। बाज बहादुर और रानी रूपमती की प्रेम कथा मंडू की आत्मा में बसी हुई है। पहाड़ी पर स्थित रानी रूपमती का मंडप आज भी नर्मदा घाटी की ओर देखता है, जहाँ सूर्यास्त के समय आसमान और इतिहास दोनों एक साथ रंग बदलते हैं।
मंडू की इमारतें सिर्फ पत्थर नहीं हैं, वे अनुभव हैं। पानी के बीच बना जहाज़ महल ऐसा प्रतीत होता है जैसे आज भी तैर रहा हो। मानसून के दिनों में जब आसपास पानी भर जाता है, तब यह दृश्य और भी अलौकिक हो जाता है। हिंडोला महल की झुकी हुई दीवारें वास्तुकला की अनोखी मिसाल पेश करती हैं, वहीं विशाल जामी मस्जिद अपनी खामोशी से दिल को छू जाती है। यहाँ घूमते हुए कई बार ऐसा लगता है जैसे पूरा परिसर सिर्फ आपके लिए खुला हो।
बारिश के मौसम में मंडू का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। चारों ओर हरियाली फैल जाती है, बादल किलों को छूते हुए गुजरते हैं और ठंडी हवा मन को हल्का कर देती है। झरने बहने लगते हैं और पत्थरों से टकराती बारिश इतिहास को जैसे फिर से जगा देती है। यही वह समय होता है जब मंडू सच में अपने नाम को सार्थक करता है।
आज भी मंडू भीड़ से इसलिए दूर है क्योंकि यहाँ दिखावे से ज़्यादा सादगी है। न बड़े मॉल हैं, न नाइटलाइफ का शोर। यहाँ लोग रुकने आते हैं, दौड़ने नहीं। साधारण होटल, हेरिटेज स्टेस और स्थानीय भोजन इस जगह को और भी अपनापन देते हैं। कम बजट में यहाँ ऐसा अनुभव मिलता है जो मन में लंबे समय तक ठहर जाता है।
अगर आप उन यात्रियों में से हैं जो फोटो से ज़्यादा एहसास इकट्ठा करते हैं, जो भीड़ से दूर रहकर जगह को महसूस करना चाहते हैं, तो मंडू आपके लिए बना है। यह जगह आपको बुलाती नहीं, चुपचाप इंतज़ार करती है। और जो एक बार यहाँ की खामोशी को समझ लेता है, वह मंडू को कभी भूल नहीं पाता।
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