भारतीय लोग ज्योतिष में क्यों विश्वास करते हैं
शुरुआत में जींस खास तौर पर कॉलेज स्टूडेंट्स और मिडिल-क्लास युवाओं में लोकप्रिय हुई। उस समय ये आसानी से हर जगह नहीं मिलती थी और काफ़ी महंगी भी मानी जाती थी। ज़्यादातर जींस या तो विदेश से मंगाई जाती थी या फिर लोकल टेलर्स के ज़रिए मोटे डेनिम कपड़े से सिली जाती थी। 1980 के दशक तक आते-आते भारतीय बाज़ार में धीरे-धीरे देसी ब्रांड्स और मिल्स ने डेनिम बनाना शुरू किया, जिससे जींस आम लोगों की पहुँच में आने लगी।
महिलाओं के लिए जींस का सफ़र थोड़ा अलग और चुनौतीपूर्ण रहा। पहले इसे लड़कों का कपड़ा माना जाता था, लेकिन जैसे-जैसे महिलाओं की शिक्षा, कामकाजी भूमिका और आत्मनिर्भरता बढ़ी, वैसे-वैसे जींस भी उनके वॉर्डरोब का हिस्सा बनती चली गई। 1990 के दशक में जब भारत में आर्थिक उदारीकरण हुआ, तब विदेशी ब्रांड्स, फैशन मैगज़ीन और टीवी चैनलों ने जींस को हर उम्र और जेंडर के लिए ट्रेंडी बना दिया।
आज भारत में जींस सिर्फ़ फैशन नहीं, बल्कि कम्फर्ट, स्टाइल और पहचान का कॉम्बिनेशन बन चुकी है। गांव से लेकर शहर तक, स्कूल से लेकर ऑफिस तक, जींस हर जगह अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। गेंट्स हो या लेडीज़, जींस ने भारतीय फैशन में वो जगह बना ली है, जहाँ से इसका जाना अब मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन लगता है।
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