भारतीय लोग ज्योतिष में क्यों विश्वास करते हैं
शाम ढलते ही मॉल रोड की रौनक और गहराने लगती है। झील के किनारे लगी लाइट्स पानी पर ऐसे प्रतिबिंब बनाती हैं मानो सितारे ज़मीन पर उतर आए हों। सड़क के किनारे बैठकर गरम-गरम भुट्टा या मोमोज़ खाते हुए झील की लहरों को निहारना, मन को अजीब सा सुकून देता है। यहाँ समय धीमा हो जाता है, बातें लंबी और मुस्कान अपने आप गहरी।
अगली सुबह नैनी झील का रूप और भी मनमोहक होता है। हल्की धुंध के बीच नावों का धीरे-धीरे पानी पर फिसलना, आसपास की पहाड़ियों का झील में उतरता अक्स और पक्षियों की मधुर आवाज़—सब मिलकर ऐसा एहसास कराते हैं जैसे प्रकृति खुद आपको “ठहर जाओ” कह रही हो। नाव चलाते हुए जब पानी की हल्की छींटें चेहरे को छूती हैं, तो लगता है मानो सारी थकान धुल गई हो।
नैनीताल का वीकेंड सिर्फ घूमना नहीं, महसूस करना है। मॉल रोड की चहल-पहल और नैनी झील की शांति—दोनों मिलकर दिल और दिमाग को एक साथ ताज़ा कर देते हैं। लौटते वक्त जेब में यादों की सौगात और मन में फिर आने का वादा होता है। सच कहूँ तो, नैनीताल से विदा लेना आसान नहीं, क्योंकि यहाँ हर रास्ता, हर लहर और हर शाम कुछ कह जाती है—और मेरी क़लम उन बातों को बस काग़ज़ पर उतार देती है।
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