Royal Indian Hotel: कोलकाता का ऐतिहासिक रेस्टोरेंट

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   रॉयल इंडियन होटल कोलकाता की पुरानी गलियों में, नख़ोदा मस्जिद के पास बाराबाजार इलाके में एक ऐसा रेस्टोरेंट है, जो केवल खाने की जगह नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और स्वाद की विरासत का हिस्सा है रॉयल इंडियन होटल। लगभग 1905 में स्थापित यह रेस्टोरेंट शहर के सबसे पुराने और लगातार चल रहे खाने के स्थलों में से एक माना जाता है।नाम में “होटल” होने के बावजूद, यह जगह  कोलकाता की सबसे पुरानी और पारंपरिक मुग़लई बिरयानी रेस्टोरेंट के रूप में जाना जाता  है। पुराने समय में भारत में कई खाने-पीने के स्थलों को “होटल” कहा जाता था, लेकिन इसका मतलब था कि वे खाना और रुकने की सुविधा दोनों दे सकते थे। आज रॉयल इंडियन होटल मुख्य रूप से खाने के लिए प्रसिद्ध है और इसकी होटल जैसी लॉजिंग सुविधा मौजूद नहीं है। पुराने कोलकाता की खुशबू  रॉयल इंडियन होटल में कदम रखते ही पुराने कोलकाता का माहौल महसूस होता है। दरवाजा खोलते ही मिट्टी और मसालों की हल्की खुशबू, पुराने लकड़ी के फर्नीचर और दीवारों पर लगे पोस्टर्स आपको समय में पीछे ले जाते हैं। यहाँ बैठते ही लगता है जैसे आप ट्राम और घोड़े वाली ग...

राजस्थान की अनमोल धरोहर : शेखावाटी

 

राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक हवेलियों, मंदिरों और अद्वितीय कला के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र न केवल वास्तुकला और कला का प्रतीक है, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर का भी प्रतिनिधित्व करता है। शेखावाटी का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है और इसे “राजस्थान की खुली कला गैलरी” कहा जाता है।

शेखावाटी की स्थापना

शेखावाटी की स्थापना 15वीं सदी में राव शेखा ने की थी, जिनके नाम पर इस क्षेत्र का नाम रखा गया। इस क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व व्यापारिक मार्गों के कारण बढ़ गया। समय के साथ यहाँ के व्यापारी परिवारों ने अपनी समृद्धि का प्रतीक बनने के लिए भव्य हवेलियों का निर्माण किया। इन हवेलियों में वास्तुकला और चित्रकला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

व्यापार और समृद्धि

शेखावाटी का भूगोल इसे व्यापार के लिए अनुकूल बनाता था। यहाँ से गुजरने वाले व्यापारिक मार्गों ने इसे राजस्थान के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में बदल दिया। हवेलियों और बागानों का निर्माण करने वाले व्यापारी समुदाय ने क्षेत्र की आर्थिक और सांस्कृतिक समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

कला और वास्तुकला

शेखावाटी की हवेलियों में दिखाई देने वाली फ्रेस्को कला इसे अन्य क्षेत्रों से अलग बनाती है। हवेलियों की दीवारों और छतों पर बने चित्रकला में भारतीय पौराणिक कथाएँ, ऐतिहासिक घटनाएँ और सामाजिक जीवन के दृश्य चित्रित हैं। यहाँ की वास्तुकला में राजस्थानी शैलियों के साथ यूरोपीय प्रभाव भी दिखाई देता है।

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत

शेखावाटी के मंदिर और चौपालें क्षेत्र की धार्मिक और सामाजिक परंपराओं को दर्शाते हैं। यहाँ के त्योहार, मेलों और लोक रीति-रिवाजों में क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता झलकती है। गणगौर, तीज और होली जैसे पर्व यहाँ बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं।

शेखावाटी का महत्व आज

आज शेखावाटी न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक शिक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों और कलाकारों के लिए यह रोजगार और कला संरक्षण का माध्यम बन चुका है। शेखावाटी की हवेलियाँ, मंदिर और गलियों में छुपी कला आने वाली पीढ़ियों को राजस्थान की सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव कराती है।

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