घेवर की मिठास और रक्षाबंधन का महत्व

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रक्षाबंधन भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है। रक्षाबंधन के त्योहार में मिठाइयों का भी विशेष महत्व होता है, और घेवर इस अवसर की खास मिठाइयों में से एक है।  खास तौर पर राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में लोकप्रिय है। सावन के मौसम और रक्षाबंधन के आसपास बाजारों में घेवर की अलग-अलग किस्में आसानी से देखने को मिलती हैं। इसकी जालीदार बनावट, कुरकुरापन और मीठा स्वाद त्योहार की खुशी को और बढ़ा देते हैं। रक्षाबंधन पर जब भाई-बहन एक-दूसरे से मिलते हैं, तो मिठाई खिलाकर खुशी बांटने की परंपरा है। ऐसे में घेवर सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि त्योहार की खुशियों और पारिवारिक अपनापन का स्वाद बन जाता है।रक्षाबंधन के दिन घर में राखी, पूजा और मिठाइयों की तैयारियां होती हैं। कई परिवारों में घेवर खरीदने या घर पर बनाने की परंपरा भी रही है। भाई को राखी बांधने के बाद उसे घेवर खिलाना इस खास दिन को और यादगार बना देता है। रक्षाबंधन...

अल्मोड़ा कुमाऊँ के वैभव और अध्यात्म की अनकही दास्तान

 


देवभूमि उत्तराखंड की गोद में बसा अल्मोड़ा केवल एक शहर नहीं, बल्कि कुदरत और संस्कृति का एक अनूठा संगम है। 'बोलती कलम' के लिए अगर हम अल्मोड़ा की बात करें, तो यहाँ की हवाओं में एक अलग ही सुकून और इतिहास की खुशबू रची-बसी महसूस होती है। कोसी और सुयाल नदियों के बीच एक घोड़े की काठी के आकार की पहाड़ी पर स्थित यह शहर सदियों से कुमाऊँ की सांस्कृतिक राजधानी रहा है। यहाँ की टेढ़ी-मेढ़ी गलियाँ और पारंपरिक लकड़ी की नक्काशी वाले घर आज भी चंद राजाओं के वैभव और गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं।

अल्मोड़ा की सबसे बड़ी विशेषता इसका बौद्धिक और आध्यात्मिक परिवेश है। यहाँ की धरती ने स्वामी विवेकानंद जैसी महान विभूतियों को अपनी ओर आकर्षित किया, जिन्होंने यहाँ के कसार देवी क्षेत्र में ध्यान लगाकर असीम शांति प्राप्त की थी। कसार देवी के बारे में कहा जाता है कि यहाँ चुंबकीय शक्तियाँ कुछ इस तरह विद्यमान हैं कि यहाँ पहुँचते ही मन स्वतः ही ध्यानमग्न हो जाता है। 
इसके अलावा, जागेश्वर धाम के प्राचीन मंदिर समूह और चितई गोलू देवता का मंदिर यहाँ की आस्था के मुख्य स्तंभ हैं, जहाँ घंटियों की गूँज और भक्तों का विश्वास पूरे वातावरण को जीवंत बना देता है।
प्रकृति प्रेमियों के लिए अल्मोड़ा किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहाँ से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का जो भव्य दृश्य दिखाई देता है, वह किसी चित्रकार की कल्पना जैसा लगता है। नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचूली की धवल श्रेणियाँ सूरज की पहली किरण पड़ते ही सोने की तरह चमकने लगती हैं। यहाँ की बाल मिठाई और श्रृंगार का सामान पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, जो यहाँ के स्थानीय हुनर का प्रतीक है। 
अल्मोड़ा आज भी आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों को थामे हुए है, जहाँ लोकगीत, कुमाऊँनी भाषा और यहाँ का सादगी भरा जीवन हर आने वाले मुसाफिर का दिल जीत लेता है। वास्तव में, अल्मोड़ा एक ऐसी जगह है जहाँ पहुँचकर वक्त जैसे थम सा जाता है और रूह को एक नई ताजगी मिलती है।

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