उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आज से शुरू हो गया है। श्रद्धालु विभाग की आधिकारिक वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in तथा मोबाइल ऐप टूरिस्ट केयर उत्तराखंड के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि इस वर्ष चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होगी। इसी दिन यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को और बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। चारधाम यात्रा में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए भारतीय श्रद्धालु आधार कार्ड के माध्यम से जबकि विदेशी श्रद्धालुओं के लिए ई-मेल आईडी के जरिए पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जो श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण नहीं करा पाएंगे, उनके लिए ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध होगी। यह सुविधा 17 अप्रैल से शुरू की जाएगी। इसके लिए ऋषिकेश के ट्रांजिट कैंप, हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान और विकासनगर में विशेष पंजीकरण काउंटर स्थापित किए जाएंगे। प्रशा...
जानिए कैसे जोसेफ नाइसफोर निएप्स ने 1826 में इतिहास की पहली फोटो ली ( दुनिया की पहली फोटो ) 1826 की एक फ्रांस की दोपहर में, जोसेफ नाइसफोर निएप्स नाम के एक वैज्ञानिक ने इतिहास की पहली तस्वीर कैद की। उस वक्त कैमरे आज जैसे नहीं थे, बल्कि एक बड़ा लकड़ी का डिवाइस था जिसमें बिटुमेन नामक केमिकल लगी एक प्लेट थी। उन्होंने अपने घर की खिड़की से बाहर का दृश्य उस प्लेट पर कैमरा ऑब्स्क्यूरा की मदद से कैद किया। इस प्रक्रिया में सूरज की रोशनी लगभग 8 घंटे तक लगी रही। धीरे-धीरे एक धुंधली सी परछाई प्लेट पर उभरने लगी, जो दुनिया की पहली तस्वीर बनी। इसे “View from the Window at Le Gras” कहा जाता है। जोसेफ निएप्स को उस वक्त शायद पता नहीं था कि उनके इस छोटे प्रयोग से पूरी दुनिया की यादें कैद करने का रास्ता खुल जाएगा। इस तस्वीर ने फोटोग्राफी की नींव रखी, जो आगे चलकर मोबाइल कैमरे और डिजिटल
उत्तराखंड की सुरम्य वादियों में बसा कौसानी—जिसे कभी महात्मा गांधी ने “भारत का स्विट्ज़रलैंड” कहा था—आज भी उतनी ही शांति और सौंदर्य समेटे हुए खड़ा है। लेकिन इस पहाड़ी कस्बे का असली जादू उस पल से शुरू होता है, जब सुबह की ठंडी हवा अपना पहला स्पर्श देती है और हिमालय की चोटियों पर सूरज की हल्की-सी आहट दिखने लगती है। कौसानी का सूर्योदय केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि एक अनुभव है—एक ऐसी अनुभूति जिसे शब्दों में पूरा बाँधा नहीं जा सकता। मगर उस पल की सुंदरता को करीब से महसूस करने का प्रयास किया जा सकता है। पहाड़ों पर उगती रोशनी की पहली लहर सुबह के लगभग पाँच बजे जब आसमान अभी भी आधा नींद में होता है, पूरा कौसानी शांत और धीर-गंभीर दिखाई देता है। दूर से पक्षियों की हल्की चहचहाहट और चीड़ के पेड़ों से आती ओस की सुगंध मिलकर माहौल को और भी पवित्र बना देती है। फिर पूर्व की ओर हिमालय की बर्फीली चोटियाँ—त्रिशूल, नंदा देवी, और पंचाचूली—धीरे-धीरे गुलाबी और सुनहरी रंगत से रंगने लगती हैं। ऐसा लगता है मानो सूरज ने किसी अदृश्य तूलिका से इन पर्वतों को हल्के-हल्के चमकाना शुरू कर दिया हो। कुछ ही मिनटों में सूरज क्...
दिल्ली और गुरुग्राम से कुछ ही घंटों की दूरी पर बसा यह रिज़ॉर्ट परिवार, दोस्तों और बच्चों के लिए एक परफेक्ट वीकेंड डेस्टिनेशन है। यहाँ पहुँचते ही मिट्टी के घर, चरखी, बैलगाड़ी, ऊँट की सवारी और पारंपरिक हरियाणवी पोशाकों में सजे लोग आपका स्वागत करते हैं। Read Also: जोहरन ममदानी: टैक्सी ड्राइवर के बेटे से न्यूयॉर्क सिटी के मेयर तक रिज़ॉर्ट के भीतर हरियाणवी, पंजाबी और राजस्थानी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। गाँव की चौपाल जैसी जगहों पर लोकनृत्य, रस्साकशी, पिट्ठू, कबड्डी और अन्य देसी खेलों का मज़ा लिया जा सकता है। बच्चे मिट्टी के खिलौने बनाना, बायोगैस प्लांट देखना या बागवानी करना सीखते हैं — जो शहरी जीवन से एक ताज़गी भरा बदलाव लाता है। यहाँ का देसी खाना इसकी सबसे बड़ी पहचान है — सरसों का साग, मक्के की रोटी, दही, लस्सी, गुड़ और ताज़े देसी घी की महक हर किसी को गाँव के स्वाद
ग्रीस को दुनिया भर में उसके इतिहास और संस्कृति के लिए जाना जाता है, लेकिन एक और खास बात है जो इसे अलग बनाती है और वह है यहां रहने वाले लोगों की लंबी उम्र। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार ग्रीस में लगभग 3,100 ऐसे लोग हैं जिनकी उम्र 100 वर्ष या उससे अधिक है। इन्हें सेंटेनैरियन कहा जाता है। ग्रीस की कुल जनसंख्या के अनुपात में यह संख्या काफी प्रभावशाली मानी जाती है, खासकर तब जब यह देखा जाए कि इनमें से अधिकतर लोग आज भी अपेक्षाकृत सक्रिय जीवन जीते हैं। ग्रीस में लोगों की लंबी उम्र का सबसे बड़ा कारण उनकी पारंपरिक जीवनशैली मानी जाती है। यहां का भूमध्यसागरीय भोजन जिसमें जैतून का तेल, हरी सब्जियां, दालें, मछली और कम प्रोसेस किया हुआ खाना शामिल होता है, शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखता है। यह आहार दिल की बीमारियों, मधुमेह और अन्य गंभीर रोगों के खतरे को कम करता है, जिससे जीवन प्रत्याशा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। Read Also : बुजुर्गों के लिए चुनौतीपूर्ण AI भविष्य इसके साथ ही ग्रीस में जीवन की गति अपेक्षाकृत धीमी है। लोग कम तनाव में रहते हैं, रोज़मर्रा के कामों में स्वाभाविक रूप से शारीरिक ...
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