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भारत ने 24 घंटों के भीतर एआई रिस्पॉन्सिबिलिटी कैम्पेन के लिए सर्वाधिक प्रतिज्ञाएँ प्राप्त करने का खिताब हासिल कर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया। 16 से 17 फरवरी के बीच कुल 2,50,946 वैध प्रतिज्ञाएँ दर्ज की गईं थीं , जो प्रारंभिक 5,000 के लक्ष्य से कहीं अधिक हैं। यह केवल एक विश्व रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि एक युवा राष्ट्र की स्पष्ट मंशा की घोषणा है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता को नैतिक चेतना के साथ आकार देने का निर्णय ले रहा है।
गिनीज़ की मान्यता एक विशेष क्षण को चिह्नित करती है, किंतु उसके पीछे का संकल्प कहीं अधिक गहरा है। भारत अवसंरचना में निवेश कर रहा है, अनुसंधान को प्रोत्साहित कर रहा है, कौशल विकास की श्रृंखलाओं को सुदृढ़ बना रहा है और अपनी युवा पीढ़ी को उभरती प्रौद्योगिकी की नैतिक दिशा निर्धारित करने के लिए आमंत्रित कर रहा है। यह रिकॉर्ड भले ही 24 घंटों में स्थापित हुआ हो, परंतु यह जिस वचनबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है, वह पीढ़ियों तक कायम रहने वाली है।
युवाएआई फॉर ऑल नामक एक निःशुल्क राष्ट्रीय एआई साक्षरता पाठ्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है, जो ग्यारह भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। यह पाठ्यक्रम दीक्षा, आईगॉट कर्मयोगी और फ्यूचरस्किल्स प्राइम के माध्यम से उपलब्ध है तथा इसका उद्देश्य 1 करोड़ नागरिकों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आधारभूत दक्षता विकसित करना है। यह एक विशाल महत्वाकांक्षा है। इसका लक्ष्य ज्ञान का लोकतंत्रीकरण करना और शहरी-ग्रामीण के बीच अंतर को कम करना है। इस प्रयास के तहत एआई साक्षरता को उतना ही आवश्यक माना जा रहा है, जैसे कभी डिजिटल साक्षरता को माना गया था। गिनीज़ रिकॉर्ड अब इस व्यापक जन-आंदोलन का स्वाभाविक विस्तार प्रतीत होता है।
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