एआई के दुष्प्रभावों से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता
मिस्टर भारत चंदार, स्टैनफोर्ड डिजिटल इकोनॉमी लैब, ने कहा, “शोध के जरिए यह पता चलता है कि एआई जोखिम और एआई अपनाने के बीच क्या अंतर है? एआई के अधिक जोखिम वाले नौकरियों में युवा श्रमिकों के लिए रोजगार में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है, जबकि इसे फर्म-स्तर पर अपनाने से इसके मिश्रित प्रभाव दिखते हैं। यह अंतर कार्यकारी अपेक्षाओं, फर्म-स्तरीय एआई उपयोग तथा उत्पादकता पर बेहतर डेटा की आवश्यकता को रेखांकित करता है ताकि समझा जा सके कि भर्ती निर्णयों को एआई कैसा आकार दे रहा है?
सत्र ने रेखांकित किया कि एआई युग में श्रम बाजार के लचीलापन को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी अपनाने के बेहतर मापन, प्रत्याशित शासन तथा कौशल, सामाजिक सुरक्षा तथा संस्थागत क्षमता में समन्वित निवेशों की आवश्यकता होगी ताकि उत्पादकता लाभ लोगों के व्यापक आर्थिक तथा सामाजिक लाभों में परिवर्तित हों।
भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 का दूसरा दिन “एआई उपयोग पर वैश्विक संवाद – श्रम बाजार लचीलापन के लिए डेटा” सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपनाने की तेज गति के संदर्भ में रोजगार की बदलती प्रकृति और नौकरी परिदृश्यों पर केंद्रित रहा। सम्मेलन में इस संक्रमण के प्रबंधन के लिए आवश्यक नीति विकल्पों पर चर्चा हुई। उभरते अंतरराष्ट्रीय साक्ष्यों पर आधारित चर्चा में उम्र समूहों, क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों में भिन्न प्रभावों का उल्लेख किया गया, जिसमें प्रारंभिक रुझानों से उच्च एआई जोखिम वाले भूमिकाओं में युवा श्रमिकों पर रोजगार के दबाव का संकेत मिला।
पैनलिस्टों ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया के देशों में व्यापक और तुलनात्मक डेटा की कमी सरकारों की समय पर और लक्षित हस्तक्षेप डिजाइन करने की क्षमता को सीमित करती रहती है। इस चर्चा में पूर्ण जानकारी के अभाव में भी अनुकूली नीति ढांचों को आगे बढ़ाने, सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने तथा पुनर्कौशल विकास मार्गों का विस्तार करने के महत्व पर बल दिया गया। सेवा, कृषि तथा सार्वजनिक वितरण जैसे क्षेत्रों के लिए संदर्भ-विशिष्ट रणनीतियों की आवश्यकता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझी जानकारी को जरूरी बताया गया। सहमति इस बात पर जताई गई कि एआई अपनाने से समावेशी विकास होगा।

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