जबलपुर की जादूगरी: भेड़ाघाट की संगमरमर की चट्टानें और धुआंधार का शोर
प्रकृति ने अपनी फुर्सत के पलों में भारत के हृदय प्रदेश जबलपुर को एक अनमोल तोहफा दिया है जिसे दुनिया भेड़ाघाट के नाम से जानती है। यहाँ पहुँचते ही आँखों के सामने जो दृश्य उभरता है वह किसी सुंदर कविता जैसा प्रतीत होता है। नर्मदा नदी के शांत और गहरे पानी के बीच से सिर उठाए हुए सफेद धवल संगमरमर की ये ऊँची चट्टानें अपनी भव्यता की कहानी खुद बयां करती हैं।
जब सूरज की किरणें इन मखमली पत्थरों पर पड़ती हैं, तो पूरा परिदृश्य सोने की तरह चमक उठता है और शाम ढलते ही यही चट्टानें एक अलग ही रहस्यमयी शांति ओढ़ लेती हैं।
इन चट्टानों के बीच से नाव पर बैठकर गुजरना एक ऐसा अनुभव है जिसे शब्दों में पिरोना कठिन है। पानी की कल-कल ध्वनि और ऊँची दीवारों के बीच से गुजरता रास्ता आपको किसी दूसरी दुनिया में ले जाता है। यहाँ की 'बंदर कूदनी' जैसी जगहें यह बताती हैं कि प्रकृति ने यहाँ पत्थरों को कितना करीब लाकर खड़ा कर दिया है।
जैसे-जैसे नाव आगे बढ़ती है, नाविकों की दिलचस्प बातें और संगमरमर के अलग-अलग रंगों की छटा दिल जीत लेती है। विशेषकर पूर्णिमा की रात को यहाँ की खूबसूरती अपने चरम पर होती है, जब चाँद की दूधिया रोशनी इन सफेद चट्टानों से टकराकर पानी में चांदी बिखेर देती है।
भेड़ाघाट का यह सफर तब तक अधूरा रहता है जब तक आप धुआंधार जलप्रपात के गर्जन को महसूस नहीं कर लेते। यहाँ नर्मदा की धारा जब विशाल पत्थरों से नीचे गिरती है, तो पानी की बारीक फुहारें पूरे वातावरण को धुएं जैसा बना देती हैं, जिसे देखकर मन रोमांचित हो उठता है। यह स्थान केवल पत्थरों का जमावड़ा नहीं है, बल्कि यह बहते पानी और स्थिर चट्टानों के बीच सदियों से चली आ रही एक अनूठी जुगलबंदी है। जो कोई भी एक बार यहाँ की वादियों में आता है, वह अपनी रूह में इन यादों को हमेशा के लिए बसा कर ले जाता है।

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