भारत - संपूर्ण एआई जगत का मिलन स्थल बना

 

नई दिल्ली में फरवरी की एक सुहावनी सुबह में, भारत मंडपम के कांच का अग्रभाग केवल सूर्य की रोशनी को ही नहीं, बल्कि संभावनाओं को भी प्रतिबिंबित करता है। इसके भीतर, तेरह देशों के मंडप एक विशाल चाप में खड़े हैं, जिनमें से प्रत्येक अपने इरादे का प्रतीक है। ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और एक सामूहिक अफ्रीकी मंडप, सभी अपने विचारों, निवेशों और महत्वाकांक्षाओं के साथ यहां पहुंचे हैं। यही इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का मुख्य आकर्षण है। दुनिया सिर्फ इसमें भाग लेने नहीं आई है, बल्कि सहयोग करने आई है।

तेरह देशों के मंडप उन शब्दों को एक अलग रूप देते हैं। फ्रेंच पवेलियन, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और प्रधानमंत्री मोदी के दौरे पर, 29 कंपनियों ने फ्रांस की तकनीकी श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया। यह दौरा भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष की ऊर्जावान शुरुआत का प्रतीक है। राष्ट्रपति मैक्रॉन ने खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने वह हासिल किया है जो किसी अन्य देश ने नहीं किया है। 1.4 बिलियन लोगों की एक डिजिटल पहचान, हर महीने 20 अरब लेनदेन की एक भुगतान प्रणाली, एक स्वास्थ्य सुविधा को लेकर 500 मिलियन डिजिटल हेल्थ आईडी जारी करना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने श्रोताओं को याद दिलाया कि यह इंडिया स्टैक है। खुला, अंतरसंचालनीय और संप्रभु। उन्होंने कहा कि हम एक अभूतपूर्व गति के आरंभ में हैं।

कुछ ही कदम की दूरी पर, एस्टोनिया के पवेलियन में लगातार भीड़ उमड़ती है। अपने डिजिटल शासन मॉडल के लिए प्रसिद्ध एस्टोनिया को यहां काफी समर्थन मिलता है। राष्ट्रपति अलार कारिस का कहना है कि डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर अब केवल एक तकनीकी आधारशिला नहीं रह गई है। यह आधुनिक राज्यों के संचालन की नींव है। जब इन प्रणालियों में एआई को शामिल किया जाता है, तो एल्गोरिथम पारदर्शिता और मानवीय निगरानी सार्वजनिक विश्वास के लिए आवश्यक शर्तें बन जाती हैं। उनके शब्द नैतिकता और जवाबदेही पर होने वाली चर्चाओं में गूंजते हैं। यहां सहयोग केवल एक अमूर्त अवधारणा नहीं है, बल्कि यह एक ढांचागत अवधारणा है।

स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी का कहना है कि भारत दुनिया को एक महत्वपूर्ण सच्चाई दिखाता है। प्रौद्योगिकी को बड़े पैमाने पर विकसित किया जा सकता है और यह आम लोगों की मदद कर सकती है। स्लोवाकिया भले ही छोटा देश हो, लेकिन वह तेजी से प्रगति कर सकता है। वह व्यावहारिक परिणाम चाहता है। फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो शिखर सम्मेलन को समयोचित बताते हैं। उनका कहना है कि दुनिया को जिम्मेदार एआई के लिए साझा समझ, सामान्य नियमों और राजनीतिक इच्छाशक्ति की तत्काल आवश्यकता है। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन समावेशी संवाद और बहुपक्षीय सहयोग की बात करते हैं। उनका जोर है कि जिम्मेदार एआई नवाचार में बाधा नहीं डालता, बल्कि उसे बढ़ावा देता है। वे आगे कहते हैं कि भारत और स्विट्जरलैंड महत्वाकांक्षा और कार्यान्वयन के बीच एक सेतु का निर्माण कर रहे हैं।

ये सभी विचार सात विषयगत चक्रों में समाहित हैं जो एक्सपो को संगठित करते हैं: मानव पूंजी, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन, सुरक्षित और विश्वसनीय एआई, अनुकूलन, नवाचार और दक्षता, विज्ञान, एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण, आर्थिक विकास और सामाजिक हित के लिए एआई। ये चक्र लोग, धरती और प्रगति को ठोस कार्यक्षेत्रों में रूपांतरित करते हैं। प्रतिनिधिमंडल इनके बीच भ्रमण करते हैं और अनुसंधान प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और सार्वजनिक संस्थानों के बीच अंतर्संबंधों की पड़ताल करते हैं। चर्चाएं कंप्यूटिंग क्षमता से लेकर कक्षा के माध्यम से कौशल विकास तक, डेटा प्रबंधन से लेकर हरित ऊर्जा ग्रिड तक के विषयों पर केंद्रित होती हैं।

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