राजस्थान का जायका: जब जुबां पर घुले खस्ता "प्याजी कचोरी" का स्वाद
राजस्थान की गलियों में सुबह की शुरुआत अगर कड़क चाय और गरमा-गरम प्याजी कचोरी के साथ न हो, तो वह अधूरी सी लगती है। यह सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति और वहां के लोगों के खान-पान का एक गौरवशाली हिस्सा है।
कचोरी का इतिहास और पहचान:
प्याजी कचोरी की शुरुआत मुख्य रूप से राजस्थान के जोधपुर शहर से मानी जाती है। धीरे-धीरे यह पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध हो गई। इसकी खासियत है इसका कुरकुरा बाहरी हिस्सा (मैदा) और अंदर भरा हुआ चटपटा, मसालेदार प्याज का मसाला। जयपुर का रावत मिशठान भंडार तो अपनी इस कचोरी के लिए दुनियाभर में मशहूर है।
प्याजी कचोरी की शुरुआत मुख्य रूप से राजस्थान के जोधपुर शहर से मानी जाती है। धीरे-धीरे यह पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध हो गई। इसकी खासियत है इसका कुरकुरा बाहरी हिस्सा (मैदा) और अंदर भरा हुआ चटपटा, मसालेदार प्याज का मसाला। जयपुर का रावत मिशठान भंडार तो अपनी इस कचोरी के लिए दुनियाभर में मशहूर है।
राजस्थान में इसे अक्सर इमली की खट्टी-मीठी चटनी, तीखी हरी मिर्च और कभी-कभी कढ़ी के साथ भी परोसा जाता है।
अगर आप राजस्थान जा रहे हैं, तो जोधपुर और जयपुर की इन कचोरियों का स्वाद लेना न भूलें

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