गोंधल क्या है? मराठी परंपरा से ऑस्कर तक

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  Gondhal Oscar 2027: मराठी फिल्म ‘गोंधल’ के भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री बनने के बाद महाराष्ट्र की एक पारंपरिक लोक-विधि भी चर्चा में आ गई है। आखिर गोंधल क्या है और इस परंपरा का फिल्म से क्या संबंध है? आइए समझते हैं। गोंधल आखिर होता क्या है? महाराष्ट्र में गोंधल एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान और लोक-प्रस्तुति है, जिसमें भक्ति, संगीत, गायन और नृत्य का मेल देखने को मिलता है। यह परंपरा कुछ परिवारों में कुलदेवता की पूजा और शुभ अवसरों से जुड़ी रही है। महाराष्ट्र के मराठी विश्वकोश के अनुसार, गोंधल देवी की स्तुति और पूजा से जुड़ा एक कुलाचार है। गोंधल की प्रस्तुति करने वाले कलाकारों को गोंधली कहा जाता है। पारंपरिक प्रस्तुति में देवी-देवताओं की स्तुति, लोकगीत, वाद्य संगीत और नृत्य शामिल होते हैं। शादी जैसे शुभ अवसरों पर भी होती है यह परंपरा गोंधल का संबंध महाराष्ट्र के कुछ परिवारों में विवाह और दूसरे मंगल अवसरों से रहा है। महाराष्ट्र सरकार के गजेटियर में भी इसका उल्लेख मिलता है कि शुभ अवसर के बाद देवी की पूजा और स्तुति के लिए गोंधल की प्रस्तुति की जाती थी। इस दौरान रात में संगीत और नृत्य ...

ताजनगरी में कला और संस्कृति का महाकुंभ: ताज महोत्सव 2026

 


आगरा की ऐतिहासिक धरती एक बार फिर भारतीय विरासत के रंगों में सराबोर होने के लिए तैयार है क्योंकि आगामी 18 फरवरी 2026 से विश्व प्रसिद्ध ताज महोत्सव का शानदार आगाज होने जा रहा है। प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी 10 दिनों तक चलने वाला यह सांस्कृतिक उत्सव 27 फरवरी तक जारी रहेगा, जिसमें देश के कोने-कोने से आए शिल्पकार अपनी बेजोड़ कला का प्रदर्शन करेंगे। 

इस वर्ष महोत्सव के आयोजन स्थल में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है; पारंपरिक शिल्पग्राम के स्थान पर अब यह मेला फतेहाबाद रोड स्थित 'आई लव आगरा' सेल्फी पॉइंट के पास खुले मैदान में आयोजित किया जा रहा है।

महोत्सव का मुख्य आकर्षण यहाँ का शिल्प बाजार है जहाँ कश्मीर के पश्मीना शॉल से लेकर दक्षिण भारत के सिल्क और उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध जरदोजी के काम तक, सब कुछ एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगा। हर शाम मुक्ताकाशीय मंच पर देश के नामचीन कलाकार और लोक संगीत की टोलियां अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी। इसके अलावा, खाने के शौकीनों के लिए मुगलाई और क्षेत्रीय व्यंजनों का एक विशाल फूड कोर्ट भी सजाया गया है। 
प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक चलने वाले इस महोत्सव में पर्यटकों की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन और उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

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