गोंधल क्या है? मराठी परंपरा से ऑस्कर तक

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  Gondhal Oscar 2027: मराठी फिल्म ‘गोंधल’ के भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री बनने के बाद महाराष्ट्र की एक पारंपरिक लोक-विधि भी चर्चा में आ गई है। आखिर गोंधल क्या है और इस परंपरा का फिल्म से क्या संबंध है? आइए समझते हैं। गोंधल आखिर होता क्या है? महाराष्ट्र में गोंधल एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान और लोक-प्रस्तुति है, जिसमें भक्ति, संगीत, गायन और नृत्य का मेल देखने को मिलता है। यह परंपरा कुछ परिवारों में कुलदेवता की पूजा और शुभ अवसरों से जुड़ी रही है। महाराष्ट्र के मराठी विश्वकोश के अनुसार, गोंधल देवी की स्तुति और पूजा से जुड़ा एक कुलाचार है। गोंधल की प्रस्तुति करने वाले कलाकारों को गोंधली कहा जाता है। पारंपरिक प्रस्तुति में देवी-देवताओं की स्तुति, लोकगीत, वाद्य संगीत और नृत्य शामिल होते हैं। शादी जैसे शुभ अवसरों पर भी होती है यह परंपरा गोंधल का संबंध महाराष्ट्र के कुछ परिवारों में विवाह और दूसरे मंगल अवसरों से रहा है। महाराष्ट्र सरकार के गजेटियर में भी इसका उल्लेख मिलता है कि शुभ अवसर के बाद देवी की पूजा और स्तुति के लिए गोंधल की प्रस्तुति की जाती थी। इस दौरान रात में संगीत और नृत्य ...

मेहताब बाग: ताजमहल की रोशनी में नहाया एक मुगल स्वप्न

 



आगरा के ऐतिहासिक सौंदर्य को एक नई दृष्टि से देखने के लिए जब यमुना के शांत किनारों की ओर कदम बढ़ते हैं, तो सामने उभरकर आता है मेहताब बाग—एक ऐसी जगह जहाँ प्रकृति, इतिहास और प्रेम का संगम अद्भुत रूप से दिखाई देता है। ताजमहल की विपरीत दिशा में स्थित यह मुगल बाग ऐसा प्रतीत होता है मानो इसे विशेष रूप से इस अद्भुत संगमरमर की इमारत को निहारने के लिए ही बनाया गया हो। हल्की हवा में हिलते पेड़, दूर से चमकता ताज और बाग के बीचोंबीच फैला हरापन मिलकर आगरा की शामों को और भी मनमोहक बना देते हैं।

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मुगल बादशाह शाहजहाँ ने इस बाग को ताजमहल की सुंदरता को और आकर्षक बनाने के उद्देश्य से बनवाया था। कहा जाता है कि यह वही स्थान था जहाँ बैठकर वे ताज को डूबते सूरज के साथ सुनहरी आभा में नहाते देखते थे। बाग का चारबाग शैली में बँटा हुआ सुगठित नक्शा मुगल बागवानी की उत्कृष्ट कलाकारी का उदाहरण है। यहाँ की क्यारियों और पानी की नहरों के अवशेष बताते हैं कि कभी यह स्थान सुगंधित फूलों और बहते पानी से भरपूर रहा होगा।

आज भी जब कोई यहाँ खड़ा होता है तो उसे यमुना की शांत धारा और ताजमहल का शांत, दिव्य प्रतिबिंब मन को एक अनकही शांति प्रदान करता है। दूर से आती पक्षियों की आवाजें, हवा में फैली मिट्टी की सुगंध और ताज के पार फैलता आसमान मेहताब बाग को एक रहस्यमयी सौंदर्य का रूप देते हैं। यहाँ का सूर्योदय और सूर्यास्त पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण है, क्योंकि इसी समय ताजमहल अपने रंग बदलते हुए एक अद्भुत चित्र की तरह दिखता है।

मेहताब बाग न केवल इतिहास और स्थापत्य का प्रतीक है, बल्कि यह प्रेम, शांति और सुकून का भी स्थान है। यहाँ आकर ऐसा लगता है जैसे समय ठहर गया हो और आसपास केवल वही सुंदरता बची हो जिसने ताजमहल को विश्व का अद्भुत आश्चर्य बनाया। यह स्थल आगरा का एक ऐसा मोती है जिसे देखने के बाद ताजमहल की भव्यता और भी अधिक जीवंत और प्रभावशाली लगने लगती है।

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