सिंधी स्वाद की शान: दाल पकवान (Dal Pakwan Recipe & Story)

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अगर आप खाने-पीने के शौकीन हैं और सुबह के नाश्ते में कुछ ऐसा ढूंढ रहे हैं जो पेट भी भरे और दिल को भी खुश कर दे, तो आपको सिंधी दाल पकवान जरूर आजमाना चाहिए। यह सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि सिंधी संस्कृति की पहचान और स्वाद का एक अनोखा जादू है।करारे, क्रिस्पी पकवान के ऊपर जब गर्मा-गर्म मसालेदार चना दाल और तीखी-मीठी चटनियों का मेल होता है, तो मुंह में स्वादों का एक विस्फोट सा होता है। आइए जानते हैं कि यह डिश इतनी खास क्यों है और आप इसे घर पर कैसे आसानी से बना सकते हैं। क्यों खास है दाल पकवान? इस व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका टेक्सचर (Texture) है। एक तरफ होती है एकदम घुली हुई, गाढ़ी और खुशबूदार चना दाल, और दूसरी तरफ मैदा और अजवाइन से बना बेहद खस्ता और कुरकुरा पकवान। जब इन दोनों को मिलाकर खाया जाता है, तो क्रंच और सॉफ्टनेस का जो तालमेल बैठता है, उसका कोई मुकाबला नहीं है।दाल पकवान खाने का असली मजा चम्मच से नहीं, बल्कि हाथों से है। पकवान का एक टुकड़ा तोड़िए, उससे थोड़ी सी दाल और प्याज उठाइए और सीधे मुंह में! संडे की सुस्त सुबह को मजेदार बनाने के लिए इससे बेहतर नाश्ता कोई और हो ही नहीं सकता।

UPI के 10 साल: एक छोटे से QR कोड ने बदल दी भारत की भुगतान व्यवस्था, अब 11 देशों तक पहुंचा डिजिटल पेमेंट का जादू

 

कभी जेब में नकदी रखना और छोटे-बड़े लेनदेन के लिए बैंक के चक्कर लगाना आम बात थी। लेकिन आज एक स्मार्टफोन और QR कोड की मदद से चाय की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक भुगतान करना बेहद आसान हो गया है। भारत की इस डिजिटल क्रांति के केंद्र में है यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), जिसने न केवल देश में पैसे के लेनदेन का तरीका बदला है, बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना ली है।

भारत में डिजिटल भुगतान की कहानी पिछले एक दशक में जिस तेजी से बदली है, वह किसी बड़े आर्थिक और तकनीकी बदलाव से कम नहीं है। इस बदलाव का सबसे बड़ा चेहरा UPI बनकर उभरा है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित इस प्रणाली ने बैंकिंग और भुगतान को आम लोगों के लिए पहले से कहीं ज्यादा आसान, तेज और सुलभ बना दिया है।

आज UPI का इस्तेमाल केवल बड़े शहरों या ऑनलाइन खरीदारी तक सीमित नहीं है। छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान, नौकरीपेशा लोग और कारोबारी भी रोजमर्रा के लेनदेन के लिए इस पर निर्भर हैं। भारत में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद अब UPI दूसरे देशों में भी विस्तार कर रहा है। ग्रीस और मालदीव जैसे देशों में इसकी शुरुआत ने भारतीय डिजिटल भुगतान व्यवस्था को वैश्विक पहचान दिलाई है।

आखिर क्या है UPI और कैसे करता है काम?

UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस एक रियल टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसे NPCI ने विकसित किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए एक ही मोबाइल एप्लिकेशन पर अलग-अलग बैंक खातों को जोड़ा जा सकता है।

इसका मतलब है कि पैसे भेजने या प्राप्त करने के लिए हर बार बैंक की शाखा जाने, खाता संख्या याद रखने या लंबी बैंकिंग प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होती। मोबाइल नंबर, UPI ID या QR कोड के जरिए कुछ ही सेकंड में भुगतान किया जा सकता है।

UPI की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली भुगतान सुविधा है। बैंकिंग अवकाश हो या रात का समय, इसके जरिए किसी भी समय लेनदेन किया जा सकता है। एक ही ऐप में कई बैंक खाते जोड़ने, तुरंत पैसे ट्रांसफर करने और दुकानों पर QR कोड स्कैन करके भुगतान करने जैसी सुविधाओं ने इसे बेहद लोकप्रिय बनाया है। लेनदेन की सुरक्षा के लिए इसमें पिन आधारित प्रमाणीकरण और अन्य सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं।

2016 में हुई शुरुआत, फिर बदलता चला गया डिजिटल भुगतान का चेहरा

UPI की शुरुआत अप्रैल 2016 में 21 सदस्य बैंकों के साथ पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। अगस्त 2016 में इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध करा दिया गया। शुरुआत में इसका इस्तेमाल सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे बैंकों, भुगतान ऐप और व्यापारियों की भागीदारी बढ़ती गई।

दिसंबर 2016 में BHIM ऐप लॉन्च किया गया। इस ऐप ने आम नागरिकों को सीधे बैंक खाते से डिजिटल भुगतान करने का एक सरल माध्यम उपलब्ध कराया।

इसके बाद UPI में लगातार नए फीचर जुड़ते गए और इसकी उपयोगिता बढ़ती चली गई।

UPI के विकास की पूरी कहानी: 2017 से 2025 तक

2017: QR कोड से आसान हुआ दुकानों पर भुगतान

2017 में डायनामिक QR कोड की सुविधा शुरू की गई। इसके जरिए दुकानदार ग्राहकों को ऐसा QR कोड उपलब्ध करा सकते थे, जिसमें भुगतान से जुड़ी जानकारी और सही रकम पहले से मौजूद होती थी। इससे गलत राशि दर्ज करने की संभावना कम हुई और भुगतान की प्रक्रिया आसान बनी।

2018: UPI 2.0 ने जोड़े नए फीचर

अगस्त 2018 में UPI 2.0 पेश किया गया। इसके तहत इनबॉक्स में इनवॉइस देखने, हस्ताक्षरित QR कोड और पेमेंट इंटेंट, आवर्ती भुगतान के लिए UPI मैंडेट तथा ओवरड्राफ्ट बैंक खाते को UPI से जोड़ने जैसी सुविधाएं शामिल की गईं। इन बदलावों का मकसद डिजिटल लेनदेन को ज्यादा सुविधाजनक और सुरक्षित बनाना था।

2019: एक महीने में एक अरब लेनदेन का आंकड़ा पार

UPI के लिए 2019 एक महत्वपूर्ण साल रहा। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने रिटेल निवेशकों को IPO के लिए आवेदन करते समय भुगतान के विकल्प के रूप में UPI का इस्तेमाल करने की अनुमति दी।

अक्टूबर 2019 में UPI ने एक महीने में एक अरब यानी 100 करोड़ लेनदेन का आंकड़ा पार कर लिया। यह इस बात का संकेत था कि डिजिटल भुगतान अब आम भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।

2020 से 2022: छोटे भुगतान से लेकर फीचर फोन तक पहुंचा UPI

इस अवधि में UPI के विस्तार ने नई रफ्तार पकड़ी। UPI AutoPay की शुरुआत हुई, जिससे बिजली-पानी के बिल, बीमा प्रीमियम, सब्सक्रिप्शन, SIP और EMI जैसे नियमित भुगतानों को ऑटोमेट करना संभव हुआ।

फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए UPI 123Pay पेश किया गया। इसकी मदद से बिना स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन के भी कई तरीकों से डिजिटल भुगतान किया जा सकता है।

इसके अलावा UPI Lite की शुरुआत हुई, जिससे छोटे मूल्य के भुगतान को तेजी से और हर बार UPI PIN डाले बिना पूरा करना संभव हुआ। क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने की सुविधा ने भी डिजिटल भुगतान के विकल्पों का विस्तार किया।

वित्त वर्ष 2021-22 में UPI ने एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक के लेनदेन को प्रोसेस किया। मार्च 2022 में इसके मासिक लेनदेन की संख्या पांच अरब यानी 500 करोड़ के पार पहुंच गई।

इसी दौरान भूटान में UPI की शुरुआत हुई, जो इसके अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

2023: बैंक क्रेडिट की सुविधा से बढ़ा दायरा

2023 में UPI पर क्रेडिट लाइन की सुविधा शुरू की गई। इसके तहत बैंक द्वारा पहले से स्वीकृत क्रेडिट लाइन को UPI से जोड़कर भुगतान किया जा सकता है।

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के कुल डिजिटल भुगतान लेनदेन में UPI की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह आंकड़ा बताता है कि देश में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में UPI कितनी मजबूत जगह बना चुका है।

2024: UPI Circle और बढ़ी हुई भुगतान सीमा

2024 में UPI Circle की शुरुआत हुई। इस सुविधा के तहत प्राथमिक उपयोगकर्ता अपने बैंक खाते से जुड़े लेनदेन के लिए दूसरे उपयोगकर्ताओं को निर्धारित सीमाओं के भीतर भुगतान करने की अनुमति दे सकता है।

इसी साल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कर भुगतान के लिए UPI की प्रति लेनदेन सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी।

इसके अलावा UPI 123Pay की सीमा बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति लेनदेन और UPI Lite वॉलेट की सीमा बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दी गई। UPI Lite में प्रति लेनदेन की सीमा भी बढ़ाकर 1,000 रुपये की गई।

2025: फिंगरप्रिंट और फेस अनलॉक से भुगतान की नई सुविधा

2025 में UPI के लिए ऑन-डिवाइस प्रमाणीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। इसके तहत स्मार्टफोन के फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक जैसी सुविधाओं के जरिए भुगतान को अधिक सुविधाजनक बनाने की पहल हुई।

आधार आधारित चेहरे के प्रमाणीकरण ने भी डिजिटल भुगतान को आसान बनाने की संभावनाएं बढ़ाईं। विशेष रूप से बुजुर्गों और पहली बार डिजिटल भुगतान करने वाले लोगों के लिए ऐसी सुविधाएं उपयोगी साबित हो सकती हैं।

आज UPI का कितना बड़ा हो चुका है नेटवर्क?

UPI की सफलता को समझने के लिए इसके आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। जिस भुगतान प्रणाली की शुरुआत 2016 में महज 21 बैंकों के साथ हुई थी, वह आज भारत के डिजिटल वित्तीय ढांचे का एक प्रमुख हिस्सा बन चुकी है।

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच UPI के वार्षिक लेनदेन की संख्या लगभग दो करोड़ से बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई। यानी इसमें करीब 12,000 गुना वृद्धि दर्ज की गई।

इसी अवधि में लेनदेन का वार्षिक मूल्य लगभग 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी है।

जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, UPI नेटवर्क में 741 बैंक सक्रिय थे। इसी महीने इसके माध्यम से 2,365.8 करोड़ लेनदेन किए गए, जिनका कुल मूल्य 29.87 लाख करोड़ रुपये रहा।

ये आंकड़े बताते हैं कि UPI अब केवल भुगतान का एक विकल्प नहीं, बल्कि देश की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

भारत से दुनिया तक पहुंचा UPI, 11 देशों में बनी पहचान

UPI की कहानी अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मौजूदगी मजबूत की है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की जून 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट 'Growing Retail Digital Payments: The Value of Interoperability' के मुताबिक, 2024 में वैश्विक रियल टाइम भुगतान लेनदेन की मात्रा में UPI की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत थी।

यह उपलब्धि बताती है कि भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली दुनिया के अग्रणी रियल टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म में शामिल हो चुकी है।

फिलहाल UPI की स्वीकृति और सीमा पार भुगतान की सुविधा कई देशों में उपलब्ध है। इनमें भूटान, नेपाल, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस और कतर शामिल हैं।

इसके अलावा 2026 में इसके अंतरराष्ट्रीय विस्तार से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए।

जून 2026 में NPCI International Payments Limited (NIPL) ने कंबोडिया में UPI सुविधा शुरू करने के लिए ACLEDA Bank PLC के साथ साझेदारी की।

इसी महीने ग्रीस में यूरोबैंक के माध्यम से भारत और ग्रीस के बीच पात्र ग्राहकों के लिए सीमा पार धन हस्तांतरण की सुविधा शुरू हुई। इसके जरिए दोनों देशों के बीच तत्काल और सुरक्षित तरीके से पैसे भेजना संभव हुआ।

30 जुलाई 2026 को मालदीव की इंस्टेंट पेमेंट प्रणाली Favara और भारत के UPI के बीच सीमा पार धन हस्तांतरण शुरू किया गया। इसे भारत और मालदीव के बीच डिजिटल वित्तीय कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इन पहलों के बाद UPI की पहुंच और स्वीकार्यता 11 देशों तक हो गई है। इससे विदेश जाने वाले भारतीयों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और दोनों देशों के बीच वित्तीय लेनदेन को नई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

UPI की सफलता के पीछे क्या है सबसे बड़ी वजह?

UPI की लोकप्रियता के पीछे सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि इसकी सरलता और व्यापक पहुंच भी है।

पहले डिजिटल भुगतान के लिए कई बार अलग-अलग बैंकिंग ऐप, कार्ड या भुगतान माध्यमों की जरूरत पड़ती थी। UPI ने इन प्रक्रियाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर आसान बना दिया।

इसका QR कोड आधारित भुगतान मॉडल छोटे व्यापारियों के लिए भी काफी उपयोगी साबित हुआ। अब किसी छोटे दुकानदार को कार्ड स्वाइप मशीन रखने की जरूरत नहीं होती। एक QR कोड के जरिए वह ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकता है।

इसके साथ ही, सरकार की डिजिटल इंडिया पहल, सस्ते इंटरनेट की उपलब्धता, स्मार्टफोन का बढ़ता इस्तेमाल और बैंकिंग सेवाओं का विस्तार भी UPI की सफलता में अहम रहे हैं।

आगे क्या है UPI का भविष्य?

UPI का अगला चरण केवल देश के भीतर भुगतान को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसका अंतरराष्ट्रीय विस्तार, नई तकनीकों का इस्तेमाल और अलग-अलग वित्तीय सेवाओं के साथ एकीकरण भविष्य की दिशा तय करेंगे।

विशेष रूप से विदेशों में UPI की स्वीकार्यता बढ़ने से भारतीय पर्यटकों और कारोबारियों को सुविधा मिल सकती है। वहीं सीमा पार धन हस्तांतरण की व्यवस्था से भारत और दूसरे देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है।

हालांकि, इसके साथ साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल साक्षरता जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। ऐसे में UPI के आगे के विकास के लिए तकनीकी नवाचार के साथ उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के प्रति जागरूक करना भी जरूरी होगा।

निष्कर्ष: एक दशक में बदल गई पैसे के लेनदेन की परिभाषा

2016 में 21 बैंकों से शुरू हुआ UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। चाय की दुकान पर भुगतान करने से लेकर बड़े वित्तीय लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण तक, इसने डिजिटल भुगतान की संभावनाओं को काफी आगे बढ़ाया है।

इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने डिजिटल भुगतान को केवल तकनीकी रूप से उन्नत नहीं बनाया, बल्कि आम आदमी के लिए भी सुलभ कर दिया।

11 देशों तक पहुंच और लगातार बढ़ते लेनदेन के आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि UPI अब सिर्फ भारत की भुगतान प्रणाली नहीं, बल्कि वैश्विक डिजिटल वित्तीय व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका का प्रतीक भी बन चुका है।

एक दशक पहले जिस तकनीक को भविष्य का भुगतान माध्यम माना जा रहा था, आज वही तकनीक भारत के करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है।

स्रोत: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)।

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