मुन्नार के प्राकृतिक दृश्यों के लिए एक दिन की यात्रा : मेरी अनुभव यात्रा
सुबह-सुबह मुन्नार के हरे-भरे पहाड़ों में कदम रखते ही ताजी हवा ने मुझे स्वागत किया। हरियाली इतनी घनी थी कि चारों ओर बस प्रकृति ही नजर आती थी। छोटे-छोटे रास्तों से चलते हुए मुझे लगता था कि जैसे मैं किसी पेंटिंग के बीच में खड़ा हूँ। हल्की धुंध ने पहाड़ों की चोटियों को और भी जादुई बना दिया था। सुबह की सैर के बाद, मैंने दोपहर का भोजन किया। स्थानीय होटल में छुआ हुआ मसालेदार करी और ताजी चाय का स्वाद अद्भुत था। भोजन के बाद, मैंने एराविकुलम वन्य जीवन अभयारण्य की ओर रुख किया। यह अभयारण्य न केवल नीलगिरी ताहर जैसे दुर्लभ जानवरों का घर है, बल्कि यहां के पेड़-पौधे और हरियाली भी मनमोहक हैं। मैंने दूरबीन से हिरण और पक्षियों को देखा और महसूस किया कि प्रकृति कितनी जटिल और सुंदर है। इसके बाद मैं मट्टुपेट्टी डैम पहुँचा। डैम के सामने खड़े होकर मैं पानी की शांति और पहाड़ों की ऊँचाई का अनुभव कर सकता था। मुझे जानकारी मिली कि यह डैम 1949 में बनना शुरू हुआ था और 1953 में जनता के लिए खोला गया। पानी के प्रतिबिंब में सूर्य की रोशनी की झिलमिलाहट ने दृश्य को और भी आकर्षक बना दिया। मैं कुछ मिनट वहीं बैठा रहा, शांत ...