पुरुषोत्तम मास 2026: जानिए क्यों खास है यह त्रिवर्षीय पावन महीना और क्या है इसका आध्यात्मिक महत्व
सनातन धर्म में समय की गणना और त्योहारों का आधार केवल कैलेंडर नहीं, बल्कि ग्रहों और नक्षत्रों की चाल पर टिका है। इसी गणना के क्रम में हर तीन साल के अंतराल पर एक ऐसा महीना आता है, जिसे हम पुरुषोत्तम मास, मलमास या अधिकमास के नाम से जानते हैं। इस वर्ष यह पवित्र महीना 17 तारीख से शुरू हो रहा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं और सनातन संस्कृति में अगाध श्रद्धा देखी जा रही है। भारतीय ज्योतिष और पंचांग के अनुसार सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच के अंतर को पाटने के लिए इस अतिरिक्त महीने का सृजन किया गया है। चूंकि इस महीने में सूर्य की संक्रांति यानी सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं होता, इसलिए प्राचीन काल में इसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित मानकर 'मलमास' कह दिया गया था। हर तरफ से उपेक्षित होने के कारण इस महीने ने स्वयं भगवान विष्णु की शरण ली, जिसके बाद सृष्टि के पालनहार ने इसे अपना सर्वश्रेष्ठ नाम 'पुरुषोत्तम' प्रदान किया। भगवान के वरदान के कारण ही इस महीने का महत्व अन्य सभी महीनों से कहीं अधिक बढ़ गया।
धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से पुरुषोत्तम मास को आत्म-मंथन और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का समय माना गया है। इस पूरे महीने में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नए व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य भले ही वर्जित होते हैं, लेकिन जप, तप, दान और ध्यान के लिए इसे सर्वोत्तम काल माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में की गई सामान्य पूजा का फल भी अन्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इस महीने में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और भगवान कृष्ण की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदियों में स्नान करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दीपदान व अन्नदान करना इंसानी जीवन के विकारों को दूर करता है। यह समय सांसारिक भागदौड़ और भौतिक सुखों से थोड़ा दूर हटकर अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक दिव्य अवसर है।
वैज्ञानिक और मानसिक दृष्टिकोण से भी देखें तो यह महीना एक 'डिटॉक्स' की तरह काम करता है। बदलते मौसम के बीच इस महीने में सात्विक भोजन, उपवास और शांत जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है, जो हमारे शरीर और मस्तिष्क दोनों को नई ऊर्जा से भर देती है। 'बोलती कलम' के माध्यम से हम यही संदेश देना चाहते हैं कि पुरुषोत्तम मास केवल कर्मकांडों का महीना नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर छुपे अहंकार, क्रोध और लालच के 'मल' को साफ करके खुद को पुरुषोत्तम यानी पुरुषों में उत्तम बनाने का एक आध्यात्मिक मार्ग है। आइए, इस 17 तारीख से शुरू हो रहे पावन अवसर पर हम सब अपने व्यस्त जीवन से कुछ पल निकालकर भक्ति और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ें।

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