गुलाबी नगरी जयपुर: राजा-महाराजाओं के इतिहास और भव्य महलों का सफर
भारत के राजस्थान राज्य की शान और उसकी राजधानी जयपुर को पूरी दुनिया में "पिंक सिटी" यानी गुलाबी नगरी के नाम से जाना जाता है। अपनी अनोखी वास्तुकला, गगनचुंबी किलों, भव्य महलों और जीवंत सांस्कृतिक रंगों से सराबोर यह शहर हर साल देश-विदेश के लाखों सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। दिल्ली और आगरा के साथ मिलकर यह शहर भारत का प्रसिद्ध 'गोल्डन ट्रायंगल' (सैलानी त्रिकोण) बनाता है, जो विदेशी पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। जयपुर सिर्फ एक आधुनिक शहर नहीं है, बल्कि यह अपने अंदर सदियों पुराना गौरवशाली इतिहास और राजा-महाराजाओं की शाही जीवनशैली को समेटे हुए है।
इस ऐतिहासिक शहर की स्थापना १८ नवंबर १७२७ को आमेर के दूरदर्शी महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने की थी। जयपुर की सबसे खास बात यह है कि यह भारत का पहला योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया शहर था, जिसे प्रसिद्ध वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य ने वैदिक सिद्धांतों और वास्तुशास्त्र के आधार पर डिज़ाइन किया था। साल १८७६ में जब वेल्स के राजकुमार प्रिंस अल्बर्ट भारत आए, तो उनके स्वागत और सम्मान में महाराजा सवाई राम सिंह ने पूरे शहर की इमारतों को एक पारंपरिक टेराकोटा गुलाबी रंग में रंगवा दिया था। तब से इस शहर की यह अनूठी पहचान बन गई और आज भी जयपुर के पुराने हिस्से यानी वाल्ड सिटी की सभी इमारतें इसी रंग में नजर आती हैं, जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा भी मिला हुआ है।
जयपुर की सैर करते समय यहाँ की ऐतिहासिक इमारतें आपका मन मोह लेती हैं। शहर के बीचों-बीच स्थित हवा महल अपनी ९५३ बेहद खूबसूरत छोटी खिड़कियों यानी झरोखों के साथ वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना पेश करता है, जिसे शाही महिलाओं के लिए बनवाया गया था ताकि वे बिना किसी की नजर में आए सड़क के उत्सवों को देख सकें।
इसी के पास स्थित सिटी पैलेस आज भी शाही परिवार का निवास स्थान है, जिसके एक बड़े हिस्से को संग्रहालय में बदल दिया गया है जहाँ राजाओं के वस्त्र और हथियार देखे जा सकते हैं। विज्ञान और खगोलशास्त्र में रुचि रखने वालों के लिए महाराजा जय सिंह द्वारा निर्मित जंतर-मंतर वेधशाला एक अद्भुत जगह है, जहाँ दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की धूपघड़ी मौजूद है।
जब आप शहर की हलचल से थोड़ा दूर पहाड़ियों की तरफ बढ़ते हैं, तो आमेर का किला अपनी भव्यता से आपका स्वागत करता है। ऊंचे पहाड़ पर स्थित इस विशाल किले के भीतर बना 'शीश महल' अपनी कांच की नक्काशी के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, जहाँ सिर्फ एक मोमबत्ती की रोशनी भी पूरे महल को तारों की तरह चमका देती है।
इसके अलावा नाहरगढ़ और जयगढ़ के किले शहर को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देने वाले सूर्यास्त के नजारे दिखाते हैं। वहीं मानसागर झील के शांत पानी के बीचों-बीच बना जल महल ऐसा प्रतीत होता है मानो पानी पर तैर रहा हो, जो शाम के समय रोशनी से नहाकर बेहद जादुई लगता है।
घूमने के साथ-साथ जयपुर अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, कपड़ों और लजीज खानपान के लिए भी जाना जाता है। यहाँ के जौहरी बाजार, बापू बाजार और त्रिपोलिया बाजार से सैलानी अक्सर मशहूर कुंदन ज्वेलरी, लाख की रंग-बिरंगी चूड़ियां, बांधनी साड़ियां और जयपुरी रजाइयां खरीदना पसंद करते हैं। इसके अलावा जयपुर का सफर यहाँ के पारंपरिक स्वाद जैसे दाल-बाटी-चूरमा, प्याज की कचौरी और घेवर का आनंद लिए बिना अधूरा माना जाता है।
इस गुलाबी नगरी का दौरा करने के लिए अक्टूबर से मार्च के बीच का समय सबसे बेहतरीन होता है क्योंकि इस दौरान मौसम बेहद सुहावना रहता है। जयपुर की यह रंगीन संस्कृति और यहाँ के लोगों की मेहमाननवाज़ी हर किसी के दिल में हमेशा के लिए एक अमिट छाप छोड़ जाती है।

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