फोन पर वीडियो देखने का नशा: कितना खतरनाक है?

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  सुबह आंख खुलते ही फोन पर वीडियो देखना, खाना खाते समय रील्स चलाना, खाली समय में लगातार शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करना और रात को सोने से पहले “बस एक वीडियो और” कहना—आज यह आदत बहुत सामान्य हो गई है। वीडियो देखना अपने आप में नुकसानदायक नहीं है। फोन से मनोरंजन के साथ-साथ पढ़ाई, समाचार और जानकारी भी मिलती है। समस्या तब शुरू होती है जब वीडियो देखने का समय हमारे नियंत्रण से बाहर होने लगे और जरूरी काम, नींद, पढ़ाई, नौकरी या परिवार के साथ बिताया समय पीछे छूटने लगे। यही वजह है कि फोन पर वीडियो देखने की आदत कब सामान्य मनोरंजन से आगे बढ़ जाती है और कब चिंता का कारण बन सकती है, इसे समझना जरूरी है। क्या फोन पर वीडियो देखना सच में “नशा” है? बोलचाल की भाषा में लोग किसी ऐसी आदत को “नशा” कह देते हैं जिसे छोड़ना मुश्किल महसूस हो। लेकिन हर व्यक्ति जो लंबे समय तक वीडियो देखता है, उसे चिकित्सकीय रूप से “आदी” कहना सही नहीं होगा। असल चिंता तब होती है जब व्यक्ति वीडियो देखने पर नियंत्रण नहीं रख पाता, दूसरी जरूरी गतिविधियों पर उसका असर पड़ने लगता है और नुकसान दिखाई देने के बावजूद वह अपनी आदत को कम नहीं कर पाता।...

नीलगिरि की रानी: ऊटी की एक हसीन यात्रा

 


दक्षिण भारत के तमिलनाडु में बसा ऊटी (उदगमंडलम) एक ऐसा खूबसूरत हिल स्टेशन है जो अपनी मखमली हरी वादियों, चाय के बागानों और सदाबहार मौसम के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से 2,240 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान हर उस मुसाफिर को अपनी ओर खींचता है जो प्रकृति की गोद में कुछ पल सुकून के बिताना चाहता है। नीलगिरि पहाड़ियों के बीच बसे इस शहर में कदम रखते ही ठंडी हवा के झोंके और चाय की पत्तियों की भीनी-भीनी खुशबू आपका स्वागत करती है। 
यहां की टॉय ट्रेन यात्रा आपको बीते ज़माने के रोमांस और पहाड़ों के जादुई दृश्यों से रूबरू कराती है, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है।
ऊटी का दिल कही जाने वाली कृत्रिम झील में बोटिंग का आनंद लेना हो या डोड्डाबेट्टी चोटी से घाटी का विहंगम नज़ारा देखना, यहां का हर एक कोना एक खूबसूरत पेंटिंग जैसा महसूस होता है। सरकारी बॉटनिकल गार्डन में मौजूद हज़ारों प्रजातियों के पेड़-पौधे और सुप्रसिद्ध रोज़ गार्डन में खिले अनगिनत गुलाब इस जगह की रंगीनियत में चार चांद लगा देते हैं। इसके साथ ही, दूर-दूर तक फैले चाय के बागानों के बीच से गुज़रते रास्ते और पायकरा झरने का कलकल बहता पानी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
 शाम के समय धुंध की सफेद चादर जब पहाड़ों को ढक लेती है, तब ऊटी का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। यह सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भागदौड़ भरी ज़िंदगी से दूर, प्रकृति के साथ दोबारा जुड़ने और यादों का एक खूबसूरत कारवां बनाने का एक जरिया है।

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