डिग्री है, नौकरी नहीं: भारतीय युवाओं के सामने रोजगार की असली चुनौती क्या है ?

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कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद हाथ में डिग्री और आंखों में बेहतर भविष्य का सपना लिए हर साल लाखों युवा नौकरी की तलाश शुरू करते हैं। किसी को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का इंतजार है, तो कोई निजी कंपनियों में लगातार आवेदन कर रहा है। कुछ युवा ऐसे भी हैं, जिन्हें नौकरी तो मिल रही है, लेकिन वेतन उनकी योग्यता और उम्मीदों के अनुरूप नहीं है। सवाल सिर्फ बेरोजगारी का नहीं है। सवाल यह भी है कि शिक्षा पर वर्षों खर्च करने के बावजूद युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार अवसर क्यों नहीं मिल पा रहे हैं? डिग्री और नौकरी के बीच बढ़ती दूरी भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ है। छोटे शहरों और कस्बों से भी बड़ी संख्या में छात्र इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन डिग्री हासिल करना और नौकरी के लिए तैयार होना दो अलग बातें हैं। कई नियोक्ता अब शैक्षणिक योग्यता के साथ व्यावहारिक अनुभव, तकनीकी दक्षता, संवाद क्षमता और समस्या सुलझाने की योग्यता को भी महत्व देते हैं। ऐसे में केवल परीक्षा पास करने पर केंद्रित शिक्षा युवाओं की मुश्किलें बढ़ा सकती है। हालांकि रोजगार की कमी का प...

केरल की चौखट पर मानसून का पैगाम: बोलती कलम से बूंदों का सलाम

 

तपती, सुलगती और बेहाल करती गर्मी के बीच आखिरकार वो ठंडी फुहार आ ही गई जिसका पूरे हिंदुस्तान को बेसब्री से इंतजार था। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पुष्टि की है कि 4 जून 2026 को मानसून ने केरल के तट पर अपनी धमाकेदार दस्तक दे दी है। भले ही इस बार आगमन में 3 दिनों की मामूली देरी हुई, लेकिन बादलों की गड़गड़ाहट और बूंदों की झंकार ने आते ही प्रकृति को सराबोर कर दिया है। [1, 2, 3, 4, 5]

इस सुहाने मौसम पर हमारी 'बोलती कलम' कुछ यूँ गुनगुना उठी है:
"सुलगते जिस्म पर बूंदों की ये कैसी इनायत है,
धरा की प्यास बुझने की, गगन से फिर सिफारिश है।
केरल के साहिलों को चूम कर बादल ये बोले हैं,
तपिश अब ख़त्म होगी, अब तो बस सावन की बारिश है।"

आईएमडी (IMD) के मुताबिक, केरल के अलाप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जैसे कई जिलों में भारी बारिश का दौर शुरू हो चुका है। लक्षद्वीप और अरब सागर के रास्ते आगे बढ़ते हुए यह मानसूनी हवाएँ अब बहुत जल्द कर्नाटक, तमिलनाडु और फिर उत्तर भारत की ओर रुख करेंगी। किसान भाइयों के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि उनके खेतों की उम्मीदें इन्हीं बूंदों से जिंदा होती हैं। [1, 2, 3, 4, 5]
आइए इस मानसून का स्वागत करें और दुआ करें कि यह बारिश हर घर में खुशहाली और राहत लेकर आ

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