अमेरिका से उठी भारतीय संगीत की वैश्विक गूंज: राजा कुमारी

चित्र
  अमेरिका में जन्मी राजा कुमारी का असली नाम स्वेता यल्लाप्रगडा राव है। बचपन से ही उनके जीवन में दो संस्कृतियाँ साथ-साथ चलती रहीं—एक ओर अमेरिका की आधुनिक दुनिया, दूसरी ओर भारत की परंपराएँ। उनके माता-पिता चाहते थे कि बेटी अपनी भारतीय जड़ों से जुड़ी रहे, इसलिए छोटी उम्र में ही उन्हें कुचिपुड़ी नृत्य और भारतीय संगीत की शिक्षा दी गई। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यही भारतीय संस्कार एक दिन उन्हें दुनिया के सबसे बड़े मंचों तक ले जाएंगे। राजा कुमारी ने जब संगीत की दुनिया में कदम रखा, तो रास्ता आसान नहीं था। हिप-हॉप और रैप जैसे पश्चिमी संगीत में एक भारतीय लड़की के लिए अपनी पहचान बनाना चुनौतीपूर्ण था। लेकिन राजा ने खुद को बदलने के बजाय अपनी पहचान को ही अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने अपने गानों में भारतीय देवी-देवताओं, संस्कृति, नारी शक्ति और आत्मसम्मान को रैप के ज़रिए दुनिया के सामने रखा। यही कारण है कि उन्होंने Gwen Stefani, Iggy Azalea और Fall Out Boy जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ काम किया। राजा कुमारी की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि खुद को स्वीकार करने की कहानी है। उन्होंने य...

डिजिटल दुनिया की मार : आँखें थकीं, कान पके

 अब तो आँखें और कान भी छुट्टी पर हैं

आज के आधुनिक युग में इंसान तो जाग रहा है, पर उसकी आँखें और कान लगता है छुट्टी पर चले गए हैं।कभी जो आँखें समझने के लिए खुलती थीं, अब वो सिर्फ़ मोबाइल स्क्रीन देखने के लिए खुलती हैं।और जो कान “सुनने” के लिए बने थे, वो अब बस ब्लूटूथ ईयरफ़ोन में गाने भरते रहते हैं।

Read Also: जोहरन ममदानी: टैक्सी ड्राइवर के बेटे से न्यूयॉर्क सिटी के मेयर तक

आँखें अब क्या देखती हैं?

पहले आँखें प्रकृति की हरियाली, लोगों के चेहरे का भाव और आसमान में उड़ते पंछी देखती थीं।अब तो आँखें दिनभर बस स्क्रीन टाइम रिपोर्ट देखती हैं  “आपका औसत उपयोग 8 घंटे 43 मिनट।”कभी-कभी तो लगता है आँखें बोल दें “भाई, ज़रा हमें भी चार्जर लगा दो”

और कानों की हालत तो और भी मज़ेदार है

पहले कान पड़ोसी की गपशप, दादी की कहानियाँ और माँ की डाँट सुनते थे।अब कान बस

एक ही आवाज़ पहचानते हैं “नया नोटिफिकेशन आया है”,लोग अब किसी की बात कम, और रील्स का साउंड ज़्यादा सुनते हैं।कान तो बेचारे कब से कह रहे हैं “थोड़ा शांति चाहिए भाई”

सोशल मीडिया ने सबको सुपरहीरो बना दिया है

आँखें झपकने से पहले कैमरा ऑन, और कानों के लिए इयरफ़ोन ऑन ,अब तो हर इंसान अपने ही छोटे-से फ़िल्मी सेट में जी रहा है।कभी आँखें थक जाती हैं, तो वो भी सोचती हैं  “काश, हमें भी एयरप्लेन मोड मिल जाता”


टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट

क्या भारतीय संगीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग संगीत की दुनिया को बदल रहा है

ग्रीस में 3,100 से अधिक 100 साल की उम्र वाले लोग: लंबी उम्र का रहस्य

दुनिया की पहली फोटो की कहानी

जानें भारतीयों के लिए वीजा-मुक्त और आसान यात्रा वाले देश कौनसे हैं ?

क्रिसमस पर गोवा की मस्ती: जहां हर रात बन जाती है जश्न

अलीगढ़ के ताले दुनिया भर में मशहूर क्यों

प्रीवेडिंग शूट का नया ट्रेंड: उदयपुर की खूबसूरत लोकेशंस

केरल की शांतिपूर्ण कुमाराकोम यात्रा: 4 दिन की कहानी

माहे: भारत का सबसे छोटा शहर

दीपावली यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल