डिग्री है, नौकरी नहीं: भारतीय युवाओं के सामने रोजगार की असली चुनौती क्या है ?

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कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद हाथ में डिग्री और आंखों में बेहतर भविष्य का सपना लिए हर साल लाखों युवा नौकरी की तलाश शुरू करते हैं। किसी को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का इंतजार है, तो कोई निजी कंपनियों में लगातार आवेदन कर रहा है। कुछ युवा ऐसे भी हैं, जिन्हें नौकरी तो मिल रही है, लेकिन वेतन उनकी योग्यता और उम्मीदों के अनुरूप नहीं है। सवाल सिर्फ बेरोजगारी का नहीं है। सवाल यह भी है कि शिक्षा पर वर्षों खर्च करने के बावजूद युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार अवसर क्यों नहीं मिल पा रहे हैं? डिग्री और नौकरी के बीच बढ़ती दूरी भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ है। छोटे शहरों और कस्बों से भी बड़ी संख्या में छात्र इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन डिग्री हासिल करना और नौकरी के लिए तैयार होना दो अलग बातें हैं। कई नियोक्ता अब शैक्षणिक योग्यता के साथ व्यावहारिक अनुभव, तकनीकी दक्षता, संवाद क्षमता और समस्या सुलझाने की योग्यता को भी महत्व देते हैं। ऐसे में केवल परीक्षा पास करने पर केंद्रित शिक्षा युवाओं की मुश्किलें बढ़ा सकती है। हालांकि रोजगार की कमी का प...

वृंदावन: मैसूर की एक रंगीन शाम

 

कभी-कभी यात्रा सिर्फ रास्तों का सफ़र नहीं होती, वह मन के भीतर उतरकर एक कहानी बन जाती है। मैसूर का वृंदावन ऐसा ही एक स्थान है—जहाँ कदम-कदम पर रंग, रोशनी और संगीत आत्मा को छूते हैं। शाम की हल्की ठंडक जब हवा में घुलती है, तो लगता है मानो समय कुछ देर के लिए रुक गया हो।

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चारों ओर फैली झिलमिल रोशनी, पानी की लहरों पर पड़ते रंग, और मधुर संगीत की धीमी धुनें… हर दृश्य यूँ लगता है जैसे किसी चित्रकार की तूलिका से निकला हो। चलते-चलते कई लोग रुककर उस पल को अपने कैमरे में कैद करते हैं, पर मेरे लिए यह अनुभव सिर्फ तस्वीरों में नहीं, शब्दों के भीतर दर्ज होता गया।

वृंदावन की सबसे खास बात यह है कि यहाँ हर दृश्य अपने आप में एक अलग कहानी कहता है। कहीं पानी का उछाल धुनों के साथ नाचता दिखता है, तो कहीं रोशनी की लकीरें आसमान की ओर जाती हुई मन को मोह लेती हैं। इन सबके बीच बैठकर मैंने महसूस किया कि शब्द भी कभी-कभी खुद चलकर कलम तक आ जाते हैं।

उस शाम वहाँ बैठकर ऐसा लगा जैसे प्रकृति अपनी भाषा में कुछ कहना चाहती हो, और मेरी कलम उसे सुनकर लिखने को तैयार बैठी हो। रोशनी के रंग, पानी की ठंडी फुहार, और चारों ओर फैली शांति मेरे भीतर एक अनकही कविता गूँजाती रही।

मैसूर का यह अनुभव सिर्फ देखने की चीज नहीं, बल्कि महसूस करने की चीज है—एक ऐसी जगह जहाँ थोड़ी देर बैठकर कोई भी अपने भीतर की आवाज़ सुन सकता है। शायद यही वजह है कि मेरी बोलती कलम ने भी वहीं जाकर अपनी नई कहानी शुरू की।

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