भारत की काँच नगरी फ़िरोज़ाबाद: इतिहास, हुनर और परंपरा की कहानी
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग में स्थित फ़िरोज़ाबाद अपनी चमकदार काँच की चूड़ियों और नाजुक शिल्पकला के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। आगरा से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर बसा यह नगर, भारत की ‘काँच नगरी’ के नाम से जाना जाता है। यहाँ की हर गली में आपको कारीगरों का हुनर, पारंपरिक भट्टियों की गर्मी और चूड़ियों की खनक सुनाई देती है। फ़िरोज़ाबाद का ऐतिहासिक आरंभ फ़िरोज़ाबाद का नाम सुल्तान फ़िरोज़ शाह तुगलक के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने 14वीं शताब्दी में इस क्षेत्र को विकसित किया। ऐतिहासिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि मुगल काल के दौरान यह शहर एक समृद्ध व्यापारिक केंद्र के रूप में उभरा। अकबर के शासनकाल में, आगरा के आसपास के क्षेत्रों में शिल्पकारों और व्यापारियों की बसावट को बढ़ावा दिया गया, और फ़िरोज़ाबाद उन्हीं में से एक था। यहाँ के कारीगरों ने सबसे पहले काँच गलाने की तकनीक अपनाई और स्थानीय बाजारों के लिए चूड़ियों का उत्पादन शुरू किया। धीरे-धीरे यह परंपरा एक बड़े उद्योग में बदल गई। मुगल काल और काँच उद्योग का विकास मुगलों के समय में फ़िरोज़ाबाद का काँच उद्योग अपने चरम पर था। इतिहास...