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जनवरी 10, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

केरल का पहला पेपरलेस कोर्ट : न्याय का डिजिटल युग

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  थिरुवनंतपुरम,भारत के न्याय क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। केरल राज्य ने देश का पहला पूरी तरह से पेपरलेस जिला कोर्ट शुरू किया है। यह कदम सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि न्याय प्रक्रिया को तेज़, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस डिजिटल कोर्ट में सभी केस फाइलें इलेक्ट्रॉनिक हैं। वकील, जज और आम नागरिक अब ऑनलाइन दस्तावेज़ देख सकते हैं, नोटिफिकेशन पा सकते हैं और केस की स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं। कोर्ट प्रशासन का कहना है कि इससे कागजी काम में कमी, समय की बचत और भ्रष्टाचार में कमी आएगी।जस्टिस प्रिया मेनन, जिन्होंने इस पेपरलेस कोर्ट की शुरुआत की, बताती हैं,"पेपरलेस कोर्ट सिर्फ पेपर बचाने का मामला नहीं है। यह न्याय को हर नागरिक के लिए आसान और पारदर्शी बनाने का प्रयास है।" Read Also : केरल की शांतिपूर्ण कुमाराकोम यात्रा: 4 दिन की कहानी नागरिक अनुभव: स्थानीय नागरिक भी इस बदलाव को सकारात्मक मान रहे हैं। शालिनी कुमार, जो इस कोर्ट में केस की प्रक्रिया देख रही हैं, कहती हैं,"अब हमें कोर्ट तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। सभी जानकारी मोबाइल...

बीकानेर का अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव 2026 मरुधरा की धड़कन

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  इन सबका अद्भुत संगम है बीकानेर का अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव, जो इस वर्ष 9 से 11 जनवरी 2026 तक पूरे शौर्य और सांस्कृतिक वैभव के साथ आयोजित हो रहा है।  पहला दिन | 9 जनवरी – उत्सव की शुरुआत हुई ऐतिहासिक हेरिटेज वॉक से, जहाँ बीकानेर की गलियों ने अपनी विरासत खुद बयां की। हुई मिस मरवन मिस्टर बीकानेर प्रतियोगिता, 25 किलो वजन की पगड़ी,40 फीट लंबी मूछें,, बीकानेरी व्यंजनों का स्वाद, शाम को हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम तो मानो मरु संस्कृति का जीवंत मंच बन गया। इस तस्वीर में दिख रहा अग्नि-नृत्य और लोक कलाकारों का समर्पण यह बताने के लिए काफी है कि बीकानेर सिर्फ शहर नहीं, एक अनुभव है।  दूसरा दिन | 10 जनवरी – योग,राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र में यह दिन पूरी तरह ऊंटों के नाम रहेगा—  ऊंट सजावट प्रतियोगिता, फर कटिंग  ऊंट दौड़, घुड़ दौड़  ऊंटों से जुड़ी पारंपरिक कलाएं करणी सिंह स्टेडियम में ऊंटों के इतिहास की प्रदर्शनी, फोक नाइट, जोड़बीड़ में बर्ड फेस्टिवल सादुल क्लब ग्राउंड में पेरा मोटरिंग जहाँ देशी ही नहीं, विदेशी पर्यटक भी इस अनोखी विरासत को करीब से देख पाएंगे।  तीस...

चीन के ग्वांगझोउ में भारतीय शाकाहार की खुशबू: शर्मा जी की ऐतिहासिक यात्रा

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  जब कोई भारतीय स्वाद विदेश की धरती पर अपनी जड़ें जमा लेता है, तो वह केवल एक रेस्टोरेंट नहीं रहता, बल्कि वह यादों, संस्कृति और अपनत्व का ठिकाना बन जाता है। चीन के व्यस्त और आधुनिक महानगर ग्वांगझोउ में स्थित SHARMAJI ऐसा ही एक नाम है, जिसने वर्ष 1999 में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए ग्वांगझोउ का पहला पूर्णतः शुद्ध शाकाहारी भारतीय रेस्टोरेंट शुरू किया। उन्नीस सौ निन्यानवे का वह दौर ग्वांगझोउ के लिए तेज़ बदलावों का समय था। अंतरराष्ट्रीय व्यापार अपने पांव पसार रहा था और बड़ी संख्या में भारतीय व्यापारी, उद्योगपति और पेशेवर इस शहर की ओर रुख कर रहे थे। लेकिन विदेशी माहौल में एक बड़ी कमी साफ़ महसूस होती थी,घर जैसा शुद्ध भारतीय शाकाहारी भोजन। इसी कमी ने शर्माजी के जन्म की कहानी लिखी। Read Also : लक्षद्वीप पर्यटन राज्य – tourism of india एक ऐसे देश में, जहाँ भोजन की परंपराएँ बिल्कुल अलग हैं, वहाँ शुद्ध शाकाहारी भारतीय रसोई स्थापित करना आसान नहीं था। फिर भी शर्माजी ने शुरुआत से ही अपने सिद्धांतों को मजबूती से थामे रखा। यहाँ भोजन केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि विश्वास और संस्कार के साथ पर...