ज़ायके का संगम: वो शहर जहाँ की सुबह कढ़ी कचौड़ी की खुशबू से होती है गुलज़ार
थिरुवनंतपुरम,भारत के न्याय क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। केरल राज्य ने देश का पहला पूरी तरह से पेपरलेस जिला कोर्ट शुरू किया है। यह कदम सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि न्याय प्रक्रिया को तेज़, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस डिजिटल कोर्ट में सभी केस फाइलें इलेक्ट्रॉनिक हैं। वकील, जज और आम नागरिक अब ऑनलाइन दस्तावेज़ देख सकते हैं, नोटिफिकेशन पा सकते हैं और केस की स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं। कोर्ट प्रशासन का कहना है कि इससे कागजी काम में कमी, समय की बचत और भ्रष्टाचार में कमी आएगी।जस्टिस प्रिया मेनन, जिन्होंने इस पेपरलेस कोर्ट की शुरुआत की, बताती हैं,"पेपरलेस कोर्ट सिर्फ पेपर बचाने का मामला नहीं है। यह न्याय को हर नागरिक के लिए आसान और पारदर्शी बनाने का प्रयास है।"
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स्थानीय नागरिक भी इस बदलाव को सकारात्मक मान रहे हैं। शालिनी कुमार, जो इस कोर्ट में केस की प्रक्रिया देख रही हैं, कहती हैं,"अब हमें कोर्ट तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। सभी जानकारी मोबाइल पर मिल जाती है और प्रक्रिया तेज़ हो गई है।"
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि केरल का यह कदम भारत के न्याय तंत्र में डिजिटल क्रांति की मिसाल है। अगर अन्य राज्य भी इसे अपनाते हैं, तो लाखों घंटे की प्रशासनिक मेहनत बच सकती है और न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ सकती है। केरल का यह पेपरलेस कोर्ट यह दिखाता है कि तकनीक का सही इस्तेमाल नागरिकों और शासन के लिए कैसे बदलाव ला सकता है। यह सिर्फ एक डिजिटल पहल नहीं, बल्कि न्याय को आम लोगों के करीब लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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