ज़ायके का संगम: वो शहर जहाँ की सुबह कढ़ी कचौड़ी की खुशबू से होती है गुलज़ार

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  भारतीय खान-पान की दुनिया में कचौड़ी का नाम आते ही मन में एक करारा और तीखा स्वाद घुल जाता है, लेकिन जब इसी खस्ता कचौड़ी के ऊपर गरमा-गरम चटपटी कढ़ी डाली जाती है, तो वह स्वाद एक नया ही अनुभव बन जाता है। भारत के कई शहरों में कढ़ी-कचौड़ी केवल एक नाश्ता नहीं बल्कि वहाँ की जीवनशैली और संस्कृति का अहम हिस्सा है। राजस्थान का ajmer    शहर इस मामले में सबसे आगे है, जहाँ के केसरगंज और गोल प्याऊ जैसे इलाकों में सुबह होते ही कढ़ी-कचौड़ी की खुशबू हर गली में महकने लगती है। यहाँ की खास बात यह है कि दाल की कचौड़ी को मथकर उसके ऊपर बेसन की पतली और मसालेदार कढ़ी डाली जाती है, जो सेलिब्रिटीज से लेकर आम आदमी तक सबको दीवाना बना देती है। राजस्थान का ही एक और ज़िला bhartpur  अपनी छोटी कचौड़ियों के लिए 'सिटी ऑफ कचौड़ी' के नाम से विख्यात है। यहाँ कढ़ी के साथ छोटी-छोटी कुरकुरी कचौड़ियाँ परोसी जाती हैं, जो बाहरी पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण हैं। इसके अलावाjalor  में दही और कढ़ी के साथ कचौड़ी का कॉम्बो काफी लोकप्रिय है। मध्य प्रदेश केindore  औरjallor जैसे शहरों में ...

केरल का पहला पेपरलेस कोर्ट : न्याय का डिजिटल युग

 

थिरुवनंतपुरम,भारत के न्याय क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। केरल राज्य ने देश का पहला पूरी तरह से पेपरलेस जिला कोर्ट शुरू किया है। यह कदम सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि न्याय प्रक्रिया को तेज़, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस डिजिटल कोर्ट में सभी केस फाइलें इलेक्ट्रॉनिक हैं। वकील, जज और आम नागरिक अब ऑनलाइन दस्तावेज़ देख सकते हैं, नोटिफिकेशन पा सकते हैं और केस की स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं। कोर्ट प्रशासन का कहना है कि इससे कागजी काम में कमी, समय की बचत और भ्रष्टाचार में कमी आएगी।जस्टिस प्रिया मेनन, जिन्होंने इस पेपरलेस कोर्ट की शुरुआत की, बताती हैं,"पेपरलेस कोर्ट सिर्फ पेपर बचाने का मामला नहीं है। यह न्याय को हर नागरिक के लिए आसान और पारदर्शी बनाने का प्रयास है।"

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नागरिक अनुभव:

स्थानीय नागरिक भी इस बदलाव को सकारात्मक मान रहे हैं। शालिनी कुमार, जो इस कोर्ट में केस की प्रक्रिया देख रही हैं, कहती हैं,"अब हमें कोर्ट तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। सभी जानकारी मोबाइल पर मिल जाती है और प्रक्रिया तेज़ हो गई है।"

विशेषज्ञों की राय:

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि केरल का यह कदम भारत के न्याय तंत्र में डिजिटल क्रांति की मिसाल है। अगर अन्य राज्य भी इसे अपनाते हैं, तो लाखों घंटे की प्रशासनिक मेहनत बच सकती है और न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ सकती है। केरल का यह पेपरलेस कोर्ट यह दिखाता है कि तकनीक का सही इस्तेमाल नागरिकों और शासन के लिए कैसे बदलाव ला सकता है। यह सिर्फ एक डिजिटल पहल नहीं, बल्कि न्याय को आम लोगों के करीब लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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