ज़ायके का संगम: वो शहर जहाँ की सुबह कढ़ी कचौड़ी की खुशबू से होती है गुलज़ार

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  भारतीय खान-पान की दुनिया में कचौड़ी का नाम आते ही मन में एक करारा और तीखा स्वाद घुल जाता है, लेकिन जब इसी खस्ता कचौड़ी के ऊपर गरमा-गरम चटपटी कढ़ी डाली जाती है, तो वह स्वाद एक नया ही अनुभव बन जाता है। भारत के कई शहरों में कढ़ी-कचौड़ी केवल एक नाश्ता नहीं बल्कि वहाँ की जीवनशैली और संस्कृति का अहम हिस्सा है। राजस्थान का ajmer    शहर इस मामले में सबसे आगे है, जहाँ के केसरगंज और गोल प्याऊ जैसे इलाकों में सुबह होते ही कढ़ी-कचौड़ी की खुशबू हर गली में महकने लगती है। यहाँ की खास बात यह है कि दाल की कचौड़ी को मथकर उसके ऊपर बेसन की पतली और मसालेदार कढ़ी डाली जाती है, जो सेलिब्रिटीज से लेकर आम आदमी तक सबको दीवाना बना देती है। राजस्थान का ही एक और ज़िला bhartpur  अपनी छोटी कचौड़ियों के लिए 'सिटी ऑफ कचौड़ी' के नाम से विख्यात है। यहाँ कढ़ी के साथ छोटी-छोटी कुरकुरी कचौड़ियाँ परोसी जाती हैं, जो बाहरी पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण हैं। इसके अलावाjalor  में दही और कढ़ी के साथ कचौड़ी का कॉम्बो काफी लोकप्रिय है। मध्य प्रदेश केindore  औरjallor जैसे शहरों में ...

बीकानेर का अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव 2026 मरुधरा की धड़कन

 


इन सबका अद्भुत संगम है बीकानेर का अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव, जो इस वर्ष 9 से 11 जनवरी 2026 तक पूरे शौर्य और सांस्कृतिक वैभव के साथ आयोजित हो रहा है।
📍 पहला दिन | 9 जनवरी –
उत्सव की शुरुआत हुई ऐतिहासिक हेरिटेज वॉक से, जहाँ बीकानेर की गलियों ने अपनी विरासत खुद बयां की। हुई मिस मरवन मिस्टर बीकानेर प्रतियोगिता, 25 किलो वजन की पगड़ी,40 फीट लंबी मूछें,, बीकानेरी व्यंजनों का स्वाद,
शाम को हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम तो मानो मरु संस्कृति का जीवंत मंच बन गया।
इस तस्वीर में दिख रहा अग्नि-नृत्य और लोक कलाकारों का समर्पण यह बताने के लिए काफी है कि बीकानेर सिर्फ शहर नहीं, एक अनुभव है।
📍 दूसरा दिन | 10 जनवरी –
योग,राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र में
यह दिन पूरी तरह ऊंटों के नाम रहेगा—
🐪 ऊंट सजावट प्रतियोगिता, फर कटिंग
🐪 ऊंट दौड़, घुड़ दौड़
🐪 ऊंटों से जुड़ी पारंपरिक कलाएं
करणी सिंह स्टेडियम में ऊंटों के इतिहास की प्रदर्शनी, फोक नाइट,
जोड़बीड़ में बर्ड फेस्टिवल
सादुल क्लब ग्राउंड में पेरा मोटरिंग
जहाँ देशी ही नहीं, विदेशी पर्यटक भी इस अनोखी विरासत को करीब से देख पाएंगे।
📍 तीसरा दिन | 11 जनवरी – रायसर
रेगिस्तान की खुली धरती पर देशी–विदेशी मेहमानों की रोमांचक प्रतियोगिताएं,
लोक संस्कृति की झलक और बीकानेर की मेहमाननवाज़ी का शिखर देखने को मिलेगा। ग्रामीण खेलो मे केमल सफारी,सेंड आर्ट, देशी विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियां, अग्नि नृत्य,
👉 जो लोग इस साल किसी कारण से नहीं आ पाए, वे एक बात गांठ बाँध लें—
अगले साल बीकानेर का ऊंट उत्सव मिस करना मतलब राजस्थान की आत्मा को अधूरा देखना।
🐪💛 बीकानेर आपको बुला रहा है…
संस्कृति, रंग, रेत और ऊंटों की दुनिया में खो जाने के लिए। अगले साल जनवरी 2027 के हो जाइए तैयार।

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