फोन पर वीडियो देखने का नशा: कितना खतरनाक है?

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  सुबह आंख खुलते ही फोन पर वीडियो देखना, खाना खाते समय रील्स चलाना, खाली समय में लगातार शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करना और रात को सोने से पहले “बस एक वीडियो और” कहना—आज यह आदत बहुत सामान्य हो गई है। वीडियो देखना अपने आप में नुकसानदायक नहीं है। फोन से मनोरंजन के साथ-साथ पढ़ाई, समाचार और जानकारी भी मिलती है। समस्या तब शुरू होती है जब वीडियो देखने का समय हमारे नियंत्रण से बाहर होने लगे और जरूरी काम, नींद, पढ़ाई, नौकरी या परिवार के साथ बिताया समय पीछे छूटने लगे। यही वजह है कि फोन पर वीडियो देखने की आदत कब सामान्य मनोरंजन से आगे बढ़ जाती है और कब चिंता का कारण बन सकती है, इसे समझना जरूरी है। क्या फोन पर वीडियो देखना सच में “नशा” है? बोलचाल की भाषा में लोग किसी ऐसी आदत को “नशा” कह देते हैं जिसे छोड़ना मुश्किल महसूस हो। लेकिन हर व्यक्ति जो लंबे समय तक वीडियो देखता है, उसे चिकित्सकीय रूप से “आदी” कहना सही नहीं होगा। असल चिंता तब होती है जब व्यक्ति वीडियो देखने पर नियंत्रण नहीं रख पाता, दूसरी जरूरी गतिविधियों पर उसका असर पड़ने लगता है और नुकसान दिखाई देने के बावजूद वह अपनी आदत को कम नहीं कर पाता।...

बीकानेर का अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव 2026 मरुधरा की धड़कन

 


इन सबका अद्भुत संगम है बीकानेर का अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव, जो इस वर्ष 9 से 11 जनवरी 2026 तक पूरे शौर्य और सांस्कृतिक वैभव के साथ आयोजित हो रहा है।
📍 पहला दिन | 9 जनवरी –
उत्सव की शुरुआत हुई ऐतिहासिक हेरिटेज वॉक से, जहाँ बीकानेर की गलियों ने अपनी विरासत खुद बयां की। हुई मिस मरवन मिस्टर बीकानेर प्रतियोगिता, 25 किलो वजन की पगड़ी,40 फीट लंबी मूछें,, बीकानेरी व्यंजनों का स्वाद,
शाम को हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम तो मानो मरु संस्कृति का जीवंत मंच बन गया।
इस तस्वीर में दिख रहा अग्नि-नृत्य और लोक कलाकारों का समर्पण यह बताने के लिए काफी है कि बीकानेर सिर्फ शहर नहीं, एक अनुभव है।
📍 दूसरा दिन | 10 जनवरी –
योग,राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र में
यह दिन पूरी तरह ऊंटों के नाम रहेगा—
🐪 ऊंट सजावट प्रतियोगिता, फर कटिंग
🐪 ऊंट दौड़, घुड़ दौड़
🐪 ऊंटों से जुड़ी पारंपरिक कलाएं
करणी सिंह स्टेडियम में ऊंटों के इतिहास की प्रदर्शनी, फोक नाइट,
जोड़बीड़ में बर्ड फेस्टिवल
सादुल क्लब ग्राउंड में पेरा मोटरिंग
जहाँ देशी ही नहीं, विदेशी पर्यटक भी इस अनोखी विरासत को करीब से देख पाएंगे।
📍 तीसरा दिन | 11 जनवरी – रायसर
रेगिस्तान की खुली धरती पर देशी–विदेशी मेहमानों की रोमांचक प्रतियोगिताएं,
लोक संस्कृति की झलक और बीकानेर की मेहमाननवाज़ी का शिखर देखने को मिलेगा। ग्रामीण खेलो मे केमल सफारी,सेंड आर्ट, देशी विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियां, अग्नि नृत्य,
👉 जो लोग इस साल किसी कारण से नहीं आ पाए, वे एक बात गांठ बाँध लें—
अगले साल बीकानेर का ऊंट उत्सव मिस करना मतलब राजस्थान की आत्मा को अधूरा देखना।
🐪💛 बीकानेर आपको बुला रहा है…
संस्कृति, रंग, रेत और ऊंटों की दुनिया में खो जाने के लिए। अगले साल जनवरी 2027 के हो जाइए तैयार।

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