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राजस्थान का सदाबहार हिल स्टेशन माउंट आबू

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  राजस्थान के सूखे रेगिस्तान में, माउण्ट आबू एक ताज़ा हवा की तरह है। अरावली की पहाड़ियों की सबसे अधिक ऊँचाई पर, लगभग 1,722 मीटर समुद्र तल से ऊपर माउण्ट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है। महाराजाओं के शासन के समय शाही परिवारों के लिए, अवकाश बिताने का यह सर्वाधिक पसंदीदा स्थल हुआ करता था।  यहाँ पर बने विशाल, आरामदेय बड़े-बड़े घर, ब्रिटिश स्टाइल के बंगले, हॉलिडे लॉज अपना अलग अनोखा अन्दाज दर्शाते हैं, वहीं दूसरी तरफ यहाँ के जंगलों में बसने वाली आदिवासी जातियों के डेरे भी देखे जा सकते हैं।   प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर इस हिल स्टेशन में बहुत से हरे-भरे जंगल, झरने और झीले हैं। इस क्षेत्र में फलने-फूलने वाले अदभुत प्रजाति के पौधे, फूल और वृक्ष भी अचम्भित करते हैं। माउण्ट आबू में एक अभ्यारण्य भी है जिसमें लंगूर, सांभर, जंगली सूअर और चीते भी देखे जा सकते हैं। माउण्ड आबू कई धार्मिक स्मारकों के लिए भी प्रसिद्ध है जिसमें दिलवाड़ा के मंदिर, ब्रह्माकुमारी आश्रम, गुरूशिखर और जैन-तीर्थ मुख्य हैं। प्राकृतिक सुन्दता के गंतव्य के साथ ही माउण्ट आबू एक पवित्र तीर्थ-स्थल भी हैं। माउण्ट आबू के म...

सुबह खाली पेट सौंफ और मिश्री का पानी पीने के चमत्कारिक फायदे ...

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  सौंफ और मिश्री न केवल स्वाद में बेहतरीन होते हैं, बल्कि इनका कॉम्बिनेशन सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. आयुर्वेद में सौंफ और मिश्री को कई रोगों को दूर करने वाला प्राकृतिक उपाय माना गया है. अगर इन दोनों को रात में भिगोकर रख देते हैं और सुबह छानकर खाली पेट पीते हैं तो हैं, तो यह आपके शरीर को कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है. यह न केवल पाचन तंत्र को मजबूत करता है बल्कि त्वचा, आंखों और वजन कम करने के लिए भी उपयोगी साबित होता है. आइए जानते हैं इसके चमत्कारिक लाभ और इसे सही तरीके से सेवन करने का तरीका. सौंफ और मिश्री का पानी पीने के अद्भुत फायदे (Benefits of Drinking Fennel And Sugar Candy Water) पाचन तंत्र को मजबूत करता है सौंफ में मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाचन को बेहतर बनाते हैं. सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से अपच, एसिडिटी और गैस की समस्या दूर हो जाती है. मिश्री भी पेट को ठंडा रखती है और पाचन को सुधारने में मदद करती है. यह भी पढ़ें:  कान में जमी गंदगी को चुटकियों में निकालने का रामबाण घरेलू तरीका, बस 2 मिनट कर लीजिए ये काम मेटाबॉलिज्म बढ़ाकर वजन घटाने में मदद करता है अ...

दुबई में भारतीय: अवसरों और जीवन का नया अनुभव

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  दुबई, संयुक्त अरब अमीरात – दुबई में भारतीय समुदाय का योगदान हर क्षेत्र में दिखाई देता है। यह शहर न केवल वैश्विक व्यापार का केंद्र है, बल्कि यहां रहने वाले भारतीयों के लिए अवसरों और जीवनशैली का नया अनुभव भी प्रदान करता है। रोजगार और व्यवसाय दुबई में हजारों भारतीय कंपनियों, सेवा क्षेत्रों और स्टार्टअप्स में काम कर रहे हैं। इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य, बैंकिंग, आईटी और निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारतीयों की उपस्थिति विशेष रूप से मजबूत है। इसके अलावा, कई भारतीय स्वयं का व्यवसाय भी चला रहे हैं, जैसे रेस्तरां, खुदरा दुकानें, रियल एस्टेट और ई-कॉमर्स। एनआरआई एक्सपर्ट कहते हैं कि दुबई की व्यवसायिक और टैक्स फ्रेंडली नीतियां भारतीय उद्यमियों के लिए आकर्षक अवसर पैदा करती हैं। इसके अलावा, यहां के कैरियर और नेटवर्किंग अवसर उन्हें वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने में मदद करते हैं। शिक्षा और बच्चों का भविष्य : दुबई में रहने वाले भारतीय परिवार अपनी बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं। यहां CBSE और ICSE बोर्ड वाले स्कूल, साथ ही अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम जैसे IB और British Curriculum उपलब्ध हैं। स्कूल...

चिड़िया टापू: अंडमान का अद्भुत प्राकृतिक स्वर्ग

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  साउथ अंडमान के दक्षिणी सिरे पर स्थित यह छोटा सा द्वीप , श्री विजयपुरम से लगभग 28 किलोमीटर दूर, प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा अनुभव प्रस्तुत करता है। यहाँ की घनी मैंग्रोव वनस्पतियाँ और विदेशी पक्षियों की मधुर आवाज़ें इतिहास और संस्कृति की अनकही कहानियाँ बयां करती हैं। किंवदंतियों के अनुसार, चिड़िया टापू कभी स्वदेशी जरवा जनजाति के लिए पवित्र स्थल हुआ करता था। आज, यह द्वीप पर्यटकों के लिए विभिन्न अनुभवों का संगम है, जहाँ प्राकृतिक सुंदरता, जीवंत जैव विविधता और शांत वातावरण एक साथ मिलते हैं। समुद्र तट और प्राकृतिक दृश्य इस द्वीप का समुद्र तट घोड़े की नाल के आकार का है। एक तरफ हरे-भरे जंगल हैं और दूसरी तरफ विशाल चट्टानों ने इसे अपनी गोद में समेट रखा है। सुनहरी रेत समुद्र तट पर एक स्वागत कालीन की तरह बिछी हुई है, जबकि फ़िरोज़ी पानी धीरे-धीरे किनारे को छूता है। लहरों की लयबद्ध आवाज़ मानो निरंतर लोरी की तरह महसूस होती है। सूर्यास्त के समय समुद्र और आकाश का रंग-बिरंगा नजारा इस अनुभव को और भी यादगार बना देता है। यात्रा का अनुभव श्री विजयपुरम से चिड़िया टापू की यात्रा केवल सफ़र न...

मोबाइल की लत , कम होता सामाजिक संपर्क

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  पिछले कुछ वर्षों में तकनीक ने हमारी ज़िंदगी को पूरी तरह बदल दिया है। आज हमारे हाथ में मौजूद एक छोटा सा स्मार्टफोन हमें पूरी दुनिया से जोड़ देता है। जहाँ पहले लोगों को किसी जानकारी के लिए किताबों या अखबारों का इंतज़ार करना पड़ता था, वहीं आज कुछ ही सेकंड में इंटरनेट पर हर सवाल का जवाब मिल जाता है।                             सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव आज सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि यह लोगों की सोच, जीवनशैली और फैसलों को भी प्रभावित करने लगा है। लोग अपने विचार, प्रतिभा और बिज़नेस को दुनिया तक पहुँचाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई लोग तो इसी के जरिए अपना करियर और पहचान भी बना रहे हैं। सुविधा के साथ नई चुनौतियाँ डिजिटल दुनिया ने जीवन को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियाँ भी आई हैं।                                                  ...

विश्व महिला दिवस: 8 मार्च को ताजमहल सहित देश की सभी हेरिटेज बिल्डिंग्स में प्रवेश नि:शुल्क

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  विश्व महिला दिवस के अवसर पर ताजमहल और आगरा किला सहित देश के सभी संरक्षित स्मारकों में लोगों के लिए टिकट फ्री कर दिया गया है। सरकार के इस निर्णय से देश के पर्यटक लाभ उठाकर पर्यटन का आनंद ले सकते हैं। इसमें बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं—सभी के लिए टिकट पूरी तरह नि:शुल्क रखा गया है। पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार का यह एक बेहद सराहनीय कदम है।

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आज से शुरू

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  उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आज से शुरू हो गया है। श्रद्धालु विभाग की आधिकारिक वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in तथा मोबाइल ऐप टूरिस्ट केयर उत्तराखंड के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि इस वर्ष चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होगी। इसी दिन यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को और बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। चारधाम यात्रा में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए भारतीय श्रद्धालु आधार कार्ड के माध्यम से जबकि विदेशी श्रद्धालुओं के लिए ई-मेल आईडी के जरिए पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जो श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण नहीं करा पाएंगे, उनके लिए ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध होगी।  यह सुविधा 17 अप्रैल से शुरू की जाएगी। इसके लिए ऋषिकेश के ट्रांजिट कैंप, हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान और विकासनगर में विशेष पंजीकरण काउंटर स्थापित किए जाएंगे। प्रशा...

वाराणसी : संगीत की आत्मा से जुड़ा शहर

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  भारत में कई शहर अपनी पहचान इतिहास, संस्कृति और आध्यात्म से बनाते हैं, लेकिन Varanasi एक ऐसा शहर है जहाँ पहचान की सबसे गहरी परत संगीत से जुड़ी है। यहाँ संगीत केवल कला नहीं है, बल्कि जीवन का हिस्सा है। सुबह के समय जब सूरज की पहली किरणें पवित्र Ganges River के जल पर पड़ती हैं, तो वातावरण में मंत्रों, घंटियों और रागों की मधुर ध्वनि घुल जाती है। ऐसा लगता है मानो पूरा शहर किसी अदृश्य लय में सांस ले रहा हो। वाराणसी का नाम हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध "बनारस घराना" से जुड़ा है। इस घराने की खासियत इसकी भावनात्मक गहराई और मजबूत ताल प्रणाली मानी जाती है। यहाँ संगीत की शिक्षा केवल किताबों से नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा से दी जाती है। दुनिया भर में भारतीय संगीत को पहचान दिलाने वाले महान सितार वादक Ravi Shankar का संबंध भी इसी सांस्कृतिक परंपरा से रहा है। वहीं शहनाई को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने वाले Ustad Bismillah Khan ने वाराणसी की मिट्टी को अपनी साधना का केंद्र बनाया। वाराणसी के घाट केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए नहीं जाने जाते, बल्कि यहाँ संगीत की साधना भी होती है। कई...

गोण्ड पेंटिंग्स की कहानी: कैसे यह भारतीय लोककला बन गई ग्लोबल सेंसेशन

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  भारत की पारंपरिक कला और शिल्प की दुनिया में कई रूप लोकप्रिय हैं, लेकिन गोण्ड आदिवासी चित्रकला अपनी अलग पहचान रखती है। जब मैंने पहली बार गोण्ड पेंटिंग्स देखी, तो मुझे लगा कि ये सिर्फ कला नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव सभ्यता के बीच की गहरी संबंध की कहानी कहती हैं। शब्द ‘गोण्ड’ वास्तव में ‘कोंड’ से आया है, जिसका अर्थ है हरित पर्वत। इतिहासकार मानते हैं कि इस कला का जन्म लगभग 2000 साल पहले हुआ था। इसकी खासियत इसकी प्राकृतिक और सांस्कृतिक झलक को उज्ज्वल रंगों और जटिल डिज़ाइनों के माध्यम से दर्शाना है। गोण्ड आदिवासी कला के मामले में बेहद भाग्यशाली माने जाते हैं, क्योंकि ये अपनी कल्पना को अद्भुत चित्रों और शिल्प के रूप में व्यक्त कर पाते हैं। जब मैंने जंगार सिंह श्याम के काम के बारे में पढ़ा, तो पता चला कि उन्होंने इस कला को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। पाटनगढ़ के रहने वाले जंगार सिंह श्याम की पेंटिंग्स 1980 के दशक तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गैलरीज़ में प्रदर्शित की गईं। उनके शिष्य और पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित भज्जू श्याम ने भी इसी कला में अपने कदम बचपन में जंगार सिंह श्याम से सीखक...

मुन्नार के प्राकृतिक दृश्यों के लिए एक दिन की यात्रा : मेरी अनुभव यात्रा

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सुबह-सुबह मुन्नार के हरे-भरे पहाड़ों में कदम रखते ही ताजी हवा ने मुझे स्वागत किया। हरियाली इतनी घनी थी कि चारों ओर बस प्रकृति ही नजर आती थी। छोटे-छोटे रास्तों से चलते हुए मुझे लगता था कि जैसे मैं किसी पेंटिंग के बीच में खड़ा हूँ। हल्की धुंध ने पहाड़ों की चोटियों को और भी जादुई बना दिया था। सुबह की सैर के बाद, मैंने दोपहर का भोजन किया। स्थानीय होटल में छुआ हुआ मसालेदार करी और ताजी चाय का स्वाद अद्भुत था। भोजन के बाद, मैंने एराविकुलम वन्य जीवन अभयारण्य की ओर रुख किया। यह अभयारण्य न केवल नीलगिरी ताहर जैसे दुर्लभ जानवरों का घर है, बल्कि यहां के पेड़-पौधे और हरियाली भी मनमोहक हैं। मैंने दूरबीन से हिरण और पक्षियों को देखा और महसूस किया कि प्रकृति कितनी जटिल और सुंदर है। इसके बाद मैं मट्टुपेट्टी डैम पहुँचा। डैम के सामने खड़े होकर मैं पानी की शांति और पहाड़ों की ऊँचाई का अनुभव कर सकता था। मुझे जानकारी मिली कि यह डैम 1949 में बनना शुरू हुआ था और 1953 में जनता के लिए खोला गया। पानी के प्रतिबिंब में सूर्य की रोशनी की झिलमिलाहट ने दृश्य को और भी आकर्षक बना दिया। मैं कुछ मिनट वहीं बैठा रहा, शांत ...