गोंधल क्या है? मराठी परंपरा से ऑस्कर तक

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  Gondhal Oscar 2027: मराठी फिल्म ‘गोंधल’ के भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री बनने के बाद महाराष्ट्र की एक पारंपरिक लोक-विधि भी चर्चा में आ गई है। आखिर गोंधल क्या है और इस परंपरा का फिल्म से क्या संबंध है? आइए समझते हैं। गोंधल आखिर होता क्या है? महाराष्ट्र में गोंधल एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान और लोक-प्रस्तुति है, जिसमें भक्ति, संगीत, गायन और नृत्य का मेल देखने को मिलता है। यह परंपरा कुछ परिवारों में कुलदेवता की पूजा और शुभ अवसरों से जुड़ी रही है। महाराष्ट्र के मराठी विश्वकोश के अनुसार, गोंधल देवी की स्तुति और पूजा से जुड़ा एक कुलाचार है। गोंधल की प्रस्तुति करने वाले कलाकारों को गोंधली कहा जाता है। पारंपरिक प्रस्तुति में देवी-देवताओं की स्तुति, लोकगीत, वाद्य संगीत और नृत्य शामिल होते हैं। शादी जैसे शुभ अवसरों पर भी होती है यह परंपरा गोंधल का संबंध महाराष्ट्र के कुछ परिवारों में विवाह और दूसरे मंगल अवसरों से रहा है। महाराष्ट्र सरकार के गजेटियर में भी इसका उल्लेख मिलता है कि शुभ अवसर के बाद देवी की पूजा और स्तुति के लिए गोंधल की प्रस्तुति की जाती थी। इस दौरान रात में संगीत और नृत्य ...

वो आवाज़ जो हमारे दिलों को छू जाती थी – अमीन सयानी की कहानी


भारत के रेडियो इतिहास में अमीन सयानी का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। 20वीं सदी के मध्य में जब रेडियो ही लोगों का मुख्य मनोरंजन और सूचना का साधन था, तब अमीन सयानी की आवाज़ ने लाखों दिलों को छू लिया। रेडियो सेलॉन के जरिए उन्होंने संगीत और बातों का ऐसा संगम पेश किया, जो आज भी याद किया जाता है।

अमीन सयानी का परिचय

अमीन सयानी का जन्म 21 दिसंबर 1932 को मुंबई में हुआ था। रेडियो के प्रति उनका लगाव परिवार से ही था क्योंकि उनके बड़े भाई हामिद सयानी भी एक प्रसिद्ध रेडियो प्रस्तुतकर्ता थे। 1952 में मात्र 20 वर्ष की उम्र में अमीन सयानी ने श्रीलंका के रेडियो सेलॉन से अपना करियर शुरू किया। उस समय भारत में फिल्मी गीतों पर बैन था, इसलिए रेडियो सेलॉन उन गीतों को लोगों तक

पहुँचाने का प्रमुख माध्यम बन गया।

बिनाका गीतमाला" का जादू

अमीन सयानी ने रेडियो सेलॉन पर "बिनाका गीतमाला" नामक कार्यक्रम की शुरुआत की, जो जल्द ही पूरे दक्षिण एशिया में लोकप्रिय हो गया। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड के लोकप्रिय गीतों की साप्ताहिक काउंटडाउन प्रस्तुत की जाती थी। उनकी मधुर और दोस्ताना आवाज़, "नमस्कार भाइयों और बहनों, मैं आपका दोस्त अमीन सयानी बोल रहा हूँ," आज भी लाखों लोगों के कानों में गूँजती है।

इस कार्यक्रम की खासियत थी अमीन की जानकारीपूर्ण टिप्पणियाँ, संगीतकारों, गायक-गीतकारों के बारे में रोचक तथ्य, और उनकी आत्मीय शैली। इसने सुनने वालों के दिलों में एक अलग ही जगह बना ली।

अमीन सयानी की विरासत

करीब चार दशकों तक अमीन सयानी ने रेडियो पर संगीत की दुनिया को रोशन किया। उन्होंने करीब 54,000 से अधिक रेडियो कार्यक्रम प्रस्तुत किए और 19,000 से ज्यादा विज्ञापन और जिंगल्स भी उनकी आवाज़ में लोकप्रिय हुए। उनके कार्य को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें 'हिंदी रत्न पुरस्कार' प्रमुख है।

 उनका निधन और यादें

20 फरवरी 2024 को अमीन सयानी का निधन हो गया, लेकिन उनकी आवाज़ और उनकी यादें आज भी जिंदा हैं। रेडियो सेलॉन और "बिनाका गीतमाला" के माध्यम से उन्होंने संगीत प्रेमियों के दिलों में जो जगह बनाई, वह अमर है। उनके योगदान को आज भी रेडियो जगत में एक मिसाल माना जाता है।


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