गोंधल क्या है? मराठी परंपरा से ऑस्कर तक

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  Gondhal Oscar 2027: मराठी फिल्म ‘गोंधल’ के भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री बनने के बाद महाराष्ट्र की एक पारंपरिक लोक-विधि भी चर्चा में आ गई है। आखिर गोंधल क्या है और इस परंपरा का फिल्म से क्या संबंध है? आइए समझते हैं। गोंधल आखिर होता क्या है? महाराष्ट्र में गोंधल एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान और लोक-प्रस्तुति है, जिसमें भक्ति, संगीत, गायन और नृत्य का मेल देखने को मिलता है। यह परंपरा कुछ परिवारों में कुलदेवता की पूजा और शुभ अवसरों से जुड़ी रही है। महाराष्ट्र के मराठी विश्वकोश के अनुसार, गोंधल देवी की स्तुति और पूजा से जुड़ा एक कुलाचार है। गोंधल की प्रस्तुति करने वाले कलाकारों को गोंधली कहा जाता है। पारंपरिक प्रस्तुति में देवी-देवताओं की स्तुति, लोकगीत, वाद्य संगीत और नृत्य शामिल होते हैं। शादी जैसे शुभ अवसरों पर भी होती है यह परंपरा गोंधल का संबंध महाराष्ट्र के कुछ परिवारों में विवाह और दूसरे मंगल अवसरों से रहा है। महाराष्ट्र सरकार के गजेटियर में भी इसका उल्लेख मिलता है कि शुभ अवसर के बाद देवी की पूजा और स्तुति के लिए गोंधल की प्रस्तुति की जाती थी। इस दौरान रात में संगीत और नृत्य ...

सरदार पटेल – केबड़िया, गुजरात की अमर गाथा


 भारत माता के अनगिनत वीर सपूतों में से एक नाम सदैव स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा — सरदार वल्लभभाई पटेल। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। सरदार पटेल केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी, दृढ़ इच्छाशक्ति वाले नेता और भारत की एकता के प्रतीक थे। उन्होंने स्वतंत्र भारत को संगठित करने का जो कार्य किया, वह इतिहास में अनुपम है।

जब देश स्वतंत्र हुआ, तब भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी — सैकड़ों रियासतों का एकीकरण। सरदार पटेल ने अपनी बुद्धिमत्ता, कठोर परिश्रम और अद्भुत कूटनीति के बल पर उन सभी रियासतों को भारत माता की गोद में मिलाने का कार्य किया। उनके इस योगदान के कारण ही उन्हें “लौह पुरुष” कहा गया। उन्होंने देश को बताया कि एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

गुजरात की धरती, जहाँ उन्होंने जन्म लिया, आज भी उनके गौरव को गर्व से संजोए हुए है। नर्मदा नदी के तट पर स्थित केवड़िया (अब एकता नगर) में उनकी याद में स्थापित है “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” — विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा। यह स्मारक न केवल एक मूर्ति है, बल्कि भारत की एकता, शक्ति और अटूट संकल्प का प्रतीक है। यहाँ आने वाला प्रत्येक व्यक्ति सरदार पटेल के जीवन से प्रेरणा लेकर लौटता है।

केवड़िया की सुंदरता और प्राकृतिक वातावरण इस स्थल को और भी पवित्र बना देता है। हर साल लाखों लोग यहाँ आते हैं, श्रद्धा और गर्व से सरदार पटेल को नमन करते हैं। यह स्थान आधुनिक भारत के निर्माण की कहानी कहता है — एक ऐसे नेता की कहानी, जिसने न कभी थकना जाना, न रुकना और न ही झुकना।

सरदार पटेल का जीवन हमें यह सिखाता है कि जब इरादे मजबूत हों और मन में देश के प्रति सच्ची भावना हो, तो कोई भी कार्य असंभव नहीं। उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा। केवड़िया की यह धरती सदैव गवाही देती रहेगी उस महान आत्मा की, जिसने भारत को एक सूत्र में पिरोया — सदैव, सशक्त और एकजुट।

जय एकता, जय सरदार।

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