Royal Indian Hotel: कोलकाता का ऐतिहासिक रेस्टोरेंट

चित्र
   रॉयल इंडियन होटल कोलकाता की पुरानी गलियों में, नख़ोदा मस्जिद के पास बाराबाजार इलाके में एक ऐसा रेस्टोरेंट है, जो केवल खाने की जगह नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और स्वाद की विरासत का हिस्सा है रॉयल इंडियन होटल। लगभग 1905 में स्थापित यह रेस्टोरेंट शहर के सबसे पुराने और लगातार चल रहे खाने के स्थलों में से एक माना जाता है।नाम में “होटल” होने के बावजूद, यह जगह  कोलकाता की सबसे पुरानी और पारंपरिक मुग़लई बिरयानी रेस्टोरेंट के रूप में जाना जाता  है। पुराने समय में भारत में कई खाने-पीने के स्थलों को “होटल” कहा जाता था, लेकिन इसका मतलब था कि वे खाना और रुकने की सुविधा दोनों दे सकते थे। आज रॉयल इंडियन होटल मुख्य रूप से खाने के लिए प्रसिद्ध है और इसकी होटल जैसी लॉजिंग सुविधा मौजूद नहीं है। पुराने कोलकाता की खुशबू  रॉयल इंडियन होटल में कदम रखते ही पुराने कोलकाता का माहौल महसूस होता है। दरवाजा खोलते ही मिट्टी और मसालों की हल्की खुशबू, पुराने लकड़ी के फर्नीचर और दीवारों पर लगे पोस्टर्स आपको समय में पीछे ले जाते हैं। यहाँ बैठते ही लगता है जैसे आप ट्राम और घोड़े वाली ग...

दुनिया की पहली फोटो की कहानी

जानिए कैसे जोसेफ नाइसफोर निएप्स ने 1826 में इतिहास की पहली फोटो ली

( दुनिया की पहली फोटो )
1826 की एक फ्रांस की दोपहर में, जोसेफ नाइसफोर निएप्स नाम के एक वैज्ञानिक ने इतिहास की पहली तस्वीर कैद की। उस वक्त कैमरे आज जैसे नहीं थे, बल्कि एक बड़ा लकड़ी का डिवाइस था जिसमें बिटुमेन नामक केमिकल लगी एक प्लेट थी। उन्होंने अपने घर की खिड़की से बाहर का दृश्य उस प्लेट पर कैमरा ऑब्स्क्यूरा की मदद से कैद किया। इस प्रक्रिया में सूरज की रोशनी लगभग 8 घंटे तक लगी रही। धीरे-धीरे एक धुंधली सी परछाई प्लेट पर उभरने लगी, जो दुनिया की पहली तस्वीर बनी। इसे “View from the Window at Le Gras” कहा जाता है।

जोसेफ निएप्स को उस वक्त शायद पता नहीं था कि उनके इस छोटे प्रयोग से पूरी दुनिया की यादें कैद करने का रास्ता खुल जाएगा। इस तस्वीर ने फोटोग्राफी की नींव रखी, जो आगे चलकर मोबाइल कैमरे और डिजिटल

फोटोग्राफी तक पहुंची। यह तस्वीर आज भी University of Texas में सुरक्षित रखी गई है और निएप्स को “Father of Photography” कहा जाता है।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बड़ी खोजें अक्सर छोटे कदमों से शुरू होती हैं। अगर निएप्स ने अपनी मेहनत और धैर्य नहीं दिखाया होता, तो शायद हम आज

अपनी यादों को तस्वीरों में नहीं संजो पाते। एक सपना और एक प्रयास पूरी दुनिया बदल सकता है।

अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और कमेंट में बताएं कि आपने अपनी पहली तस्वीर कब खींची थी।

Read Also : पेरिस की सड़कों पर भारत की यादें : एक पुराना सफर

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

लोकप्रिय पोस्ट

ग्रीस में 3,100 से अधिक 100 साल की उम्र वाले लोग: लंबी उम्र का रहस्य

भारतीय लोग ज्योतिष में क्यों विश्वास करते हैं

प्रीवेडिंग शूट का नया ट्रेंड: उदयपुर की खूबसूरत लोकेशंस

भोपाल को झीलों का शहर क्यों कहा जाता है

सुरेश रैना का नया शॉट : एम्स्टर्डम में इंडियन रेस्टोरेंट

भेड़ाघाट: जहाँ पत्थर बोलते हैं और पानी धुआं बन उड़ता है

केरल की शांतिपूर्ण कुमाराकोम यात्रा: 4 दिन की कहानी

बीकानेर राजस्थान के इतिहास की धरोहर

भारत के पतंग उत्सव रंग उमंग और परंपराओं का अनोखा संगम