ज़ायके का संगम: वो शहर जहाँ की सुबह कढ़ी कचौड़ी की खुशबू से होती है गुलज़ार

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  भारतीय खान-पान की दुनिया में कचौड़ी का नाम आते ही मन में एक करारा और तीखा स्वाद घुल जाता है, लेकिन जब इसी खस्ता कचौड़ी के ऊपर गरमा-गरम चटपटी कढ़ी डाली जाती है, तो वह स्वाद एक नया ही अनुभव बन जाता है। भारत के कई शहरों में कढ़ी-कचौड़ी केवल एक नाश्ता नहीं बल्कि वहाँ की जीवनशैली और संस्कृति का अहम हिस्सा है। राजस्थान का ajmer    शहर इस मामले में सबसे आगे है, जहाँ के केसरगंज और गोल प्याऊ जैसे इलाकों में सुबह होते ही कढ़ी-कचौड़ी की खुशबू हर गली में महकने लगती है। यहाँ की खास बात यह है कि दाल की कचौड़ी को मथकर उसके ऊपर बेसन की पतली और मसालेदार कढ़ी डाली जाती है, जो सेलिब्रिटीज से लेकर आम आदमी तक सबको दीवाना बना देती है। राजस्थान का ही एक और ज़िला bhartpur  अपनी छोटी कचौड़ियों के लिए 'सिटी ऑफ कचौड़ी' के नाम से विख्यात है। यहाँ कढ़ी के साथ छोटी-छोटी कुरकुरी कचौड़ियाँ परोसी जाती हैं, जो बाहरी पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण हैं। इसके अलावाjalor  में दही और कढ़ी के साथ कचौड़ी का कॉम्बो काफी लोकप्रिय है। मध्य प्रदेश केindore  औरjallor जैसे शहरों में ...

बसंत पंचमी: ज्ञान, उल्लास और नवचेतना का पर्व

 


23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का पावन पर्व पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिन प्रकृति के नवजीवन, ज्ञान की आराधना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। शीत ऋतु की विदाई और बसंत के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नई ताजगी, उल्लास और सृजनशीलता का संचार होता है। खेतों में लहलहाती सरसों, पेड़ों पर नई कोंपलें और हवाओं में घुली हल्की सुगंध इस बात का संकेत देती है कि प्रकृति मुस्कुरा उठी है।

बसंत पंचमी का विशेष महत्व मां सरस्वती की उपासना से जुड़ा है। इस दिन विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी सरस्वती की आराधना की जाती है। विद्यार्थी, कलाकार और ज्ञान साधक इस दिन विशेष श्रद्धा के साथ मां सरस्वती से प्रज्ञा और सफलता का आशीर्वाद मांगते हैं। पीले वस्त्र धारण करना, पीले पुष्प अर्पित करना और पीले व्यंजनों का सेवन इस पर्व की विशिष्ट पहचान है, क्योंकि पीला रंग उत्साह, समृद्धि और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक सोच और नए आरंभ का संदेश भी देता है। बसंत पंचमी हमें यह सिखाती है कि जैसे प्रकृति हर वर्ष स्वयं को नव रूप में ढाल लेती है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में नकारात्मकता को छोड़कर ज्ञान, प्रेम और सृजनशीलता को अपनाना चाहिए। यह दिन कला, साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों के लिए विशेष प्रेरणा लेकर आता है।

23 जनवरी 2026 को मनाई जाने वाली बसंत पंचमी न केवल ऋतुओं के परिवर्तन का उत्सव है, बल्कि यह आत्मिक जागरण और बौद्धिक विकास का भी पर्व है। यह अवसर हमें अपने भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानने और उन्हें निखारने की प्रेरणा देता है। बसंत पंचमी का यह शुभ दिन सभी के जीवन में ज्ञान, आनंद और सफलता की नई किरणें लेकर आए, यही इसकी सच्ची भावना है।

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