ज़ायके का संगम: वो शहर जहाँ की सुबह कढ़ी कचौड़ी की खुशबू से होती है गुलज़ार
सुबह-सुबह फ़िल्टर कॉफी की खुशबू और अख़बार की सरसराहट से दिन की शुरुआत होती थी। स्कूल की वर्दी पहनकर साइकिल से निकलना, रास्ते में इडली–डोसा की दुकानों से आती खुशबू, और दोस्तों के साथ तमिल–हिंदी का मिला-जुला संवाद—ये सब मेरी यादों का अभिन्न हिस्सा हैं।
मरीना बीच मेरे बचपन का सबसे बड़ा मैदान था। रेत पर दौड़ना, लहरों से डरते-डरते पास जाना, और शाम को डूबते सूरज को देखना—यहीं मैंने धैर्य और विनम्रता सीखी। समुद्र सिखाता है कि शोर के बावजूद शांति कैसे रखी जाए।
चेन्नई की संस्कृति ने मुझे विविधता का सम्मान करना सिखाया। पोंगल की मिठास, भरतनाट्यम की लय, और मंदिरों की वास्तुकला—हर अनुभव ने मेरे व्यक्तित्व को आकार दिया। यहाँ की गर्मी ने सहनशीलता सिखाई और यहाँ के लोगों ने सरलता।
आज भले ही मैं कहीं और हूँ, लेकिन चेन्नई मेरे भीतर बसा है। मेरा बचपन, मेरी जड़ें, और मेरी पहचान—सब इस शहर से जुड़ी हैं। Bolti Kalam के माध्यम से मैं उन यादों को शब्द दे रहा हूँ, ताकि चेन्नई की आत्मा पाठकों तक पहुँचे।
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