ज़ायके का संगम: वो शहर जहाँ की सुबह कढ़ी कचौड़ी की खुशबू से होती है गुलज़ार

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  भारतीय खान-पान की दुनिया में कचौड़ी का नाम आते ही मन में एक करारा और तीखा स्वाद घुल जाता है, लेकिन जब इसी खस्ता कचौड़ी के ऊपर गरमा-गरम चटपटी कढ़ी डाली जाती है, तो वह स्वाद एक नया ही अनुभव बन जाता है। भारत के कई शहरों में कढ़ी-कचौड़ी केवल एक नाश्ता नहीं बल्कि वहाँ की जीवनशैली और संस्कृति का अहम हिस्सा है। राजस्थान का ajmer    शहर इस मामले में सबसे आगे है, जहाँ के केसरगंज और गोल प्याऊ जैसे इलाकों में सुबह होते ही कढ़ी-कचौड़ी की खुशबू हर गली में महकने लगती है। यहाँ की खास बात यह है कि दाल की कचौड़ी को मथकर उसके ऊपर बेसन की पतली और मसालेदार कढ़ी डाली जाती है, जो सेलिब्रिटीज से लेकर आम आदमी तक सबको दीवाना बना देती है। राजस्थान का ही एक और ज़िला bhartpur  अपनी छोटी कचौड़ियों के लिए 'सिटी ऑफ कचौड़ी' के नाम से विख्यात है। यहाँ कढ़ी के साथ छोटी-छोटी कुरकुरी कचौड़ियाँ परोसी जाती हैं, जो बाहरी पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण हैं। इसके अलावाjalor  में दही और कढ़ी के साथ कचौड़ी का कॉम्बो काफी लोकप्रिय है। मध्य प्रदेश केindore  औरjallor जैसे शहरों में ...

पुदुचेरी, जिसे पहले पांडिचेरी के नाम से जाना जाता था

 


अपनी कल्पनाओं की कुर्सी बांध लीजिए और तैयार हो जाइए पुदुचेरी के रंगीन और दिलचस्प हलचल में मग्न होने के लिए। 

सोचिए एक ऐसे शहर की कल्पना कीजिए जो फ़्रांसीसी नज़ाकत और भारतीय जोश का अनोखा संगम हो, जहाँ बागेट्स का साथ डोसा देते हों और क्रोइसां की मुलाक़ात चाय से होती हो। हाँ, आपने बिल्कुल सही सुना यह मानो बंगाल की खाड़ी के किनारे हो रहा एक पाक-कलात्मक क्रॉसओवर एपिसोड हो। आइए हमारे साथ इस रंगीन सफ़र पर, उन गलियों में जहाँ बोगनवेलिया की बेलें सजी हों और हर मोड़ पर कोई सुनाता लगे “बोंजूर” और “वनक्कम” एक साथ। पुदुचेरी यह सिर्फ़ एक जगह नहीं, बल्कि एक एहसास है, और हम यहाँ आए हैं इसे महसूस करने, हर मुस्कान और हर पेस्ट्री के साथ! 

पुदुचेरी, जिसे पहले पांडिचेरी के नाम से जाना जाता था, फ्रांसीसी उपनिवेशवाद के आगमन के बाद "पूर्व का फ्रेंच रिवेरा" कहलाने लगा। पुदुचेरी का अर्थ है "नया नगर," जो मुख्य रूप से "पोडुके" से लिया गया है वह बंदरगाह और बाज़ार था, जहाँ पहली शताब्दी में रोमन व्यापार हुआ करता था। यह नगर कभी वैदिक विद्वानों का केंद्र हुआ करता था, इसलिए इसे वेदपुरी भी कहा जाता था। अक्सर भारत की फ्रेंच राजधानी कहे जाने वाला पुदुचेरी एक जीवंत तटीय शहर है, जो अपनी सादगी और आकर्षक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। इस क्षेत्र का मूल नाम पुतुचेरी तमिल शब्दों पुतु (“नया”) और चेरी (“गांव”) से बना है, जिसका अर्थ है "नई बस्ती"। 

फ्रांसीसियों ने इसे पॉंडिशेरी कहा, और 2006 में इसका आधिकारिक नाम बदलकर पुदुचेरी कर दिया गया। यह शहर भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है, चेन्नई से लगभग 170 किमी की दूरी पर
पुदुचेरी का एक और प्रमुख आकर्षण है श्री अरविंदो आश्रम, जो 1926 में श्री अरविंदो और मां (मीरा अल्फ़ासा) द्वारा स्थापित एक आध्यात्मिक समुदाय है। यह आश्रम योग और ध्यान का केंद्र है और हाल के वर्षों में इसने विश्वभर के उन पर्यटकों को आकर्षित किया है जो आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में आते हैं। इसके पास स्थित है प्रसिद्ध औरोविले, एक प्रयोगात्मक नगर जो अपनी अनूठी सोच और जीवनशैली के लिए जाना जाता है। यहाँ स्थित मातृमंदिर (जिसका अर्थ है "मां का मंदिर") गोलाकार शैली में निर्मित एक अद्वितीय स्थापत्य दृश्य है। यह स्थान समग्र योग (इंटीग्रल योग) के साधकों के लिए अत्यधिक आध्यात्मिक महत्व रखता है और सभी वर्गों के आगंतुकों को अपनी ओर खींचता है। 

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