ज़ायके का संगम: वो शहर जहाँ की सुबह कढ़ी कचौड़ी की खुशबू से होती है गुलज़ार
आज हम उस युग में प्रवेश कर रहे हैं, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन के हर पहलू में अपनी जगह बना रहा है। स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, परिवहन और सामाजिक जीवन तक। लेकिन इस तेजी से बदलती दुनिया में बुज़ुर्गों का भविष्य कैसा होगा, यह एक बड़ा सवाल है।
AI की मदद से बुज़ुर्गों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से कहीं बेहतर हो सकती हैं। स्मार्ट हेल्थ ऐप्स, रिमोट मॉनिटरिंग डिवाइस और रोबोटिक हेल्थकेयर सिस्टम समय पर दवा लेने की याद दिला सकते हैं, स्वास्थ्य की निगरानी कर सकते हैं और डॉक्टरों से वर्चुअल अपॉइंटमेंट की सुविधा भी दे सकते हैं। फिर भी विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि तकनीक के अत्यधिक भरोसे से सामाजिक जुड़ाव और व्यक्तिगत देखभाल पर असर पड़ सकता है, क्योंकि इंसानी संवेदनशीलता मशीनें पूरी तरह नहीं दे सकतीं।
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AI और ऑटोमेशन रोज़गार और वित्तीय सुरक्षा को भी प्रभावित कर रहे हैं। बुज़ुर्ग जो अभी भी काम कर रहे हैं या आर्थिक रूप से सक्रिय हैं, उन्हें नई तकनीक सीखने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही, पेंशन और निवेश जैसी योजनाओं को AI-सहायता वाले टूल्स के माध्यम से बेहतर बनाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए डिजिटल साक्षरता जरूरी है।
सामाजिक जीवन में AI रोबोट और वर्चुअल असिस्टेंट बुज़ुर्गों के अकेलेपन को कम करने में मदद कर सकते हैं। फिर भी मनोवैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि मानव संबंधों की कमी मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। बुज़ुर्गों को AI को सहायक के रूप में अपनाना चाहिए, न कि जीवन का अकेला साथी मान लेना चाहिए।
भविष्य में AI बुज़ुर्गों के लिए अवसर और चुनौतियां दोनों लेकर आएगा। जो लोग तकनीकी बदलाव के साथ कदम मिलाकर चलेंगे, उन्हें स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन की सुविधा के नए विकल्प मिलेंगे। वहीं, जो लोग डिजिटल दुनिया से कटे रहेंगे, उनके लिए जीवन जटिल और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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