घेवर की मिठास और रक्षाबंधन का महत्व

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रक्षाबंधन भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है। रक्षाबंधन के त्योहार में मिठाइयों का भी विशेष महत्व होता है, और घेवर इस अवसर की खास मिठाइयों में से एक है।  खास तौर पर राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में लोकप्रिय है। सावन के मौसम और रक्षाबंधन के आसपास बाजारों में घेवर की अलग-अलग किस्में आसानी से देखने को मिलती हैं। इसकी जालीदार बनावट, कुरकुरापन और मीठा स्वाद त्योहार की खुशी को और बढ़ा देते हैं। रक्षाबंधन पर जब भाई-बहन एक-दूसरे से मिलते हैं, तो मिठाई खिलाकर खुशी बांटने की परंपरा है। ऐसे में घेवर सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि त्योहार की खुशियों और पारिवारिक अपनापन का स्वाद बन जाता है।रक्षाबंधन के दिन घर में राखी, पूजा और मिठाइयों की तैयारियां होती हैं। कई परिवारों में घेवर खरीदने या घर पर बनाने की परंपरा भी रही है। भाई को राखी बांधने के बाद उसे घेवर खिलाना इस खास दिन को और यादगार बना देता है। रक्षाबंधन...

ज़ायके का संगम: वो शहर जहाँ की सुबह कढ़ी कचौड़ी की खुशबू से होती है गुलज़ार

 


भारतीय खान-पान की दुनिया में कचौड़ी का नाम आते ही मन में एक करारा और तीखा स्वाद घुल जाता है, लेकिन जब इसी खस्ता कचौड़ी के ऊपर गरमा-गरम चटपटी कढ़ी डाली जाती है, तो वह स्वाद एक नया ही अनुभव बन जाता है। भारत के कई शहरों में कढ़ी-कचौड़ी केवल एक नाश्ता नहीं बल्कि वहाँ की जीवनशैली और संस्कृति का अहम हिस्सा है। राजस्थान का ajmer  शहर इस मामले में सबसे आगे है, जहाँ के केसरगंज और गोल प्याऊ जैसे इलाकों में सुबह होते ही कढ़ी-कचौड़ी की खुशबू हर गली में महकने लगती है। यहाँ की खास बात यह है कि दाल की कचौड़ी को मथकर उसके ऊपर बेसन की पतली और मसालेदार कढ़ी डाली जाती है, जो सेलिब्रिटीज से लेकर आम आदमी तक सबको दीवाना बना देती है।

राजस्थान का ही एक और ज़िला bhartpur  अपनी छोटी कचौड़ियों के लिए 'सिटी ऑफ कचौड़ी' के नाम से विख्यात है। यहाँ कढ़ी के साथ छोटी-छोटी कुरकुरी कचौड़ियाँ परोसी जाती हैं, जो बाहरी पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण हैं। इसके अलावाjalor  में दही और कढ़ी के साथ कचौड़ी का कॉम्बो काफी लोकप्रिय है। मध्य प्रदेश केindore  औरjallor जैसे शहरों में भी कढ़ी-कचौड़ी के प्रति लोगों की दीवानगी देखते ही बनती है, जहाँ मात्र ₹20 में यह भरपेट नाश्ता उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश के Mathura virandvan  में भी कचौड़ी का एक अलग स्वरूप मिलता है, जहाँ इसे कढ़ी या आलू की सब्ज़ी के साथ बड़े चाव से खाया जाता है। पश्चिम बंगाल केkolkat  के बड़ा बाज़ार जैसे क्षेत्रों में भी कढ़ी-कचौड़ी का अपना एक खास स्थान है। यह ज़ायका आज सोशल मीडिया और पर्यटकों के माध्यम से दूर-दूर तक पहुँच रहा है, जिससे इन शहरों की एक अलग पहचान बन गई है।

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