ज़ायके का संगम: वो शहर जहाँ की सुबह कढ़ी कचौड़ी की खुशबू से होती है गुलज़ार
भारतीय खान-पान की दुनिया में कचौड़ी का नाम आते ही मन में एक करारा और तीखा स्वाद घुल जाता है, लेकिन जब इसी खस्ता कचौड़ी के ऊपर गरमा-गरम चटपटी कढ़ी डाली जाती है, तो वह स्वाद एक नया ही अनुभव बन जाता है। भारत के कई शहरों में कढ़ी-कचौड़ी केवल एक नाश्ता नहीं बल्कि वहाँ की जीवनशैली और संस्कृति का अहम हिस्सा है। राजस्थान का ajmer शहर इस मामले में सबसे आगे है, जहाँ के केसरगंज और गोल प्याऊ जैसे इलाकों में सुबह होते ही कढ़ी-कचौड़ी की खुशबू हर गली में महकने लगती है। यहाँ की खास बात यह है कि दाल की कचौड़ी को मथकर उसके ऊपर बेसन की पतली और मसालेदार कढ़ी डाली जाती है, जो सेलिब्रिटीज से लेकर आम आदमी तक सबको दीवाना बना देती है।
राजस्थान का ही एक और ज़िला bhartpur अपनी छोटी कचौड़ियों के लिए 'सिटी ऑफ कचौड़ी' के नाम से विख्यात है। यहाँ कढ़ी के साथ छोटी-छोटी कुरकुरी कचौड़ियाँ परोसी जाती हैं, जो बाहरी पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण हैं। इसके अलावाjalor में दही और कढ़ी के साथ कचौड़ी का कॉम्बो काफी लोकप्रिय है। मध्य प्रदेश केindore औरjallor जैसे शहरों में भी कढ़ी-कचौड़ी के प्रति लोगों की दीवानगी देखते ही बनती है, जहाँ मात्र ₹20 में यह भरपेट नाश्ता उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश के Mathura virandvan में भी कचौड़ी का एक अलग स्वरूप मिलता है, जहाँ इसे कढ़ी या आलू की सब्ज़ी के साथ बड़े चाव से खाया जाता है। पश्चिम बंगाल केkolkat के बड़ा बाज़ार जैसे क्षेत्रों में भी कढ़ी-कचौड़ी का अपना एक खास स्थान है। यह ज़ायका आज सोशल मीडिया और पर्यटकों के माध्यम से दूर-दूर तक पहुँच रहा है, जिससे इन शहरों की एक अलग पहचान बन गई है।

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